The clutches of the law : शामली में हिस्ट्रीशीटर फिरोज खान की गिरफ्तारी, राजनीति, अपराध और कानून के शिकंजे की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद से एक बार फिर राजनीति और अपराध के गठजोड़ को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। झिंझाना थाना पुलिस ने कुख्यात हिस्ट्रीशीटर फिरोज खान को उसके घर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब महज दो हफ्ते पहले ही कोर्ट के आदेश पर शासन-प्रशासन ने उसकी करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। इस कार्रवाई के बाद से ही फिरोज खान लगातार सुर्खियों में बना हुआ था।
फिरोज खान शामली जनपद के झिंझाना थाना क्षेत्र के कस्बा झिंझाना का रहने वाला है। हाल के महीनों में उस पर दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या और गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किया था। हिस्ट्रीशीटर घोषित होने का मतलब है कि पुलिस की नजर में वह व्यक्ति कानून-व्यवस्था के लिए लगातार खतरा बना हुआ है और उसकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बनाने वाली बात यह है कि फिरोज खान राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का प्रदेश सचिव भी बताया जा रहा है। हालांकि, उसकी गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की के बाद अब तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का विषय बनी हुई है।
करीब दो सप्ताह पहले कोर्ट के आदेश पर की गई 30 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्की ने फिरोज खान को सीधे सुर्खियों के केंद्र में ला दिया था। प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध रूप से अर्जित संपत्ति पर शिकंजा कसने की बड़ी पहल के रूप में देखा गया। कुर्क की गई संपत्ति में जमीन, मकान और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं, जो कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई थीं।
संपत्ति कुर्क होने के बाद फिरोज खान ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बना लिया। वह लगातार वीडियो जारी कर रहा था, जिनमें वह पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाता नजर आया। इन वीडियो में उसने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि उसके खिलाफ साजिश रची जा रही है और उसे राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। उसने पुलिस कार्रवाई को गलत बताते हुए अपनी बात सीधे जनता तक पहुंचाने की कोशिश की।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और सभी कार्रवाई कोर्ट के आदेश और कानून के तहत की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फिरोज खान के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिसके आधार पर उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया और उसकी संपत्ति कुर्क की गई। सोशल मीडिया पर बयानबाजी से कानून का सच नहीं बदलता।
झिंझाना थाना पुलिस ने अब आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान किसी तरह का विरोध नहीं हुआ और उसे उसके घर से शांतिपूर्वक पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद उसे मेडिकल जांच के लिए भेजा गया और फिर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने शामली जिले में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि कैसे एक व्यक्ति, जिस पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, लंबे समय तक राजनीतिक पद पर बना रहा। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या राजनीतिक रसूख ने उसे कानून से बचाने में मदद की, या फिर अब कानून अपना रास्ता तय कर रहा है।
राष्ट्रीय लोकदल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया न आना भी चर्चा का विषय है। पार्टी से जुड़े लोग अनौपचारिक रूप से यह जरूर कह रहे हैं कि कानून अपना काम कर रहा है और पार्टी किसी भी आपराधिक गतिविधि का समर्थन नहीं करती। लेकिन औपचारिक बयान न आने से विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामलों से राजनीतिक दलों की छवि पर गहरा असर पड़ता है। यदि समय रहते स्पष्ट रुख नहीं अपनाया गया, तो इसका नुकसान चुनावी राजनीति में भी देखने को मिल सकता है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे किसी भी पार्टी से जुड़ा हो, कानून सबके लिए बराबर है।
फिरोज खान की गिरफ्तारी को प्रदेश सरकार की उस नीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिसमें संगठित अपराध और माफिया तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल के वर्षों में कई जिलों में बड़े अपराधियों की संपत्ति कुर्क की गई है और उन्हें जेल भेजा गया है। इस कार्रवाई को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल, फिरोज खान जेल में है और उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में अदालत में यह तय होगा कि उसके खिलाफ लगे आरोप कितने मजबूत हैं और कानून उसे क्या सजा देता है। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय लोकदल इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है।
कुल मिलाकर, शामली का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि राजनीति और अपराध के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो चुकी है। लेकिन यह भी साफ संकेत देता है कि यदि प्रशासन और पुलिस ठान लें, तो कानून का शिकंजा किसी पर भी कस सकता है, चाहे उसका रसूख कितना ही बड़ा क्यों न हो।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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