National call : 01 फरवरी को बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के स्वयंसेवक करेंगे राष्ट्रपति भवन की परिक्रमा प्रवीण पांडेय बुंदेलखंड राज्य गठन हेतु राष्ट्रीय आह्वान

फतेहपुर। बुंदेलखंड राज्य गठन की मांग एक बार फिर पूरे देश के सामने मजबूती से रखी जाने जा रही है। वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर 01 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक बड़ा और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के बैनर तले सैकड़ों स्वयंसेवक जंतर-मंतर से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे और वहां महामहिम राष्ट्रपति भवन की परिक्रमा कर अपनी मांग को प्रतीकात्मक और संवैधानिक तरीके से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाएंगे।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय करेंगे। समिति इसे “बुंदेलखंड राज्य निर्माण हेतु राष्ट्रीय आह्वान” के रूप में आयोजित कर रही है। आयोजकों के अनुसार यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की पीड़ा, उपेक्षा और पहचान के संघर्ष की आवाज़ है, जिसे अब और दबाया नहीं जा सकता।
खून से लिखी तख्तियों के साथ होगा विरोध
कार्यक्रम की सबसे विशेष और भावनात्मक बात यह है कि स्वयंसेवक खून से लिखी तख्तियां लेकर जंतर-मंतर पर एकत्र होंगे। ये तख्तियां बुंदेलखंड के लोगों के त्याग, संघर्ष और पीड़ा का प्रतीक होंगी। इसके बाद शांतिपूर्ण ढंग से जंतर-मंतर से राष्ट्रपति भवन की ओर कूच किया जाएगा।
समिति का कहना है कि यह प्रतीकात्मक विरोध उस दर्द को दर्शाता है, जिसे बुंदेलखंड दशकों से झेल रहा है—सूखा, बेरोजगारी, पलायन, पिछड़ापन और राजनीतिक उपेक्षा।
राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा ज्ञापन
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न पृथक राज्य आंदोलनों से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। नई दिल्ली प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अंतर्गत प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचकर माननीय राष्ट्रपति महोदय को बुंदेलखंड राज्य गठन का ज्ञापन सौंपेगा।
इस ज्ञापन में बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाए जाने के सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक तर्कों को विस्तार से रखा जाएगा।
“अब नहीं तो कब?”
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने इस आंदोलन को भावनात्मक शब्दों में परिभाषित करते हुए कहा—
“बुंदेलखंड की माटी पुकार रही है,
अस्मिता सवाल कर रही है,
और इतिहास हमसे पूछ रहा है—
अब नहीं तो कब?”
समिति का मानना है कि यह केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। यदि आज भी संगठित और निर्णायक संघर्ष नहीं हुआ, तो बुंदेलखंड हमेशा के लिए विकास की दौड़ में पीछे छूट सकता है।

दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील
इस आंदोलन की सबसे अहम विशेषता इसका गैर-दलगत स्वरूप है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह किसी एक पार्टी या विचारधारा का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे बुंदेलखंड का आंदोलन है।
समिति ने सभी बुंदेलखंडवासियों से अपील की है कि वे एक दिन के लिए सभी राजनीतिक पहचान छोड़कर केवल ‘बुंदेलखंडवादी’ बनें। चाहे कोई भाजपा से जुड़ा हो, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा या किसी अन्य दल से—इस दिन केवल बुंदेलखंड की अस्मिता और अधिकार की बात होनी चाहिए।
प्रवीण पांडेय का सख्त संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने इस मौके पर दो टूक शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब व्यक्तिगत स्वार्थ, दलगत मोह और आपसी मतभेदों को त्यागना होगा।
उन्होंने कहा—
“अगर अब भी हम बिखरे रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। बुंदेलखंड की दुर्दशा के लिए हम सब जिम्मेदार होंगे।”
उन्होंने आगे स्पष्ट किया—
“लक्ष्य एक ही हो—बुंदेलखंड राज्य गठन।
बाकी सब भूल जाइए।
अभी नहीं तो कभी नहीं।”
क्यों जरूरी है बुंदेलखंड राज्य?
बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से सूखा, कृषि संकट, पलायन, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बंटा होने के कारण यह क्षेत्र दोनों राज्यों की प्राथमिकताओं में हाशिए पर रहा है।
अलग राज्य बनने से प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा, योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचेगा और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार नीतियां बन सकेंगी—ऐसा आंदोलनकारियों का विश्वास है।
निर्णायक मोड़ पर आंदोलन
01 फरवरी का यह कार्यक्रम बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि यह केवल शुरुआत है और यदि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति भवन की परिक्रमा का यह कार्यक्रम बुंदेलखंड की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने का प्रयास है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह आह्वान सत्ता के गलियारों तक गूंज पाएगा और क्या बुंदेलखंड को उसका अलग राज्य का सपना साकार होता दिखाई देगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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