More devotees arrived: बाबा खेतानाथ जी महाराज का 35वां निर्वाण पर्व श्रद्धा से संपन्न, 30 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे

नीमराना। अलवर जिले के नीमराना क्षेत्र में माजरीकलां रोड स्थित जोशी होड़ा में बाबा मस्तनाथ आश्रम परिसर में ब्रह्मनिष्ठ अवधूत बाबा खेतानाथ जी महाराज का 35वां निर्वाण पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आस्था के वातावरण में मनाया गया। इस पावन अवसर पर संत समागम, श्रद्धांजलि सभा एवं विशाल मेले का आयोजन किया गया, जिसमें देश-प्रदेश से आए संत-महंतों, श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। अनुमान के अनुसार इस आयोजन में 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।
सुबह से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। दूर-दराज से आए भक्तों ने बाबा खेतानाथ जी महाराज की समाधि पर पहुंचकर दर्शन किए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। समाधि स्थल पर फूल, अगरबत्ती और दीप अर्पित कर श्रद्धालुओं ने बाबा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूरे परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।
निर्वाण पर्व के अवसर पर आयोजित संत समागम में अनेक संतों और महात्माओं ने अपने प्रवचनों के माध्यम से बाबा खेतानाथ जी महाराज के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। संतों ने कहा कि बाबा खेतानाथ जी एक ब्रह्मनिष्ठ अवधूत संत थे, जिन्होंने अपने जीवन को तप, त्याग और साधना में समर्पित कर दिया। उन्होंने मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा माना और समाज को प्रेम, करुणा तथा सद्भाव का मार्ग दिखाया। संतों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे बाबा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में सेवा एवं सद्भाव की भावना को मजबूत करें।
प्रवचनों के दौरान यह भी बताया गया कि बाबा खेतानाथ जी महाराज ने अपने जीवन में जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर मानवता की सेवा की। उन्होंने हमेशा जरूरतमंदों की सहायता की और समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। संतों ने कहा कि आज के समय में जब समाज में तनाव और विभाजन बढ़ रहा है, तब बाबा जैसे संतों के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। भंडारे में भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई थी और सेवाभाव से जुड़े स्वयंसेवक लगातार श्रद्धालुओं की सेवा में लगे रहे। श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन समिति की व्यवस्थाओं की सराहना की। भंडारे में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रखा गया, जो बाबा खेतानाथ जी के समानता और सेवा के संदेश को साकार करता नजर आया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा मस्तनाथ आश्रम के मठाधीश शंकर नाथ जी महाराज ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बाबा खेतानाथ जी महाराज का जीवन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा ने अपने तप और साधना से समाज को दिशा दी और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही सच्चे अर्थों में मानव जीवन सफल हो सकता है। शंकर नाथ जी महाराज ने आश्रम द्वारा किए जा रहे सामाजिक और धार्मिक कार्यों की जानकारी भी दी और कहा कि आश्रम भविष्य में भी सेवा, साधना और संस्कार के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा

निर्वाण पर्व के अवसर पर देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए अनेक संत-महंत, साधु-संत, धर्माचार्य और पीठाधीश्वर उपस्थित रहे। इसके साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने बाबा खेतानाथ जी महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके आदर्शों को समाज में फैलाने की बात कही।
आयोजन के दौरान विशाल मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार की दुकानें, धार्मिक सामग्री, प्रसाद, खिलौने और दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध थीं। बच्चों और परिवारों ने मेले का आनंद लिया। मेले में साफ-सफाई और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती की गई थी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी चिकित्सा शिविर लगाए गए थे, जहां प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध रही। प्रशासन और आयोजन समिति के आपसी समन्वय से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा खेतानाथ जी महाराज के निर्वाण पर्व में आकर उन्हें आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर वर्ष इस आयोजन में शामिल होते हैं और बाबा की कृपा से उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग किया और मेहमानों के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी।
कुल मिलाकर, नीमराना में आयोजित बाबा खेतानाथ जी महाराज का 35वां निर्वाण पर्व श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि समाज को जोड़ने और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने का माध्यम भी बना। बाबा खेतानाथ जी महाराज की शिक्षाएं और आदर्श आज भी लोगों के जीवन को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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