New taxes will be implemented : फरवरी 2026 से पान मसाला और तंबाकू उत्पाद महंगे, नए कर लागू होंगे

2026 की शुरुआत में सरकार ने स्वास्थ्य और राजस्व दोनों दृष्टिकोणों से तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर नई कर नीति लागू करने की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 1 फरवरी 2026 से सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पाद महंगे हो जाएंगे। यह कदम न केवल स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से उठाया गया है, बल्कि इससे सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावना है। नए कर और उपकर मौजूदा जीएसटी के अतिरिक्त लागू होंगे और यह हानिकारक उत्पादों पर लगाया जाने वाला क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेंगे।
सिगरेट, बीड़ी और पान मसाला जैसे उत्पादों पर अब स्वास्थ्य उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा। पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया जाएगा, जबकि तंबाकू उत्पादों जैसे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और चबाने वाले तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगा। गुटखा पर 91 प्रतिशत, चबाने वाले तंबाकू और जर्दा सुगंधित तंबाकू पर 82 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। बीड़ी पर 18 प्रतिशत और अन्य तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू किया जाएगा।
इस नए कर ढांचे का उद्देश्य दोहरी है। पहला, यह लोगों को हानिकारक उत्पादों के सेवन से रोकने के लिए वित्तीय रूप से प्रेरित करेगा। उच्च मूल्य के कारण उपभोक्ता इन उत्पादों से बच सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होंगे। दूसरा, यह सरकार के लिए राजस्व वृद्धि का स्रोत बनेगा। स्वास्थ्य उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क से होने वाला राजस्व देश के स्वास्थ्य क्षेत्र और सार्वजनिक योजनाओं में निवेश किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से तंबाकू और पान मसाला उद्योग में बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनियों को उत्पादन लागत और कीमतों के बीच संतुलन बनाना होगा। साथ ही, उत्पाद की बिक्री में कमी आने की संभावना है क्योंकि उपभोक्ता महंगे उत्पादों से बच सकते हैं। इसके अलावा, यह नीति छोटे विक्रेताओं और वितरकों के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि उन्हें नई दरों और पैकेटिंग के अनुसार अपने व्यवसाय को समायोजित करना होगा।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि चबाने वाले तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा के लिए पैकेट पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर जीएसटी निर्धारित किया जाएगा। इसका मतलब है कि प्रत्येक पैकेट की कीमत में कर और उपकर की नई दर सीधे लागू होगी, जिससे उपभोक्ता को तुरंत महंगा महसूस होगा।
पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू होने से इसका प्रभाव भी व्यापक होगा। उपकर का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को जागरूक करना और स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सजग करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में इससे तंबाकू और पान मसाला के सेवन में कमी आ सकती है। यह नीति विशेष रूप से युवाओं और छात्रों के बीच हानिकारक आदतों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
सिगरेट और बीड़ी जैसे तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से इन उत्पादों की कीमतें भी बढ़ेंगी। यह नीति पिछले वर्षों में स्वास्थ्य कर और हानिकारक उत्पादों पर लागू किए गए उपायों का विस्तार है। इससे पहले भी तंबाकू उत्पादों पर उपकर लगाए गए थे, लेकिन अब यह दरें अधिक सख्त और व्यापक हो गई हैं।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि नई दरें 1 फरवरी 2026 से लागू होंगी। इस तारीख के बाद बाजार में इन उत्पादों की कीमतें स्वतः बढ़ जाएंगी। विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे नए कर और उपकर के अनुसार बिक्री मूल्य निर्धारित करें। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी महंगे उत्पादों के लिए तैयार रहना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस नीति से स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। तंबाकू और पान मसाला के सेवन से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है, जैसे कि कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियां। उच्च कर और उपकर उपभोक्ताओं को चेतावनी और वित्तीय दबाव दोनों प्रदान करेंगे, जिससे लोग इन उत्पादों का सेवन कम करेंगे

सरकार की इस नई नीति से उद्योग जगत और उपभोक्ता दोनों प्रभावित होंगे। उद्योग को उत्पादन लागत और कीमतों के हिसाब से अपनी रणनीति बदलनी होगी। वहीं, उपभोक्ताओं के लिए यह एक संकेत है कि स्वास्थ्य और वित्तीय निर्णयों में सतर्कता आवश्यक है। नीति का उद्देश्य केवल महंगाई बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण और सामाजिक लाभ सुनिश्चित करना भी है।
नई कर नीति के तहत, गुटखा और चबाने वाले तंबाकू जैसे उत्पादों पर 80 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू किया गया है। यह दर उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार अब तक की सबसे ऊंची दरों में से एक है। इससे उपभोक्ता इन उत्पादों से बचने के लिए मजबूर होंगे, और लंबे समय में यह स्वास्थ्य सुधार के लिए सकारात्मक साबित होगा।
इसके अलावा, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नए कर और उपकर जीएसटी के अतिरिक्त होंगे। इसका मतलब है कि मौजूदा जीएसटी दरों के अलावा उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना होगा। इससे उपभोक्ताओं को सीधे महंगे उत्पादों का सामना करना पड़ेगा और स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता भी बढ़ेगी।
पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नई कर नीति से जुड़े कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू होगा।
- गुटखा पर 91 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगा।
- चबाने वाले तंबाकू और जर्दा सुगंधित तंबाकू पर 82 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा।
- बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होगी।
- नए कर 1 फरवरी 2026 से लागू होंगे और यह मौजूदा जीएसटी दरों के अतिरिक्त होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का सबसे बड़ा लाभ स्वास्थ्य क्षेत्र में मिलेगा। तंबाकू और पान मसाला के सेवन से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए यह एक प्रभावी उपाय है। साथ ही, इससे सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी, जिसे स्वास्थ्य और सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में लगाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, फरवरी 2026 से पान मसाला और तंबाकू उत्पाद महंगे हो जाएंगे। सरकार ने स्वास्थ्य और राजस्व दोनों दृष्टिकोणों से यह कदम उठाया है। नई दरों के लागू होने से उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को अपने निर्णय और रणनीति बदलनी होगी। यह नीति न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य सुधार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
इस नए कर ढांचे का उद्देश्य उपभोक्ताओं को हानिकारक उत्पादों से दूर करना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। लंबे समय में इससे तंबाकू और पान मसाला के सेवन में कमी आने की संभावना है। इसके साथ ही, सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिसे स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं में निवेश किया जा सकेगा।
फरवरी 2026 के बाद पान मसाला, सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पाद महंगे होंगे। यह कदम स्वास्थ्य सुधार, वित्तीय राजस्व वृद्धि और सामाजिक जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को नई कर नीति के अनुसार अपने निर्णय लेने होंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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