Work fast : भारत-पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के बाद मोदी सरकार का पाकिस्तान को बड़ा झटका, चिनाब नदी पर हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम तेज

नई दिल्ली, 9 फरवरी 2026:
सिंधु जल समझौते के बाद भारत ने पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका दिया है। यह कदम देश के पानी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ सीमापार पानी प्रबंधन के मुद्दों में भारत की मजबूती को दिखाता है। भारत सरकार ने चिनाब नदी पर एक महत्वाकांक्षी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
यह परियोजना न केवल देश में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी एक बार फिर संदेश है कि भारत अपने जल संसाधनों के उपयोग और विकास में पूर्ण स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ रहा है। सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है और अनुमानित लागत लगभग ₹5129 करोड़ आंकी गई है।
चिनाब नदी हाइड्रो प्रोजेक्ट का महत्व
चिनाब नदी पर यह हाइड्रो प्रोजेक्ट देश की ऊर्जा सुरक्षा और जल प्रबंधन रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने लंबे समय से जल-संरक्षण और जल-ऊर्जा उत्पादन को लेकर कई योजनाओं को प्राथमिकता दी है। इस परियोजना के अंतर्गत उच्च क्षमता वाली जलविद्युत इकाइयों का निर्माण किया जाएगा, जिससे हर साल बड़ी मात्रा में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन संभव होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। भारत न केवल अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि क्षेत्रीय जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में भी मजबूती हासिल करेगा। यह परियोजना देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों के विकास में भी योगदान देगी, क्योंकि चिनाब नदी पर आधारित इस परियोजना के साथ स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचे का भी विकास होगा।
भारत-पाकिस्तान पर प्रभाव
सिंधु जल समझौते के बाद यह भारत का दूसरा कदम है, जो पाकिस्तान के लिए अप्रत्याशित और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समझौते के तहत भारत को अपने हिस्से के जल संसाधनों पर नियंत्रण और उपयोग की स्वतंत्रता प्राप्त है, और इस हाइड्रो प्रोजेक्ट के तहत भारत अपनी जल नीति और ऊर्जा उत्पादन में और भी सशक्त स्थिति में आ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के लिए यह संकेत है कि भारत अपने जल संसाधनों का विकास और उनका संरक्षण पूरी तरह से अपने हित में करेगा। यह कदम दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन को लेकर तनाव और बातचीत के दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकता है।

टेंडर और लागत का विवरण
भारत सरकार ने चिनाब नदी हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस टेंडर के अंतर्गत परियोजना निर्माण, मशीनरी आपूर्ति, इंजीनियरिंग सेवाएं और अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं। कुल अनुमानित लागत लगभग ₹5129 करोड़ है। यह निवेश न केवल सरकारी संसाधनों का उपयोग करेगा बल्कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को परियोजना में भागीदारी का अवसर देगा।
सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार की जाएगी। परियोजना के लिए चुनी गई कंपनियों को उच्च गुणवत्ता मानकों और समयबद्ध कार्यान्वयन के तहत कार्य करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परियोजना निर्धारित समय पर पूरी हो और ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे सके।
ऊर्जा उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा में योगदान
यह हाइड्रो प्रोजेक्ट देश में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगा। सरकार की योजना है कि चिनाब नदी पर निर्मित परियोजना से प्रति वर्ष हजारों मेगावाट की ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल की जाएगी। इससे न केवल विद्युत उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि फॉसिल ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की जल-ऊर्जा परियोजनाएं देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम हैं। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा और उद्योगों को भी ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
स्थानीय विकास और रोजगार
चिनाब नदी पर इस हाइड्रो प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर भी विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। निर्माण कार्य में हजारों स्थानीय मजदूर और तकनीकी कर्मी लगे होंगे। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, सड़कों और परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि परियोजना के पूरा होने के बाद स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। यह कदम स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगा और ग्रामीण क्षेत्र के विकास में योगदान देगा।
भविष्य की योजनाएं और भारत की रणनीति
भारत सरकार ने जल संसाधनों के सतत विकास और ऊर्जा उत्पादन में निवेश को प्राथमिकता दी है। चिनाब नदी पर हाइड्रो प्रोजेक्ट इसके तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, सरकार देशभर में जल और ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से काम कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के बाद भारत अपनी जल नीति और ऊर्जा उत्पादन में और अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त होगा। यह कदम न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।
निष्कर्ष
सिंधु जल समझौते के बाद यह कदम भारत के लिए रणनीतिक महत्व का है। चिनाब नदी पर हाइड्रो प्रोजेक्ट से न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि यह पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी भारत की सशक्त स्थिति को दिखाता है। ₹5129 करोड़ की इस परियोजना से देश में स्वच्छ ऊर्जा, स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जल संसाधनों का विकास और संरक्षण पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार किया जाएगा। इस परियोजना से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जल प्रबंधन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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