Big announcement : उत्तर प्रदेश में खत्म होगी कोटेदारी व्यवस्था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान ?

Big announcement : उत्तर प्रदेश में खत्म होगी कोटेदारी व्यवस्था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान

Big announcement : उत्तर प्रदेश में खत्म होगी कोटेदारी व्यवस्था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान ?
Big announcement : उत्तर प्रदेश में खत्म होगी कोटेदारी व्यवस्था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान ?

उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटेदारी व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की है। यह बयान मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में पोषण अभियान और सुपोषण स्वास्थ्य मेला के शुभारंभ अवसर पर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश में कोटेदारों की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा और उसकी जगह लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सब्सिडी की राशि भेजी जाएगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार में कमी आएगी और सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर शासन की योजनाएं ईमानदारी से नीचे तक पहुंचा दी जाएं, तो देश में कोई भूख, बीमारी या कुपोषण से नहीं मरेगा। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस व्यवस्था को अब बदलना चाहती है। मुख्यमंत्री का यह बयान न केवल प्रदेश की गरीब और मध्यम वर्गीय जनता के लिए एक बड़ा संदेश है, बल्कि यह कोटेदारों के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है कि वे अब अन्य वैकल्पिक व्यवसायों की ओर रुख करें।

योगी आदित्यनाथ ने कोटेदारों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब इस प्रणाली में भारी गड़बड़ियां पाई गई थीं। उन्होंने खुलासा किया कि सत्ता में आने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने करीब 30 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द किए थे। यह संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि किस स्तर पर अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ मिल रहा था, जबकि असली जरूरतमंद वंचित रह जाते थे।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मौजूदा समय में राज्य के मात्र 13 हजार कोटेदारों के यहां इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (ePoS) मशीनें लगाई गई हैं, जिससे प्रत्येक वर्ष 350 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। यह तकनीक पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और यह सुनिश्चित करती है कि अनाज सही लाभार्थी को ही मिले। अगर प्रदेश के सभी 80 हजार कोटेदारों के यहां इस तकनीक का प्रयोग किया जाए, तो करीब दो हजार करोड़ रुपये प्रति वर्ष की बचत संभव है।

लेकिन सरकार केवल तकनीकी सुधारों तक सीमित नहीं रहना चाहती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि अब सरकार Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजेगी। इससे राशन डीलरों और कोटेदारों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कोटेदारों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वे समय रहते कोई दूसरा व्यवसाय चुन लें, क्योंकि सरकार इस पुरानी प्रणाली को समाप्त करने जा रही है।

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यह बदलाव केवल अनाज वितरण तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने पोषण मिशन के तहत दी जाने वाली सहायता राशि को भी सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाए, तो कुपोषण जैसी समस्या से भी निपटा जा सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है और गरीबी की दर भी अपेक्षाकृत ऊंची है, वहां पोषण संबंधी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

सरकार के इस निर्णय से एक ओर जहां पारदर्शिता और उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर कोटेदारों और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से होने वाली गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगेगा। वर्षों से ऐसी शिकायतें आती रही हैं कि राशन कम तौला जाता है, घटिया क्वालिटी का अनाज दिया जाता है या लाभार्थियों के नाम पर अनाज बाजार में बेच दिया जाता है। DBT की व्यवस्था इन सभी समस्याओं का समाधान है, जिसमें लाभार्थी स्वयं बाजार से अपनी पसंद का अनाज खरीद सकेगा और सरकार उसे सब्सिडी के रूप में राशि प्रदान करेगी।

यह योजना केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप भी है, जो “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” की नीति को आगे बढ़ा रही है। डिजिटल इंडिया और जनधन योजना के माध्यम से लगभग हर नागरिक के पास अब बैंक खाता है, जिससे DBT को लागू करना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।

हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने से पहले सरकार को कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना होगा। पहला, सभी लाभार्थियों के बैंक खाते सुनिश्चित करने होंगे और उन्हें आधार से जोड़ना होगा। दूसरा, दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं को सुलभ और प्रभावी बनाना होगा ताकि लाभार्थी अपनी राशि निकाल सकें। तीसरा, महंगाई और बाजार मूल्य के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी की राशि समय-समय पर समायोजित की जानी चाहिए ताकि लाभार्थी को वास्तविक लाभ मिल सके।

कोटेदारों की ओर से इस कदम का विरोध होना स्वाभाविक है, क्योंकि यह उनके रोजगार को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा। लेकिन सरकार यदि इस बदलाव के साथ-साथ कोटेदारों के लिए पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवसाय की कोई योजना लाती है, तो इस प्रक्रिया को अधिक सहजता और संतुलन के साथ लागू किया जा सकता है।

अंततः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह घोषणा उत्तर प्रदेश के सार्वजनिक वितरण तंत्र में बड़े सुधार की ओर एक साहसिक कदम है। यदि इसे योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो यह न केवल राज्य के करोड़ों गरीबों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा, बल्कि भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल प्रणाली बन सकता है। यह निर्णय यह दर्शाता है कि सरकार अब भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ रही है, जहां जनता को उसके अधिकार बिना किसी बिचौलिए के सीधे मिलेंगे।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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