TB-free : हापुड़ में आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन जारी: X-रे, ब्लड प्रेशर और शुगर जांच के साथ टीबी मुक्त भारत की दिशा में कदम

हापुड़। जनपद हापुड़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन लगातार जारी है। यह अभियान भारत सरकार की स्वास्थ्य दृष्टि और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में चलाए जा रहे टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का हिस्सा है। इस अभियान का शुभारंभ 24 मार्च 2026 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था, और तब से जनपद में विशेष रूप से चिन्हित गाँवों में सौ दिवसीय स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वेद प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि इन शिविरों का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में टीबी (तपेदिक) रोग के छुपे हुए मामलों का पता लगाना है। शिविरों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के सहयोग से गाँव-गाँव जाकर screening करती हैं। इस दौरान प्रत्येक शिविर में हैंड-हेल्ड X-रे मशीन के माध्यम से फेफड़ों का परीक्षण किया जाता है, साथ ही ब्लड प्रेशर और शुगर जांच भी की जाती है। यह एक समग्र स्वास्थ्य जांच प्रक्रिया है, जिससे टीबी के साथ-साथ अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की भी पहचान हो सके।
डॉ. राजेश सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी, ने बताया कि इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य ऐसे टीबी रोगियों की पहचान करना है जो अभी तक छुपे हुए हैं या जिनमें भविष्य में टीबी विकसित होने की संभावना है। इसका लक्ष्य केवल रोगियों का इलाज नहीं बल्कि पूरे जनपद को टीबी मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का उद्देश्य 2030 तक टीबी मुक्त भारत सुनिश्चित करना है, और यह अभियान उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है।
शिविरों के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिक जाँच के बाद आवश्यकतानुसार आगे की जांच और परामर्श भी प्रदान किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत जिला क्षय रोग केंद्र या नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में परीक्षण और उपचार के लिए भेजा जाता है। इसके साथ ही रोगियों को उपचार की पूरी जानकारी, दवाइयों की आपूर्ति और आवश्यक निर्देश भी दिए जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों का कहना है कि सामुदायिक स्तर पर शिविर आयोजित करने से लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर टीबी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे रोग समय पर निदान नहीं हो पाता और बीमारी फैलती रहती है। आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से यह समस्या काफी हद तक कम हो रही है।

डॉ. वेद प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि शिविरों में ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से भी सुरक्षित रहें। अक्सर उच्च ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियाँ टीबी के उपचार को प्रभावित करती हैं। इसलिए यह समग्र स्वास्थ्य जाँच शिविर का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह भी बताया कि शिविरों में विशेष ध्यान महिलाओं और बच्चों पर दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य जांच में अक्सर कमी रह जाती है। इस अभियान के तहत उन्हें प्राथमिक चिकित्सा और टीबी स्क्रीनिंग के साथ-साथ आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श भी दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे शिविरों में भाग लें और अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कराएं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि पूरे समुदाय को टीबी मुक्त बनाने में भी मदद मिलेगी।
इसके अलावा, शिविरों में टीबी की रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को टीबी के लक्षणों, उपचार और सावधानियों के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह कदम रोग के शुरुआती निदान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि यदि इस अभियान के तहत सभी ग्रामीणों और शहरी क्षेत्रों में नियमित स्क्रीनिंग की जाती है, तो भविष्य में टीबी के मामलों में भारी कमी लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर रोग है, लेकिन समय पर निदान और उपचार के माध्यम से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. वेद प्रकाश अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि शिविरों में सभी प्रक्रियाएं मुफ्त हैं और सभी रोगियों को कोई आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। सरकार की यह पहल खासतौर पर गरीब और वंचित वर्ग के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अक्सर महंगे इलाज के कारण टीबी का समय पर उपचार नहीं करवा पाते।
इस अभियान के तहत कुल सौ दिवसीय स्क्रीनिंग शिविर पूरे जनपद में अलग-अलग गाँवों और सामुदायिक केंद्रों में आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक शिविर में चिकित्सा टीम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी ग्रामीण व्यक्ति या समुदाय का सदस्य बिना जाँच के न रह जाए।
जिला प्रशासन ने बताया कि इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य टीबी से पीड़ित रोगियों को उनकी पहचान, उपचार और नियमित निगरानी के माध्यम से पूर्ण स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करना है। इस प्रकार, न केवल वर्तमान में टीबी रोगियों का इलाज होगा, बल्कि भविष्य में टीबी के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलेगी।
अंततः, हापुड़ जिले में आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर केवल टीबी मुक्त भारत अभियान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक स्वास्थ्य पहल है जो सभी नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा, जागरूकता और समय पर निदान सुनिश्चित करती है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस तरह के शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए ताकि हर नागरिक को गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो सके।
इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रामीण और शहरी समुदाय, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन मिलकर सक्रिय भागीदारी निभाएं और सभी लोगों तक टीबी स्क्रीनिंग और समग्र स्वास्थ्य जांच पहुंचाने में योगदान दें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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