Big fraud exposed : मुजफ्फरनगर: पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के बेटे अब्दुल आहद राणा की जमानत में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर  ?

Big fraud exposed : मुजफ्फरनगर: पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के बेटे अब्दुल आहद राणा की जमानत में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

Big fraud exposed : मुजफ्फरनगर: पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के बेटे अब्दुल आहद राणा की जमानत में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर 
Big fraud exposed : मुजफ्फरनगर: पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के बेटे अब्दुल आहद राणा की जमानत में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

मुजफ्फरनगर। जिले में एक नया विवाद उभरा है, जिसमें पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के बेटे अब्दुल आहद राणा की जमानत को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि जमानत के दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर और जाली मोहर लगाकर अब्दुल आहद राणा को रिहा कराया गया।

मामला और जांच का प्रारंभ

अब्दुल आहद राणा जेल में मोबाइल पहुंचाने के आरोप में बंद थे। उनका नाम राणा स्टील जीएसटी हमला कांड और जेल में मोबाइल पहुंचाने जैसी चर्चित घटनाओं से जुड़ा रहा है। इस पूरे मामले में यह खुलासा हुआ कि उनकी जमानत प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई।

एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति के निर्देशन में जांच के दौरान पाया गया कि खालापार कोतवाली प्रभारी और चौकी इंचार्ज के साइन फर्जी बताए गए। यानी, जमानत के दस्तावेजों में उनके वास्तविक हस्ताक्षर नहीं थे। इसके अलावा, दस्तावेजों में जाली मोहर का उपयोग किया गया था, जिससे अब्दुल आहद राणा को 12 नवंबर 2025 को जेल से रिहा कराया गया।

फर्जीवाड़े का तरीका

जमानत के सत्यापन दस्तावेज को भौतिक जांच के बिना पास किया गया। यानी, दस्तावेज़ को किसी प्रकार की वास्तविक पुष्टि के बिना ही मान्य कर लिया गया। इस प्रक्रिया में शामिल लोग न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और हस्ताक्षर लगाने में कोतवाली और चौकी के अधिकारी शामिल थे। हालांकि, इस फर्जीवाड़े में अज्ञात लोगों की भी संलिप्तता बताई जा रही है, जिनके खिलाफ सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

सीओ सिटी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अब जालसाजों की तलाश शुरू कर दी है। इसके तहत उन सभी लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं, जिन्होंने न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की।

एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति ने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। जमानत फर्जीवाड़े के मामले में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब्दुल आहद राणा का विवादित इतिहास

अब्दुल आहद राणा का नाम कई विवादों में आया है। राणा स्टील जीएसटी हमला कांड में उनकी संलिप्तता और जेल में मोबाइल पहुँचाने के आरोप ने पहले ही सुर्खियाँ बटोरी थीं। इन घटनाओं के कारण उनका और उनके परिवार का नाम चर्चा में रहा है।

अब यह नया फर्जीवाड़ा उनके परिवार के विवादित छवि को और बढ़ाता है। प्रशासन और पुलिस की नजरें अब इस पूरे मामले में गहन जांच पर हैं।

 

Big fraud exposed : मुजफ्फरनगर: पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के बेटे अब्दुल आहद राणा की जमानत में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर 
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कानूनी पहलू

जमानत दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर और मोहर लगाना न्यायालय को गुमराह करने के समान है। भारतीय दंड संहिता के तहत यह गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषियों को सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

पुलिस ने पहले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है और अब उनके पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, न्यायालय को गुमराह करने में शामिल अन्य व्यक्तियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।

प्रशासनिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन में हलचल मची हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जमानत प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सामाजिक दृष्टि से, यह मामला न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता को चुनौती देता है। यदि जमानत जैसे संवेदनशील मामले में फर्जीवाड़ा हो सकता है, तो यह सवाल उठता है कि अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब इस पूरे फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क उजागर करने पर काम कर रही है। इसमें दस्तावेज तैयार करने, हस्ताक्षर और मोहर लगाने और न्यायालय को गुमराह करने में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करना शामिल है।

अद्यतन जानकारी के अनुसार, कई अधिकारियों और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करने और न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरनगर में अब्दुल आहद राणा की जमानत में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा प्रशासनिक और कानूनी प्रणाली में गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला न केवल एक व्यक्तिविशेष के विवाद से जुड़ा है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि न्यायालय और पुलिस की प्रक्रियाओं में गड़बड़ी होने पर समाज में न्याय पर विश्वास को चोट पहुंच सकती है।

एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति और पुलिस प्रशासन की पहल यह संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति या अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। जांच और कार्रवाई के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

इस मामले ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका को गुमराह करने का प्रयास गंभीर अपराध है, और ऐसे प्रयासों के खिलाफ प्रशासन त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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