Hundreds of Lives : जनपद में अवैध क्लीनिक-नर्सिंग होम का मकड़जाल, हर दिन दांव पर लग रही सैकड़ों जिंदगियां

फतेहपुर जनपद स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मौत बांटने का अड्डा बनता जा रहा है। शहर की गलियों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम का मकड़जाल फैल चुका है। बिना डिग्री, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना मानक के चल रहे ये अस्पताल गरीब-भोले लोगों की जिंदगी से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं।
जमीनी पड़ताल: कैसे चलता है गोरखधंधा
1. फर्जी डिग्री, फर्जी बोर्ड: 10वीं-12वीं पास युवक 2-3 महीने कंपाउंडर का काम सीखकर खुद का बोर्ड लगा लेते हैं। बोर्ड पर लिखा होता है- “डॉ. फलाना, MBBS, MD, हृदय-शुगर-बुखार विशेषज्ञ”। मरीज को पता ही नहीं चलता कि इलाज करने वाला डॉक्टर है भी या नहीं।
2. 2 कमरे का ‘हॉस्पिटल’: 10×12 के कमरे में 4 बेड डालकर ‘न्यू लाइफ नर्सिंग होम’ का बोर्ड टांग दिया जाता है। न ICU, न ऑक्सीजन, न ब्लड बैंक, न ट्रेंड नर्स। फिर भी नॉर्मल डिलीवरी से लेकर एबॉर्शन और पथरी के ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं। बिगड़ने पर मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
3. कमीशन का पूरा सिस्टम: झोलाछाप डॉक्टर मरीज को पहले डरा देते हैं। फिर अपने कमीशन वाले पैथोलॉजी लैब में 10 तरह के टेस्ट, अल्ट्रासाउंड के लिए भेजते हैं। 500 रुपये के टेस्ट का 200 रुपये कमीशन डॉक्टर को मिलता है। मेडिकल स्टोर से भी 30-40% तक का कमीशन सेट है।
4. एक्सपायरी दवाओं का खेल: सस्ते में एक्सपायरी इंजेक्शन, ग्लूकोज की बोतलें खरीदकर मरीजों को चढ़ा दी जाती हैं। ग्रामीण इलाकों में तो स्टेरॉयड इंजेक्शन को ‘तुरंत आराम की दवा’ बताकर धड़ल्ले से लगाया जा रहा है, जिससे किडनी-लीवर खराब हो रहे हैं।
हॉटस्पॉट इलाके: कहां सबसे ज्यादा अवैध अड्डे
1. फतेहपुर शहर: नऊवाबाग, बस अड्डा, जीटी रोड, हरिहरगंज, चौक, पीरनपुर, आबूनगर में हर 200 मीटर पर एक क्लीनिक।
2. बिंदकी तहसील: कस्बे और कोराई, जाफरगंज, जहानाबाद रोड पर 50 से ज्यादा अवैध क्लीनिक।
3. खागा तहसील: खागा कस्बा, ऐरायां, विजयीपुर, किशुनपुर , नरैनी, मनावा थुरयानी चौराहा धाता रोड पर फर्जी हॉस्पिटलों की लाइन।
4. ग्रामीण क्षेत्र: मलवां, हथगाम, हुसैनगंज, असोथर, सरकंडी,तेलियानी ब्लॉक के गांवों में हालात सबसे बदतर। वहां RMP डिग्री दिखाकर प्रैक्टिस हो रही है, जो अब मान्य नहीं है।
आंकड़े जो डराते हैं
स्वास्थ्य विभाग के पास जिले में कुल 112 प्राइवेट हॉस्पिटल/क्लीनिक रजिस्टर्ड हैं। जबकि जमीनी हकीकत में 600 से ज्यादा क्लीनिक-नर्सिंग होम चल रहे हैं। यानी 480 से ज्यादा पूरी तरह अवैध हैं। बीते 1 साल में गलत इलाज से 12 से ज्यादा मौतें हो चुकीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 7 जगह नोटिस और 2 सीलिंग हुई।
पिछले 6 महीने की बड़ी घटनाएं
1. फरवरी 2026, बिंदकी: बुखार में गलत इंजेक्शन लगने से 8 साल के बच्चे की मौत। क्लीनिक 20 दिन बाद फिर खुल गया।
2. मार्च 2026, खागा: नर्सिंग होम में डिलीवरी के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग से महिला की मौत। केस रफा-दफा कर दिया गया।
3. जनवरी 2026, शहर: पथरी के ऑपरेशन के नाम पर युवक का गलत ऑपरेशन, किडनी डैमेज। पीड़ित आज भी जिला अस्पताल के चक्कर काट रहा है।

नियम क्या कहते हैं: क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010
1. हर क्लीनिक का सीएमओ ऑफिस में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
2. डॉक्टर के पास MBBS/BAMS/BHMS की मान्य डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर होना चाहिए।
3. क्लीनिक के बाहर डॉक्टर का नाम, डिग्री, रजिस्ट्रेशन नंबर, समय और फीस का बोर्ड लगाना जरूरी।
4. नर्सिंग होम के लिए मिनिमम स्पेस, फायर NOC, बायो-वेस्ट निस्तारण, ट्रेंड स्टाफ अनिवार्य।
5. उल्लंघन पर 10 हजार से 5 लाख तक जुर्माना और जेल का प्रावधान।
विभाग की चुप्पी पर उठते सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर महीने ‘मंथली’ सेटिंग के चलते कार्रवाई नहीं होती। छापेमारी की सूचना पहले ही लीक हो जाती है। सीएमओ ऑफिस में स्टाफ की कमी का हवाला देकर फाइलें दबा दी जाती हैं। पिछले 2 साल से जिले में एक भी बड़े झोलाछाप डॉक्टर पर FIR दर्ज नहीं हुई।
प्रशासन का पक्ष
इस संबंध में सीएमओ डॉ. सुनील शर्मा ने बताया, “हमारे पास शिकायतें आ रही हैं। 3 टीमें गठित कर दी गई हैं। 1 सप्ताह के अंदर पूरे जिले में मैराथन अभियान चलाकर अवैध क्लीनिक चिन्हित किए जाएंगे। बिना रजिस्ट्रेशन वाले सभी संस्थानों को तुरंत सील कर एपिडेमिक एक्ट और क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में FIR दर्ज कराई जाएगी।”
क्या करें आम आदमी: ऐसे बचें ठगी से
1. डिग्री चेक करें: इलाज से पहले डॉक्टर से उसकी डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर पूछें। MCI/NMC की वेबसाइट पर ऑनलाइन वेरिफाई करें।
2. रजिस्ट्रेशन देखें: क्लीनिक का सीएमओ रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें। वैध क्लीनिक में यह डिस्प्ले होता है।
3. बिल लें: हर टेस्ट, दवा और फीस का पक्का बिल लें। बिल न देना सबसे बड़ा फ्रॉड का संकेत है।
4. 108/102 डायल करें: इमरजेंसी में झोलाछाप के पास न जाएं। सरकारी एंबुलेंस बुलाकर CHC या जिला अस्पताल जाएं।
5. शिकायत करें: टोल फ्री नंबर 104 या सीएमओ ऑफिस में सीधे शिकायत दर्ज कराएं।
लोगों की मांग
1. जिले की वेबसाइट पर सभी वैध प्राइवेट हॉस्पिटल-क्लीनिक की लिस्ट फोटो और पते के साथ डाली जाए।
2. हर महीने छापेमारी की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक हो।
3. दोषी पाए जाने पर सिर्फ सील नहीं, बल्कि IPC 304 में हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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