Was sentenced : आगरा फैक्ट्री संचालक नरेश कुमार हत्याकांड में पत्नी समेत तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के थाना ताजगंज क्षेत्र में वर्ष 2021 में हुए चर्चित फैक्ट्री संचालक नरेश कुमार हत्याकांड में अदालत ने लगभग पांच वर्ष बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट शिव कुमार की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए तीन आरोपियों—मृतक की पत्नी प्रमिता उर्फ प्रेमिता, उसके प्रेमी रविकांत राजपूत तथा रविकांत के भाई शशिकांत राजपूत—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल 2.80 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत के इस फैसले के साथ ही वर्ष 2021 से चल रहे बहुचर्चित हत्याकांड का कानूनी निष्कर्ष सामने आया। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। निर्णय के बाद तीनों दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने की कार्रवाई पूरी की गई।
वर्ष 2021 में सामने आया था सनसनीखेज मामला
यह मामला 8 जून 2021 का है, जिसने आगरा ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में काफी चर्चा बटोरी थी। मृतक नरेश कुमार एक फैक्ट्री संचालक थे। घटना के दिन उनके पिता सुरेश चंद, निवासी सिद्धार्थनगर, को सुबह एक फोन कॉल के माध्यम से सूचना मिली कि उनके बेटे की हत्या कर दी गई है और उसका शव घर के पीछे स्थित एक खाली प्लॉट में बोरे में बंद अवस्था में पड़ा है।
सूचना मिलते ही सुरेश चंद अपने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक बोरे में बंद शव पड़ा हुआ है। जब बोरे को खोला गया तो उसमें उनके बेटे नरेश कुमार का शव मिला। इस घटना से पूरे परिवार में कोहराम मच गया और इलाके में सनसनी फैल गई।
पिता ने बहू पर जताया था हत्या की साजिश का शक
घटना के बाद सुरेश चंद ने थाना ताजगंज में मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने अपनी शिकायत में शुरुआत से ही अपनी बहू प्रमिता उर्फ प्रेमिता पर हत्या की साजिश रचने का संदेह व्यक्त किया था। उनका आरोप था कि हत्या एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई है और इसमें उनकी बहू की भूमिका हो सकती है।
पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
जांच में सामने आए कई अहम तथ्य
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की पत्नी प्रमिता की गतिविधियों और उसके संपर्कों की पड़ताल की। विवेचना के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर प्रमिता उर्फ प्रेमिता, उसके कथित प्रेमी रविकांत राजपूत और रविकांत के भाई शशिकांत राजपूत की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
पुलिस ने साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा और अभियोजन पक्ष ने गवाहों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

अदालत ने सुनाया फैसला
लंबी सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट शिव कुमार की अदालत ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल 2 लाख 80 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया। न्यायालय के आदेश के अनुसार जुर्माने की राशि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा कराई जाएगी। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।
फैसले के बाद परिवार ने जताई संतुष्टि
अदालत का फैसला आने के बाद मृतक के परिजनों ने न्यायपालिका के प्रति विश्वास व्यक्त किया। परिजनों का कहना है कि लंबे समय तक चले कानूनी संघर्ष के बाद उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उन्हें विश्वास था कि सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
परिवार के सदस्यों ने कहा कि नरेश कुमार की हत्या ने पूरे परिवार को गहरा आघात पहुंचाया था। वर्षों तक अदालत की कार्यवाही का इंतजार करने के बाद अब उन्हें न्याय मिलने से कुछ हद तक संतोष मिला है।
चर्चा में रहा था मामला
नरेश कुमार हत्याकांड उस समय क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना था। शव को बोरे में बंद कर घर के पीछे खाली प्लॉट में फेंके जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं पर जांच की और तकनीकी तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से विभिन्न दलीलें पेश की गईं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।
न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण निष्कर्ष
यह फैसला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिए जाते हैं। अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद दोषियों को सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों में कानून के अनुसार कठोर दंड का प्रावधान है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जांच, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और अभियोजन की प्रभावी पैरवी न्यायिक निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत के फैसले के बाद दोषियों के पास कानून के तहत उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार उपलब्ध है। हालांकि, वर्तमान निर्णय के अनुसार तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और उन पर कुल 2.80 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इस फैसले के साथ आगरा के चर्चित नरेश कुमार हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पूरी हो गई। लगभग पांच वर्षों तक चले इस मुकदमे में अदालत के निर्णय ने मामले को नया कानूनी निष्कर्ष दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित विभागों ने आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि मृतक के परिजनों ने फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।
YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q
YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews
Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/
Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c
अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।
आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता