During the CBI investigation : डीआईजी भुल्लर केस में सुनवाई के दौरान सीबीआई और बचाव पक्ष में तीखी बहस, जमानत पर कोर्ट में दलीलें तेज

चंडीगढ़।
- डीआईजी भुल्लर केस की सुनवाई के दौरान अदालत में सीबीआई और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विशेष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान डीआईजी भुल्लर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसपीएस भुल्लर ने सीबीआई जांच पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। डीआईजी भुल्लर ने कथित रिश्वत मामले में नियमित जमानत की मांग की है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में न तो घटना की स्पष्ट तारीख, न समय और न ही स्थान का स्पष्ट उल्लेख है।
- इसके साथ ही कथित रिश्वत की राशि को लेकर भी विरोधाभास है। कहीं एक लाख तो कहीं चार लाख रुपये का उल्लेख किया गया है, जिससे केस की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एसपीएस भुल्लर ने यह भी कहा कि चार्जशीट में “सेवा पानी” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ जरूरी नहीं कि रिश्वत ही हो।
- उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सेक्टर-9 डी, चंडीगढ़ में बिचौलिए, शिकायतकर्ता आकाश और सीबीआई अधिकारी सचिन की लोकेशन जरूर दिखाई गई है, लेकिन केवल लोकेशन से अपराध सिद्ध नहीं होता। साथ ही आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी के समय पंजाब के किसी वरिष्ठ अधिकारी को सूचित नहीं किया गया, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
- वहीं सीबीआई की ओर से पेश अधिवक्ता नरेंद्र सिंह ने बचाव पक्ष की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि डीआईजी भुल्लर के खिलाफ दर्ज मामला नॉन-बेलेबल है और वे पुलिस विभाग के एक अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि कोई गवाह नहीं है।
- मामले में इंस्पेक्टर पवन लांबा पहले गवाह और इंस्पेक्टर आर.एम. शर्मा दूसरे गवाह हैं।
सीबीआई वकील ने आगे कहा कि भुल्लर जैसे वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ मामला होने के कारण जांच में पूरी सतर्कता बरती गई। सेक्टर-9 डी का उल्लेख केवल लोकेशन के संदर्भ में है, जहां किसी का भी आना-जाना सामान्य है। उन्होंने यह भी बताया कि डीआईजी भुल्लर द्वारा बिचौलिए को भेजे गए मैसेज से रिश्वत की मांग स्पष्ट होती है, जिसमें लिखा है—“जितने देता है, उतने ले लो और पूरे आठ लाख करने हैं।” - सीबीआई की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार डीएसपी स्तर के अधिकारी को गिरफ्तारी का अधिकार है और ऐसे मामलों में स्थान की कोई बाध्यता नहीं होती, विशेष रूप से जब मामला बड़े स्तर के भ्रष्टाचार और उच्च पदस्थ अधिकारी से जुड़ा हो।
- सीबीआई वकील ने यह भी कहा कि डीआईजी भुल्लर के पिता पंजाब के पूर्व डीजीपी रह चुके हैं, जिससे मामले की संवेदनशीलता और नेक्सस को देखते हुए एजेंसी ने पहले ही सभी साक्ष्य सुरक्षित कर लिए थे। इस कार्रवाई के बाद न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश में हलचल मच गई थी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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