The unions protested : जीएमसीएच को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने के प्रस्ताव का सभी यूनियनों ने किया विरोध

कर्मचारियों और आम जनता के हितों के खिलाफ बताया प्रस्ताव, आंदोलन की चेतावनी चंडीगढ़।
- गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच), सेक्टर-32 को डीम्ड यूनिवर्सिटी में परिवर्तित करने के प्रस्ताव के खिलाफ जीएमसीएच की सभी यूनियनों ने एकजुट होकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसी क्रम में शुक्रवार को जीएमसीएच नर्सेज़ वेलफेयर एसोसिएशन, जीएमसीएच एनेस्थीसिया टेक्निकल स्टाफ यूनियन, मिनिस्टीरियल स्टाफ यूनियन सहित अन्य यूनियनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस प्रस्ताव के संभावित लाभ और नुकसान पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सभी यूनियनों ने सर्वसम्मति से निष्कर्ष निकाला कि जीएमसीएच को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव कर्मचारियों, मरीजों और आम जनता के हित में नहीं है। यूनियनों का आरोप है कि यह पहल केवल 5–6 वरिष्ठ अधिकारियों के निजी हितों को साधने के उद्देश्य से आगे बढ़ाई जा रही है।
- यूनियन प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2009 में तत्कालीन डायरेक्टर-प्रिंसिपल डॉ. राज बहादुर द्वारा भी इसी तरह का प्रस्ताव भेजा गया था। उस समय जीएमसीएच के कर्मचारियों ने इसका जोरदार विरोध किया था, जिसके चलते अंततः यह प्रस्ताव रद्द करना पड़ा था। वर्तमान में डॉ. राज बहादुर के प्रशासक के स्वास्थ्य सलाहकार होने के कारण यह मुद्दा एक बार फिर सामने लाया गया है, जिसे कर्मचारी गंभीर चिंता के रूप में देख रहे हैं।
- यूनियनों का कहना है कि वर्तमान में जीएमसीएच एक सरकारी संस्थान के रूप में आम जनता को सस्ता, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध करा रहा है। यदि इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाया गया, तो संस्थान का स्वरूप व्यावसायिक हो जाएगा, जिससे इलाज महंगा होगा और गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होगी।

बैठक में देश के अन्य डीम्ड विश्वविद्यालयों के अनुभवों का भी हवाला दिया गया।
- यूनियनों ने बताया कि वर्ष 2009 की टंडन कमेटी रिपोर्ट में कई डीम्ड विश्वविद्यालयों को खराब शैक्षणिक स्तर, कमजोर प्रशासन और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के कारण “अनफिट” घोषित किया गया था। बाद की समीक्षाओं में यह भी सामने आया कि कई संस्थान पारदर्शिता और जवाबदेही से दूर होकर “पारिवारिक जागीर” की तरह संचालित होने लगे, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा और जनसेवा प्रभावित हुई।
- इन सभी तथ्यों के आधार पर जीएमसीएच की यूनियनों ने स्पष्ट किया कि डीम्ड यूनिवर्सिटी का मौजूदा प्रयास भी उसी सोच का हिस्सा है, जो पहले विफल हो चुकी है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रस्ताव को शीघ्र वापस नहीं लिया गया, तो जीएमसीएच की अधिकांश यूनियनें आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगी। इसके साथ ही इस मुद्दे को लेकर चंडीगढ़ प्रशासक को ज्ञापन सौंपने का भी निर्णय लिया गया है।
- यूनियनों ने दो टूक कहा कि जीएमसीएच को सरकारी चिकित्सा संस्थान के रूप में ही बनाए रखना, कर्मचारियों और आम जनता—दोनों के हित में है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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