Advocate : आज़ तक अम्बेडकर जी को जितना सम्मान मिला है, वे उससे कहीं अधिक के हक़दार हैं : समाजसेवी अरविन्द पुष्कर एडवोकेट

डॉ. अम्बेडकर जी का योगदान अमूल्य है,
और वे जितने सम्मान के अधिकारी हैं, दुनिया अभी भी उससे कम दे पा रही है : समाजसेवी अरविन्द पुष्कर एडवोकेट उत्तरप्रदेश,संजय सागर सिंह। भारतीय संविधान के शिल्पी, समाज परिवर्तन के अद्वितीय पुरोधा, महान समाज सुधारक और सामाजिक न्याय के प्रणेता विश्व ज्ञान रत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी की 135वीं जयंती को ज्ञान दिवस के रूप में मनाने की अपील की गई है।
विश्व ज्ञान रत्न डॉ बाबा साहेब की 135वी जन्म जयंती के पावन अवसर पर समाजसेवी अरविन्द पुष्कर एडवोकेट ने सभी को शुभकामनायें व्यक्त करते हुए कहा कि आज तक बाबा साहेब को जितना सम्मान मिला है, वे उससे कहीं अधिक के अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि आज बाबासाहेब की जयंती केवल भारत में ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क, टोरंटो, लंदन, टोक्यो, हंगरी और दुबई सहित विश्व के अनेक शहरों में मनायीं जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा उनके जन्मदिन 14 अप्रैल को ‘विश्व ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय उनके बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रतीक है। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें “द ग्रेटेस्ट स्कॉलर ऑफ द वर्ल्ड” बताया, वहीं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने “दी यूनिवर्स मेकर” कहकर सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि विश्वप्रसिद्ध लेखक जॉन गुंथर ने अपनी पुस्तक इनसाइड एशिया में लिखा डॉ. अम्बेडकर जी के विचारों से राष्ट्रवाद और देशभक्ति छलकती है।अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें “ज्ञान का प्रतीक” कहते हुए कहा था कि “यदि अम्बेडकर हमारे देश में जन्म लेते तो हम उन्हें सूर्य कहते। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भी अम्बेडकर जी को अपना गुरु मानते हुए कहा था कि उनके योगदान का सम्मान अभी भी अधूरा है। प्रसिद्ध नेता मदनमोहन मालवीय ने 1935 में कहा था डॉ. अम्बेडकर जी के राष्ट्रवादी पांडित्य का मुकाबला संपूर्ण भारत के बुद्धिजीवी मिलकर भी नहीं कर सकते।

उन्होंने बताया कि अम्बेडकर जी ज्ञान,
संघर्ष और असाधारण विद्वता का अनुपम संगम हैं। बाबासाहेब दुनिया के सबसे अधिक शिक्षित महान व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे अक्सर मजाक में कहते थे कि “मेरे पास डिग्रियों के ट्रंक भरे पड़े हैं, यदि उनसे कुछ हासिल कर सकते हो तो कर लो। उनकी ज्ञान-पिपासा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में 1000 दिनों में 16,000 पुस्तकें पढ़ीं। 8 वर्षों की पढ़ाई सिर्फ 2 वर्ष 3 महीने में पूर्ण कर दी। वे 14 भाषाओं के ज्ञाता थे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 2000 पुस्तकें खरीदीं। गोलमेज सम्मेलन के समय खरीदी गई पुस्तकें 32 संदूकों में भारत पहुंचीं। मुंबई स्थित उनके निवास ‘राजगृह’ का पुस्तकालय दुनिया के सबसे बड़े निजी पुस्तकालयों में गिना जाता है, जहां लाखों दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह था।
उन्होंने यह भी बताया कि विश्व ज्ञान रत्न वैश्विक मान्यताओं से प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं। 1953 में उस्मानिया विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. और 1952 में कोलंबिया विश्वविद्यालय ने मानद एलएल.डी. की उपाधि दी। प्रशस्ति में लिखा गया यह सम्मान भारतीय संविधान निर्माण में उनकी अद्वितीय भूमिका के लिए है। वे महान समाज सुधारक और मानवाधिकारों के रक्षक हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनके स्कूल प्रवेश दिवस 7 नवंबर को ‘विद्यार्थी दिवस’ घोषित करना भी उनकी शिक्षा-प्रेरणा का सम्मान है।
आखिर में समाजसेवी अरविन्द पुष्कर एडवोकेट ने कहा कि आज़ तक डॉ. अम्बेडकर जी को जितना सम्मान मिला है, वे उससे कहीं अधिक के हक़दार हैं। उनका योगदान अमूल्य है, और वे जितने सम्मान के अधिकारी हैं, दुनिया अभी भी उससे कम दे पा रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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