
ग्वालियर/कानपुर।
ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने ऑटोमोबाइल कंपनी में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी हासिल करने के आरोपी देवेंद्र कुमार दुबे को कानपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने नौकरी हासिल करने के लिए पिछली कंपनी में काम करने और वहां मिलने वाली सैलरी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। बाद में कंपनी की ओर से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र कुमार दुबे पर आरोप है कि उसने ऑटोमोबाइल कंपनी में उच्च पद पर नियुक्ति हासिल करने के लिए फर्जी सैलरी स्लिप और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया। आरोपी ने अपनी पिछली नौकरी से संबंधित दस्तावेज कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किए थे। दस्तावेजों में उसने पिछली नौकरी में 2,80,670 रुपये मासिक वेतन मिलने का दावा किया था।
कंपनी में नियुक्ति के बाद कुछ समय तक आरोपी ने ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्य किया। बाद में जब उसने कंपनी छोड़ दी तो उसके द्वारा नियुक्ति के समय उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पिछली नौकरी और वेतन से संबंधित दावों को लेकर कंपनी को संदेह हुआ। इसके बाद दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान कथित तौर पर आरोपी द्वारा बताए गए पुराने रोजगार का रिकॉर्ड संबंधित स्तर पर नहीं मिला। इसके अलावा बैंक से संबंधित दस्तावेजों की जांच में भी कथित तौर पर विसंगतियां सामने आईं। कंपनी की ओर से दस्तावेजों की सत्यता को लेकर जांच आगे बढ़ाई गई तो मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची।
पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों की जांच के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसके बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के कानपुर में होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए देवेंद्र कुमार दुबे को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने नौकरी के लिए अपने अनुभव और वेतन को अधिक दर्शाने वाले दस्तावेजों का कथित रूप से इस्तेमाल किया था। कंपनी में उच्च पद के लिए आवेदन करते समय उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट और सैलरी स्लिप को नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया। नियुक्ति के बाद दस्तावेजों का सत्यापन होने पर मामले की वास्तविकता सामने आने की बात कही जा रही है।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और बैंक से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई। पुलिस का कहना है कि पुराने रोजगार से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और बैंक दस्तावेजों में संदिग्ध तथ्य सामने आने के बाद जांच को आगे बढ़ाया गया।

इस मामले में कंपनी की ओर से यह आरोप सामने आया कि आरोपी ने नियुक्ति हासिल करने के लिए गलत जानकारी और कथित फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। कंपनी को जब दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई गई। जांच के बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।
देवेंद्र कुमार दुबे की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच ने उससे मामले से जुड़े दस्तावेजों और नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया के संबंध में पूछताछ की। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने या उपलब्ध कराने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपी ने कंपनी में नियुक्ति के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इसके अलावा उन दस्तावेजों को तैयार करने, सत्यापन प्रक्रिया में प्रस्तुत करने और कंपनी के रिकॉर्ड में शामिल कराने से संबंधित तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
बताया गया कि आरोपी ने पिछली नौकरी के नाम पर 2,80,670 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने का दावा किया था। इतनी बड़ी मासिक सैलरी के आधार पर कंपनी की नियुक्ति प्रक्रिया में उसकी योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन किया गया। बाद में जब कंपनी ने संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन कराया तो उसके दावे पर सवाल उठे।
पुलिस के अनुसार, आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट में पूर्व रोजगार से संबंधित जानकारी दर्ज थी। सत्यापन के दौरान संबंधित रोजगार का रिकॉर्ड नहीं मिलने पर दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर संदेह बढ़ा। इसके साथ ही बैंक रिकॉर्ड की जांच में भी ऐसे तथ्य सामने आने की बात कही गई, जिन्हें पुलिस जांच का हिस्सा बनाया गया।
क्राइम ब्रांच द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया। अब मामले में पुलिस द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल इसी कंपनी में नौकरी हासिल करने के लिए किया था या इससे पहले भी कहीं अन्य स्थान पर ऐसे दस्तावेजों का उपयोग किया गया। इसके अलावा उसके पुराने रोजगार से जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है।
कंपनियों में उच्च पदों पर नियुक्ति के दौरान उम्मीदवारों के अनुभव और वेतन से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। इस मामले में भी नियुक्ति के बाद दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसके दौरान कथित अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।
जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच कर रही है। यदि किसी दस्तावेज को फर्जी तरीके से तैयार या इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होती है तो उससे संबंधित तथ्यों को भी विवेचना में शामिल किया जाएगा। पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।
ग्वालियर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
फिलहाल इस मामले में आरोपी पर फर्जी सैलरी स्लिप और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट के आधार पर ऑटोमोबाइल कंपनी में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी हासिल करने का आरोप है। पुलिस द्वारा आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। मामले में आगे की स्थिति जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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