Companies Missing, Despite Everything : शामली में हर घर जल योजना अधूरी, करोड़ों खर्च के बावजूद कंपनियां लापता, जांच शुरू ?

Companies Missing, Despite Everything : शामली में हर घर जल योजना अधूरी, करोड़ों खर्च के बावजूद कंपनियां लापता, जांच शुरू

Companies Missing, Despite Everything : शामली में हर घर जल योजना अधूरी, करोड़ों खर्च के बावजूद कंपनियां लापता, जांच शुरू
Companies Missing, Despite Everything : शामली में हर घर जल योजना अधूरी, करोड़ों खर्च के बावजूद कंपनियां लापता, जांच शुरू

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर जल योजना” अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। इस योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिले के 230 गांवों में पानी की टंकियों के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद अधिकांश गांवों में कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। स्थिति यह है कि जिन कंपनियों को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था, वे अब लापता बताई जा रही हैं।

जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत वर्ष 2022 में शामली जिले के सभी 230 गांवों में पानी की टंकियों के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। इसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, जो इस योजना की गंभीरता और महत्व को दर्शाता है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दो कार्यदायी संस्थाओं—जेएमसी लक्ष्मी और गायत्री—को सौंपी गई थी। इन दोनों कंपनियों को अब तक कुल 254 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।

इसके बावजूद, चार वर्षों के लंबे समय के बाद भी केवल 56 गांवों में ही निर्माण कार्य पूरा हो पाया है। शेष 174 गांवों में काम अधूरा पड़ा हुआ है। कई स्थानों पर तो पिछले डेढ़ साल से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। वहां न तो कोई मजदूर दिखाई देता है और न ही ठेकेदारों की कोई गतिविधि नजर आती है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है, क्योंकि उन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहां-जहां आंशिक निर्माण कार्य हुआ भी है, वहां की स्थिति भी धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। अधूरी बनी टंकियां जर्जर होने लगी हैं और समय के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि जल्द ही इन कार्यों को पूरा नहीं कराया गया, तो अब तक हुआ निर्माण भी बेकार हो सकता है, जिससे सरकारी धन की भारी बर्बादी होगी।

इस पूरे मामले ने प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने संबंधित विभागों से पूरे प्रकरण का विस्तृत ब्योरा तलब किया है और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद कार्य अधूरा क्यों है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि जब कुल बजट का आधे से अधिक हिस्सा, यानी 254 करोड़ रुपये, पहले ही जारी किया जा चुका है, तो निर्माण कार्य अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ।

Companies Missing, Despite Everything : शामली में हर घर जल योजना अधूरी, करोड़ों खर्च के बावजूद कंपनियां लापता, जांच शुरू
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इस मामले में दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि क्या इन कंपनियों ने जानबूझकर कार्य में लापरवाही बरती है या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जल निगम के एक्सईएन फूल कुमार ने बताया कि कार्यदायी संस्थाओं—जेएमसी लक्ष्मी और गायत्री—को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही हैं।

इस पूरे मामले ने “हर घर जल योजना” की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि इस प्रकार की लापरवाही और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो इससे न केवल योजना की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से इस योजना का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि इस योजना के तहत उन्हें स्वच्छ और नियमित जल आपूर्ति मिलेगी, लेकिन अब तक उनकी उम्मीदें अधूरी ही रह गई हैं। कई गांवों में आज भी लोग पुराने स्रोतों पर निर्भर हैं, जो न तो सुरक्षित हैं और न ही पर्याप्त।

इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल अधूरे कार्यों को पूरा कराए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हों। इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था और समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है।

अंततः, यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इस प्रकार की योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और प्रभावशीलता से कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में ग्रामीणों को उनके अधिकार के अनुसार पानी उपलब्ध हो पाता है या नहीं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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