They have to face tragedy : लापता हो गए मासूम बच्चे हो या युवाओ को किस त्रासदी का सामना करना पड़ता

जिस घर से कोई बच्चा या बच्चियां गुम हो जाती,
- उसमें पसरे दुख का बस अंदाजा ही लगाया जा सकता..!! सरकार और संबंधित महकमों के रुख और उनकी कार्यशैली कैसी..? बड़े बड़े महानगरों सहित दिल्ली वे प्रमुख राज्यों में बच्चों सहित बड़े लोगों के लापता होने के मामलों में काफी बढ़ोतरी..! सरकारों की प्राथमिकता सूची में यह समस्या क्या कोई महत्त्व नहीं..? देश भर में गुम हो जाने वाले बच्चों को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही है! अमूमन हर साल गायब हुए बच्चों के आंकड़े सामने आते हैं, इससे संबंधित रिपोर्ट पेश की जाती है, इस समस्या के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती है और फिर कुछ समय बाद इस मसले पर एक विचित्र शांति छा जाती है। ऐसा लगता है कि शासन से लेकर समाज तक लापता बच्चों की समस्या को लेकर सहज हो जाता है!
- जब कि जिस घर से कोई बच्चा गुम हो जाता है, उसमें पसरे दुख का बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है!गायब हो गए बच्चों को किन त्रासद हालात से गुजरना पड़ता है, इसकी कल्पना भी किसी भी संवेदनशील इंसान को दहला देगी! इस समस्या को लेकर सरकार और संबंधित महकमों के रुख और उनकी कार्यशैली कैसी रही है, इसे समझना बहुत मुश्किल नहीं है। हर अगले साल लापता होने वाले बच्चों वे बच्चियों एवं बड़े लोगों के आंकड़ों में इजाफा बताता है कि इस त्रासदी के प्रति सरकारों और प्रशासन ने एक तरह से अनदेखी की मुद्रा अख्तियार कर रखी है।एक बार फिर दिल्ली से ऐसे बच्चों को लेकर जो आंकड़े और तथ्य सामने आए हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि तमाम चिंताओं के बावजूद यह समस्या विकराल और जटिल होती जा रही है!

रिपोर्ट के मुताबिक,
- देश के बड़े बड़े महानगरों सहित दिल्ली वे प्रमुख राज्यों में बच्चों के लापता होने का मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। सरकारों की ओर से हर अगले रोज यह दावा किया जाता है कि वह कानून-व्यवस्था में सुधार और आम लोगों की सुरक्षा के मोर्चे पर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पहले के मुकाबले ज्यादा शिद्दत से काम कर रही है। लेकिन हकीकत इसके उलट दिखती है। यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि लापता हो गए बच्चों को किस त्रासदी का सामना करना पड़ता है। मानव तस्करी के दायरे में कैसी की वीभत्सताएं पलती हैं और उसमें गायब करके लाए गए बच्चों को किस तरह झोंका जाता है,
- इसकी सच्चाई भी अक्सर सामने आती रही है। यह कोई छिपा तथ्य नहीं है कि मानव तस्करों के जाल में फंसाई गई बच्चियों को कैसे देह-व्यापार की आग में झोंक दिया जाता है। ज्यादातर बच्चे भीख मांगने, घरेलू नौकर के रूप में काम करने और अन्य जगहों पर बाल मजदूरी करने से लेकर दूसरे अमानवीय हालात में फंस जाते हैं। उन्हें यौन शोषण के अड्डों या अंगों के कारोबारियों को भी बेच दिया जाता है। इस संबंध में पूर्व में भी कई बार सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकारों को कई मौकों पर फटकारा है और इस समस्या पर काबू पाने के लिए तंत्र बनाने का निर्देश दिया है। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारों की प्राथमिकता सूची में यह समस्या कोई महत्त्व नहीं रखती!
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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