Illegal mining mafia : उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में अवैध खनन माफिया के हौसले बुलंद, दिनदहाड़े चल रहा अवैध कारोबा

जिला अधिकारी अभिषेक पांडे जी एक नज़र इधर भी डालिए
हापुड़ (उत्तर प्रदेश)। जनपद हापुड़ में अवैध खनन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार जिले में अवैध खनन माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे खुलेआम, दिनदहाड़े खनन का अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कथित तौर पर इन खनन माफियाओं को न तो पुलिस का डर दिखाई देता है और न ही प्रशासन का। इससे आमजन में रोष और भय का माहौल बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हापुड़ देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत इंद्रगड़ी फाटक के पास लंबे समय से अवैध खनन का काम चल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां मिट्टी, बालू और अन्य खनिजों का अवैध रूप से खनन कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों के माध्यम से दिन-रात ढुलाई की जा रही है। इस गतिविधि से न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
दिनदहाड़े चल रहा कथित अवैध खनन
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन का यह कारोबार किसी छिपे हुए स्थान पर नहीं, बल्कि खुलेआम सड़कों के पास और आबादी के नजदीक चल रहा है। दिन के उजाले में भारी-भरकम वाहन मिट्टी और बालू से लदे हुए गुजरते हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे इस बारे में आवाज उठाते हैं, तो उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है या डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है। इससे लोग खुलकर शिकायत करने से भी डर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि रात के समय अवैध खनन और तेज हो जाता है, जिससे शोर, धूल और कंपन के कारण आसपास के घरों में रहना मुश्किल हो जाता है।
कथित खनन माफिया का नाम आया सामने
स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस अवैध खनन के पीछे आदिल नामक व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है, जो बताया जा रहा है कि पटना मुरादपुर का रहने वाला है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि आदिल और उससे जुड़े लोग लंबे समय से इस क्षेत्र में खनन का अवैध कारोबार कर रहे हैं और किसी न किसी तरह कार्रवाई से बच निकलते हैं।
लोगों में यह चर्चा आम है कि खनन माफिया इतने बेखौफ क्यों हैं? क्या उन्हें किसी का संरक्षण प्राप्त है या फिर प्रशासनिक निगरानी में कहीं न कहीं चूक हो रही है? ये सवाल अब आम जनता के बीच गूंजने लगे हैं।
पुलिस और प्रशासन पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध खनन की गतिविधियां इतनी स्पष्ट और खुलेआम चल रही हैं, तो संबंधित थाना पुलिस और प्रशासन की भूमिका क्या है? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को मौखिक रूप से जानकारी दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों का प्रशासन पर से भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।
अवैध खनन न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है। खेतों की उर्वरता घटती है, भू-जल स्तर नीचे चला जाता है और भविष्य में क्षेत्र को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद यदि खनन माफिया पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं

जिला अधिकारी से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने जिला अधिकारी अभिषेक पांडे से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जिला स्तर से यदि सख्त कार्रवाई की जाए और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं, तो अवैध खनन पर रोक लग सकती है। लोगों ने यह भी मांग की है कि इंद्रगड़ी फाटक के पास चल रहे कथित अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। सड़कें टूट जाएंगी, खेत बर्बाद हो जाएंगे और पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा।
पर्यावरण और जनजीवन पर असर
अवैध खनन का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पर्यावरण पर पड़ता है। मिट्टी और बालू के अत्यधिक दोहन से जमीन खोखली हो जाती है, जिससे बारिश के समय जलभराव और कटाव की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा भारी वाहनों की आवाजाही से धूल प्रदूषण बढ़ता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सांस संबंधी दिक्कतें होती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां खेत लहलहाते थे, वहां अब गड्ढे दिखाई देने लगे हैं। कई जगहों पर खेतों की मेड़ टूट गई है और किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्हें मुआवजा या राहत नहीं मिल पा रही है।
निष्कर्ष
हापुड़ जिले में कथित अवैध खनन का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। दिनदहाड़े चल रहे इस अवैध कारोबार ने प्रशासनिक व्यवस्था पर
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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