Social Worker Pankaj Jain : “जीओ और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” ही मानवता के भविष्य का सशक्त आधार: समाजसेवी पंकज जैन ?

Social Worker Pankaj Jain : “जीओ और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” ही मानवता के भविष्य का सशक्त आधार: समाजसेवी पंकज जैन

Social Worker Pankaj Jain : “जीओ और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” ही मानवता के भविष्य का सशक्त आधार: समाजसेवी पंकज जैन ?
Social Worker Pankaj Jain : “जीओ और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” ही मानवता के भविष्य का सशक्त आधार: समाजसेवी पंकज जैन ?

अहिंसा, सत्य, संयम और तप ही न्याय के वास्तविक लक्षण हैं,

  • जबकि क्रोध, मान, माया और लोभ मनुष्य के गुणों का नाश कर देते हैं। अब यह मानवता पर निर्भर है कि वह ताकत के टकराव का रास्ता चुने या न्याय, संतुलन, शांति और सहअस्तित्व की दिशा में आगे बढ़े : समाजसेवी पंकज जैन

आगरा, संजय साग़र सिंह।

  • भगवान महावीर स्वामी जी के 2625वें जन्म कल्याणक के अवसर पर समाजसेवी पंकज जैन ने भगवान महावीर स्वामी के जीवन, दर्शन और उनके सार्वकालिक सिद्धांतों को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी जी की सत्य, अहिंसा, त्याग और करुणा की शिक्षाएं पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायी हैं और मानव कल्याण का मार्ग दिखाती हैं। उनका त्याग, संयम और आत्मज्ञान का संदेश, हमें सदैव न्याय के मार्ग पर चलते हुए समरस समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। उनकी महत्वपूर्ण शिक्षाएं न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि मानवता के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार भी हैं। भगवान महावीर स्वामी जी के विचार हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
  • उन्होंने बताया कि महावीर स्वामी ने कर्म के सिद्धांत को अत्यंत स्पष्ट रूप से परिभाषित किया कि मनुष्य स्वयं अपने कर्मों के लिए जिम्मेदार है और वही उसके भविष्य का निर्धारण करते हैं। कोई भी व्यक्ति अपने कर्मों से बच नहीं सकता। जो जैसा करता है, वैसा ही फल प्राप्त करता है। यह सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मनुष्य को उत्तरदायित्व और सजगता का बोध कराता है।और वही उसके भविष्य का निर्धारण करते हैं। “जैसा कर्म, वैसा फल” का यह सिद्धांत व्यक्ति को सजग, जिम्मेदार और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि “जीओ और जीने दो” केवल एक उपदेश नहीं,

  • बल्कि संपूर्ण जीवन दर्शन है, जो हर जीव के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का भाव सिखाता है। महावीर स्वामी ने स्पष्ट किया कि धर्म बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्रता में निहित है। अहिंसा, सत्य, संयम और तप ही न्याय के वास्तविक लक्षण हैं, जबकि क्रोध, मान, माया और लोभ मनुष्य के गुणों का नाश कर देते हैं। इसलिए जो व्यक्ति अपने जीवन में शांति और संतुलन चाहता है, उसे इन विकारों का त्याग करना चाहिए। उनका यह महत्वपूर्ण संदेश आज के तनावपूर्ण जीवन में अत्यंत उपयोगी है, जहां मानसिक अशांति और असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है।
  • समानता और मानवता के विषय में महावीर स्वामी के विचारों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी जी ने समानता और मानवता का भी अद्वितीय संदेश दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जन्म से नहीं बल्कि कर्म से व्यक्ति महान बनता है। यदि कोई उच्च कुल में जन्म लेकर भी बुरे कर्म करता है तो वह श्रेष्ठ नहीं हो सकता, जबकि निम्न कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति यदि सदाचार और सद्विचार अपनाता है तो वह उच्च कुल से भी ज्यादा सम्मान का अधिकारी है। उनका यह महत्वपूर्ण विचार सामाजिक समरसता और समानता की नींव को मजबूत करता है।
  • उन्होंने सेवा को सर्वोच्च धर्म बताया उनकी दृष्टि में सेवा भी सर्वोच्च धर्म है। ग़रीबों, जरूरतमंदों और रोगियों की सेवा को उन्होंने ईश्वर की सेवा से भी बढ़कर बताया। साथ ही उन्होंने स्त्री-पुरुष समानता का समर्थन करते हुए समाज को समरसता का संदेश दिया और यह भी कहा कि स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से मुक्ति के अधिकारी हैं, जो उनके प्रगतिशील और समतामूलक विचारों को दशार्ता है।
Social Worker Pankaj Jain : “जीओ और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” ही मानवता के भविष्य का सशक्त आधार: समाजसेवी पंकज जैन ?
Social Worker Pankaj Jain : “जीओ और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” ही मानवता के भविष्य का सशक्त आधार: समाजसेवी पंकज जैन ?

उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में जब लोग हिंसा,

  • असहिष्णुता और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे है, तब महावीर स्वामी की अमृतवाणी आत्मशुद्धि, सहअस्तित्व और शांति का मार्ग दिखाती है। यदि इन सिद्धांतों को जीवन में अपनाया जाए, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन में संतुलन स्थापित हो सकता है, बल्कि समाज में करुणा, सद्भाव और अहिंसा की स्थापना भी संभव है। जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करती रहेगी।
  • पंकज जैन ने कहा कि आधुनिक युग में अंधाधुंध प्रगति की दौड़ ने कुछ लोगों को नैतिक मूल्यों से दूर कर दिया है। स्वार्थ, लोभ और प्रतिस्पर्धा ने उन्हें इस हद तक प्रभावित किया है कि वह हिंसा और अनैतिकता को भी उचित ठहराने लगा है। अहिंसा परमो धर्म का अमर संदेश देने वाले भगवान महावीर जी के विचार आज के अशांत, तनावग्रस्त और संघर्षपूर्ण समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो उठते है। ऐसे समय में उनका अहिंसा, संयम और करुणा पर आधारित दर्शन मानवता को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर चिंता व्यक्त करते हुए पंकज जैन ने कहा कि

  • आज दुनिया शक्ति और अहंकार के टकराव के दौर से गुजर रही है। युद्ध और संघर्ष की स्थितियां मानवता को गहरे संकट में डाल रही हैं।आज कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष के हालात बने हुए हैं, जिससे मानवता पीड़ित हो रही है। ऐसे कठिन समय में शांति, संयम और आपसी समझ की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
  • उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां शक्ति, राजनीति, अर्थव्यवस्था और नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। आज यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि दुनिया ताकत से चल रही है या ताकत का अहंकार उस पर हावी हो चुका है। ऐसे समय में संतुलन, संयम और मानवीय मूल्यों को अपनाना ही स्थायी शांति का मार्ग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल ताकत या धन से शांति स्थापित नहीं की जा सकती, बल्कि शक्ति और संतुलन का समन्वय ही विश्व को स्थिरता प्रदान कर सकता है।

पंकज जैन ने चेताया कि

  • ‘मैं’ ‘मैं’ और अहंकार की नीति ने वैश्विक स्तर पर आक्रामकता और अस्थिरता को जन्म दिया है, जिससे युद्ध और संघर्ष की स्थितियां पैदा हो रही हैं। इसका खामियाजा लाखों आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जहां हजारों परिवार तबाही के कगार पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल ताकत या केवल धन से शांति स्थापित नहीं हो सकती। शक्ति और संतुलन का समन्वय ही स्थायी शांति का मार्ग है।उन्होंने जोर देकर कहा यदि शक्ति का अहंकार बढ़ता है, तो संघर्ष और अस्थिरता बढ़ेगी। वहीं, यदि संतुलन, संयम और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जाए, तो सहयोग, विकास और शांति संभव है।
  • आखिर में पंकज जैन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भगवान महावीर स्वामी जी के विचार और शिक्षाएं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और नफरत व हिंसा के विरुद्ध मजबूत आधार तैयार करती हैं। उनका संदेश केवल अहिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीव के प्रति करुणा, दया और सम्मान का भाव रखने की प्रेरणा भी देता है। उनकी शिक्षाएं हमें आत्म-निर्माण के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का मार्ग दिखाती हैं। उनका त्याग, संयम और आत्मज्ञान का संदेश हमें सदैव न्याय, शांति और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। अब यह मानवता पर निर्भर है कि वह ताकत के टकराव का रास्ता चुने या न्याय, संतुलन, शांति और सहअस्तित्व की दिशा में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी जी का जीवन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सहिष्णुता और करुणा का संदेश भी देता है। उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारें, तो एक शांतिपूर्ण और समरस समाज का निर्माण संभव है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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