Deepening Resentment : गाजियाबाद गृहकर वृद्धि पर जनप्रतिनिधियों से जवाब की मांग, जनता में गहराता आक्रोश

गाजियाबाद शहर में गृहकर (हाउस टैक्स) की बढ़ी हुई दरों को लेकर इन दिनों व्यापक असंतोष और आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा है। आम जनता से लेकर व्यापारी वर्ग तक इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहा है। इसी संदर्भ में व्यापार मंडल अध्यक्ष अवधेश शर्मा ने जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली और उनके बयानों पर गंभीर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की है।
अवधेश शर्मा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शहर की जनता के साथ जो वादे किए गए थे, वे अब धरातल पर टूटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे लोगों का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह अपने अधिकारों के प्रति सजग है, इसलिए किसी भी प्रकार की अनदेखी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने विशेष रूप से 30 जून 2025 को नगर निगम में आयोजित बोर्ड मीटिंग का जिक्र करते हुए कहा कि उस बैठक में गृहकर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, लेकिन आज तक उस बैठक के वास्तविक मिनट्स सार्वजनिक नहीं किए गए। यह पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है और इससे संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने मांग की कि उस बैठक के सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए ताकि जनता सच्चाई से अवगत हो सके।
अवधेश शर्मा ने आगे कहा कि हाल ही में मेयर, सांसद, विधायक और मंत्रियों द्वारा विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह बयान दिया गया था कि गृहकर पुरानी दरों पर ही लागू रहेगा और जनता को किसी प्रकार की अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। नगर निगम की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्वीकार किया गया कि गृहकर में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।
उन्होंने इसे जनता के साथ सीधा छलावा करार देते हुए कहा कि एक ओर जनप्रतिनिधि राहत देने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई दरों को लागू करने की तैयारी की जा रही है। यह दोहरा रवैया जनता के विश्वास को तोड़ने वाला है और इससे जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

व्यापार मंडल अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, तो जनता इसे विश्वासघात मानेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गृहकर की बढ़ी हुई दरों को वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी वर्ग और आम नागरिक एकजुट होकर जन-आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में लोग बढ़ी हुई दरों पर गृहकर जमा करने से भी इंकार कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान समय में पहले से ही महंगाई और आर्थिक दबाव के चलते आम आदमी परेशान है। ऐसे में गृहकर में वृद्धि करना जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे जनता की समस्याओं को समझें और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लें।
अवधेश शर्मा ने अंत में जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने वादों का सम्मान करें और गृहकर को पुरानी दरों पर ही लागू रखें। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा संभव नहीं है, तो जनप्रतिनिधियों को खुलकर जनता के बीच आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि किन कारणों से यह निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे जनता के हितों की रक्षा करें। यदि जनता का विश्वास ही डगमगा जाएगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव कमजोर हो जाएगी।
गाजियाबाद में गृहकर को लेकर उठ रहा यह विवाद अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभावनाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस पर क्या रुख अपनाते हैं और जनता के विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
स्पष्ट है कि यदि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो यह एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिसका प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। इसलिए आवश्यक है कि सभी संबंधित पक्ष आपसी संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से इस समस्या का समाधान निकालें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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