Warned of an Agitation : जबेरा क्षेत्र के तीन गांवों में गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी ?

Warned of an Agitation : जबेरा क्षेत्र के तीन गांवों में गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

Warned of an Agitation : जबेरा क्षेत्र के तीन गांवों में गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी
Warned of an Agitation : जबेरा क्षेत्र के तीन गांवों में गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

मध्य प्रदेश के Damoh जिले के जबेरा विधानसभा क्षेत्र में भीषण पेयजल संकट ने ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। जनपद क्षेत्र के खेड़ार, गोलापट्टी और कमता टपरिया गांवों में जल जीवन मिशन की योजना पूरी तरह प्रभावित होती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब दो महीनों से जल जीवन मिशन की टंकी नहीं भरी जा रही, जिसके कारण तीनों गांवों में पानी की सप्लाई बंद पड़ी है। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर दूर भटकना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी की टंकी अब केवल शोपीस बनकर रह गई है। गांवों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन पानी सप्लाई न होने से लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। गर्मी के इस मौसम में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

इस मामले को लेकर जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि सुजान सिंह ने संबंधित अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने जल जीवन मिशन के सहायक मैनेजर ओम प्रकाश विश्वकर्मा से समस्या के बारे में सवाल किया। इस पर सहायक मैनेजर ने बताया कि लगातार बिजली नहीं रहने के कारण टंकी नहीं भर पा रही है। हालांकि इस जवाब से ग्रामीण संतुष्ट नहीं दिखाई दिए।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यही टंकी बरसात और ठंड के मौसम में नियमित रूप से भर जाती थी, लेकिन पूरी गर्मी में पानी नहीं भर पाना समझ से परे है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कैसे संभव है कि अन्य मौसमों में टंकी काम करती है लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत के समय पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाती है।

खेड़ार गांव के ग्रामीणों ने बताया कि पूरे क्षेत्र में फिलहाल केवल दो हैंडपंप ही चालू स्थिति में हैं। इन्हीं हैंडपंपों के सहारे तीन गांवों के लोग पानी की जरूरत पूरी करने को मजबूर हैं। गोलापट्टी गांव में एक हैंडपंप मौजूद है, लेकिन उसमें पर्याप्त पानी नहीं निकलता। ऐसे में वहां के लोगों को भी पानी के लिए दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि गोलापट्टी और कमता टपरिया के लोगों को पीने का पानी लेने के लिए करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर खेड़ार गांव आना पड़ता है। तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पानी भरने के लिए लंबी दूरी तय कर रहे हैं। इससे लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

Warned of an Agitation : जबेरा क्षेत्र के तीन गांवों में गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी
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गांव की महिलाओं ने बताया कि सुबह से ही पानी के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है। कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। महिलाओं का कहना है कि घर का कामकाज, बच्चों की देखभाल और पानी की व्यवस्था एक साथ करना बेहद कठिन हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई बच्चे अपने परिवार के साथ पानी लाने में मदद करने के लिए स्कूल नहीं जा पा रहे। वहीं पशुओं के लिए भी पानी की भारी समस्या उत्पन्न हो गई है।

ग्रामीण परसोत्तम यादव, द्वारका विश्वकर्मा, सलीम खान, रामपाल, धर्मेंद्र सिंह, बीरन यादव, प्रवेश यादव, बबीता रंजन और कल्लू बाई सहित कई लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टाल रहे हैं।

जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि सुजान सिंह ने कहा कि यदि जल्द ही गांवों की पेयजल समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि गांव के लोग दमोह कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन करेंगे।

ग्रामीणों ने कलेक्टर महोदय दमोह से मांग की है कि जल जीवन मिशन की टंकी को तत्काल चालू कराया जाए और गांवों में नियमित पानी सप्लाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है that सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा जब जमीनी स्तर पर उनका सही संचालन हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जल संकट अब केवल असुविधा नहीं बल्कि गंभीर समस्या बन चुका है। गर्मी लगातार बढ़ रही है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो हालात और भी खराब हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पानी के टैंकर भेजे जाएं ताकि लोगों को राहत मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से निपटने के लिए योजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है। यदि समय पर रखरखाव और निगरानी न हो तो करोड़ों रुपये की योजनाएं भी बेकार साबित हो जाती हैं।

फिलहाल जबेरा क्षेत्र के इन गांवों में पानी की समस्या ने लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन और जल जीवन मिशन विभाग पर टिकी हुई हैं कि आखिर कब तक उन्हें इस संकट से राहत मिल पाएगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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