The state’s next chief minister : मणिपुर: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री ?

The state’s next chief minister : मणिपुर: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री

The state's next chief minister : मणिपुर: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री
The state’s next chief minister : मणिपुर: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री

 

उत्तर भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है, जिससे उनके अगले मुख्यमंत्री बनने का मार्ग साफ हो गया है। इस निर्णय के साथ ही मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के बाद एक निर्वाचित सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।


बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि

मणिपुर पिछले लगभग एक साल से राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) के अधीन था। राज्यपाल द्वारा यह कदम तब उठाया गया था जब फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, और राज्य में जारी जातीय हिंसा और भ्रष्टाचार-सम्बन्धी विवादों के कारण विधानसभा को सक्रिय सरकार नहीं मिल पाई थी। राष्ट्रपति शासन को संसद द्वारा छह-छह महीने के विस्तार के साथ करीब एक वर्ष तक जारी रखा गया।

भाजपा को राज्य विधानसभा में स्पष्ट बहुमत मिला है — 60 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के पास अकेले 37 विधायक हैं। इसके अलावा उसकी राष्ट्रीय जनवादी गठबंधन (NDA) की सहयोगी पार्टियों का समर्थन भी मौजूद है, जिससे सरकार गठन के लिए आवश्यक संख्या पर पार्टी का कब्जा है।

The state's next chief minister : मणिपुर: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री
The state’s next chief minister : मणिपुर: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री

युमनाम खेमचंद सिंह: कौन हैं वे?

युमनाम खेमचंद सिंह (या Y. Khemchand Singh) मणिपुर के एक अनुभवी और प्रतिष्ठित राजनेता हैं। वे 62 वर्ष के हैं और राजनीतिक जीवन में दशकों का अनुभव रखते हैं।
उनका राजनीतिक सफर भाजपा से जुड़ने से पहले शुरू हुआ; वे 2012 में राजनीति में उतरे और फिर 2017 तथा 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर सिंगजमेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में निर्वाचित हुए।

खेमचंद सिंह ने अपने राजनीतिक करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उन्होंने मणिपुर विधानसभा सदन के अध्यक्ष (स्पीकर) के तौर पर भी कार्य किया है, और 2022 के चुनाव के बाद बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कई मूल विभागों का मंत्रालय संभाला। इनमें नगर प्रशासन एवं आवास विकास, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज तथा शिक्षा विभाग शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, खेमचंद सिंह का नाम इसलिए भी उभर कर आया है क्योंकि उन्हें विभिन्न समुदायों — विशेष रूप से मैतै (Meitei), कुकि-ज़ो और नागा समुदायों — द्वारा स्वीकार्यता प्राप्त है। यह राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मणिपुर में जातीय संतुलन और सामुदायिक सहयोग स्थिरता के लिए जरूरी है।

साथ ही, खेमचंद सिंह की राजनीतिक छवि स्वच्छ, विवाद-रहित और कर्म-प्रधान बताई जा रही है। यह कारक भाजपा के लिए भी बड़ी वजह माना जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने का विकल्प चुना।


विधायक दल की बैठक और निर्णय

भाजपा के विधायकों की बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसमें पार्टी के केंद्रीय व उत्तर-पूर्व टीम के वरिष्ठ नेताओं की भी उपस्थिति थी। बैठक के बाद खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। यह पद तय करके भाजपा ने मणिपुर में सरकार के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अगला कदम यह होगा कि मणिपुर के राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए नाम पेश किया जाएगा, और फिर मणिपुर विधानसभा में बहुमत साबित करके खेमचंद सिंह शपथ ग्रहण करेंगे। लगभग एक वर्ष बाद यह पहला मौका है जब निर्वाचित सरकार सत्ता में लौट रही है; इससे पहले राष्ट्रपति शासन लागू था और निर्वाचित विधायकों की भागीदारी नहीं थी।


नई सरकार में संभावित समीकरण

पार्टी ने संकेत दिया है कि नई सरकार जातीय प्रतिनिधित्व और संतुलन पर भी ध्यान देगी। खबरों के अनुसार भाजपा अपनी कैबिनेट में दो डिप्टी मुख्यमंत्री की स्थिति भी शामिल कर सकती है — एक कुकि-ज़ो समुदाय के लिए और एक नागा समुदाय के लिए। यह पहल राज्य में स्थिरता, सामाजिक मेल-जोल और समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समझी जा रही है।

इस बदलाव के साथ राजनीतिक दबाव वाले नेताओं को नई भूमिका देने या उन्हें बाहर रखने जैसे निर्णय भी पार्टी के एजेंडे का हिस्सा हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पहले मुख्यमंत्री रहे एन. बीरेन सिंह को कैबिनेट में कोई प्रमुख भूमिका नहीं दी जा सकती है, जिससे राजनीतिक नेतृत्व को नया स्वरूप मिलता दिख रहा है।


राज्य में राजनीतिक माहौल और चुनौतियाँ

मणिपुर पिछले कई वर्षों से जातीय तनाव और अस्थिरता से जूझ रहा है। 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा में बड़ी संख्या में मौते, विस्थापन और सामाजिक विभाजन देखने को मिला। राष्ट्रपति शासन की अवधि में सुरक्षा और शांति बहाल करने के प्रयास जारी रहे, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व की अनुपस्थिति ने कुछ चुनौतियों को जटिल बनाया।

अब जब भाजपा के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार बनने जा रही है, तो जनता की उम्मीदें शांति, विकास, रोजगार और सामुदायिक संवाद पर केंद्रित हैं। खेमचंद सिंह की सरकार को इन मुद्दों पर विशेष रूप से काम करना होगा ताकि राज्य में स्थिरता और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा मिल सके।


निष्कर्ष

युमनाम खेमचंद सिंह का मणिपुर का अगला मुख्यमंत्री बनना न सिर्फ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य की दिशा, समुदायों के बीच विश्वास बहाली, और लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को पुनः सक्रिय करने का संकेत भी है। भाजपा ने उन्हें विधायक दल का नेता चुनकर सत्ता के शिखर पर भेजा है, जिससे मणिपुर सरकार जल्द ही नए नेतृत्व के साथ गठन करेगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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