We will smash them to bits : आरी गांव के लोगों की मांग- 10 दिन में सड़क दो, वरना ईंट से ईंट बजा देंगे ?

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We will smash them to bits : आरी गांव के लोगों की मांग- 10 दिन में सड़क दो, वरना ईंट से ईंट बजा देंगे ?

सैंपऊ। सैंपऊ उपखंड क्षेत्र के गांव आरी में पिछले करीब 40 वर्षों से सड़क की बदहाली और जलभराव की समस्या को लेकर लोगों में बढ़ता आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। लंबे समय से सड़क निर्माण और जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, राहगीरों और मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

संगठन के जिलाध्यक्ष सुखवेन्द्र सिंह परमार ने गांव आरी पहुंचकर एनएच-123 से बाड़ी-सैंपऊ मार्ग तथा ऐतिहासिक महादेव मंदिर रोड की स्थिति का जायजा लिया। सड़क की बदहाल स्थिति और जगह-जगह जमा पानी को देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण करीब चार दशकों से इस परेशानी को झेल रहे हैं। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

सड़क पर जलभराव से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। सड़क पर जलभराव होने के कारण राहगीरों को आवागमन में काफी दिक्कत होती है। कई स्थानों पर सड़क और आसपास के क्षेत्र में पानी जमा हो जाने से लोगों को रास्ता पार करने में परेशानी होती है। सबसे अधिक समस्या स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क क्षेत्र के कई गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ती है। इसके अलावा ऐतिहासिक महादेव मंदिर तक पहुंचने के लिए भी लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है।

सड़क की स्थिति खराब होने के कारण बरसात के मौसम में दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। जलभराव के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान सड़क निर्माण और उचित जलनिकासी व्यवस्था के बिना संभव नहीं है।

एक दर्जन गांवों की जनता प्रभावित

सुखवेन्द्र सिंह परमार ने कहा कि यह मामला केवल गांव आरी तक सीमित नहीं है। इस मार्ग से करीब एक दर्जन गांवों के लोग किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने कामकाज, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इस मार्ग से आवागमन करते हैं।

उन्होंने कहा कि सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ता है, जिनके बच्चे रोजाना स्कूल जाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। बरसात के दिनों में बच्चों को जलभराव और खराब रास्ते के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। वहीं, किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी सड़क की खराब हालत बाधा बन सकती है।

संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की वास्तविक स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराया जाए और समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

10 दिन का अल्टीमेटम

जिलाध्यक्ष सुखवेन्द्र सिंह परमार ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने मांग की कि 10 दिन के भीतर सड़क निर्माण का काम शुरू कराया जाए, अन्यथा संगठन ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

परमार ने कहा कि क्षेत्र की जनता पिछले 40 वर्षों से सड़क की समस्या झेल रही है। लोगों ने समय-समय पर अपनी समस्या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि अब जनता और अधिक इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि तय समय सीमा में सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया तो श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा। संगठन का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाएगा, लेकिन जनता की समस्या के समाधान के लिए संगठन पीछे नहीं हटेगा।

We will smash them to bits : आरी गांव के लोगों की मांग- 10 दिन में सड़क दो, वरना ईंट से ईंट बजा देंगे ?
We will smash them to bits : आरी गांव के लोगों की मांग- 10 दिन में सड़क दो, वरना ईंट से ईंट बजा देंगे ?

आश्वासन नहीं, चाहिए स्थायी समाधान

सुखवेन्द्र सिंह परमार ने कहा कि वर्षों से ग्रामीणों को आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि अब प्रशासन को कागजी कार्रवाई और आश्वासनों से आगे बढ़कर धरातल पर काम करना होगा।

उन्होंने प्रशासन से सड़क निर्माण के साथ-साथ जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की, ताकि बारिश के समय सड़क पर पानी जमा न हो। उनका कहना है कि केवल सड़क की मरम्मत कर देने से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। जलभराव के कारणों को दूर करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो हर बारिश में सड़क दोबारा खराब होने की संभावना बनी रहेगी और सरकारी धन भी बार-बार मरम्मत में खर्च होगा। इसलिए सड़क निर्माण के साथ नाली एवं जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए।

ग्रामीणों में भी बढ़ रहा रोष

सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से समस्या होने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि सड़क उनके दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी खराब स्थिति के कारण उन्हें रोजाना परेशानी उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराएं। लोगों का कहना है कि सड़क बनने से आसपास के गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और आवागमन भी सुगम हो सकेगा।

निर्णायक आंदोलन की चेतावनी

श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के जिलाध्यक्ष सुखवेन्द्र सिंह परमार ने कहा कि 40 वर्षों की उपेक्षा का अब अंत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन जनता की समस्या को लेकर गंभीर है और यदि प्रशासन ने निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की तो संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।

उन्होंने कहा कि अब आश्वासनों का समय समाप्त हो चुका है। जनता सड़क निर्माण चाहती है और प्रशासन को जनता की इस मांग को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसी बड़े आंदोलन या विवाद की स्थिति उत्पन्न होने से पहले ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया जाए।

परमार ने दोहराया कि 10 दिन के भीतर सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो संगठन ग्रामीणों के साथ मिलकर सड़क पर उतरने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान के लिए है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या आरी गांव समेत आसपास के करीब एक दर्जन गांवों के लोगों को चार दशक पुरानी सड़क और जलभराव की समस्या से जल्द राहत मिल पाती है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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