Irregularity : बांदकपुर निरीक्षण में अनियमितता पर कलेक्टर यादव ने 7 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए

दमोह जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने आज बांदकपुर क्षेत्र का अचानक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण पूरी तरह आकस्मिक था, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं और सेवाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। इस दौरान कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष औषधालय और सेवा सहकारी समिति के साथ-साथ उचित मूल्य दुकान का भी विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सात अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं सही तरीके से जनता तक पहुंच रही हैं या नहीं। लेकिन निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर लापरवाही, अनुपस्थिति और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर हुई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ यदि पात्र हितग्राहियों तक नहीं पहुंच रहा है तो यह गंभीर लापरवाही है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले सेवा सहकारी समिति बांदकपुर का निरीक्षण किया गया, जहां खाद्यान्न स्टॉक में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इस मामले को गंभीर मानते हुए कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी दमोह श्रीमती पल्लवी जैन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कलेक्टर ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सीधे तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों का हनन है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
इसके बाद कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया, जहां स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। दो आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता अनुपस्थित पाई गईं, बच्चों को निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता और भोजन नहीं दिया जा रहा था। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नियमित निगरानी न किए जाने की बात भी सामने आई। इस पर जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल जैन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही परियोजना अधिकारी दमोह ग्रामीण कैलाश राय और पर्यवेक्षक समन्ना श्रीमती मालती कुर्मी को भी नोटिस जारी किया गया, क्योंकि उनके द्वारा केंद्रों के संचालन की उचित निगरानी नहीं की गई थी।
निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 167 में भी कई अनियमितताएं पाई गईं। यहां बच्चों को मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा था और केंद्र की कार्यप्रणाली में गंभीर लापरवाही देखी गई। इसके अलावा बांदकपुर आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 65 में भी स्थिति ठीक नहीं पाई गई। यहां की पर्यवेक्षक श्रीमती कल्पना अहिरवार मुख्यालय पर उपस्थित नहीं पाई गईं और न ही केंद्र की नियमित निगरानी की जा रही थी। इस पर भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में इन केंद्रों की उपेक्षा किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण में सुधार नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने आयुष औषधालय बांदकपुर का भी दौरा किया, जहां एक्सपायरी दवाइयों के वितरण का गंभीर मामला सामने आया। यह लापरवाही सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है। इस पर जिला आयुष अधिकारी राजकुमार पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कलेक्टर ने कहा कि दवाइयों की गुणवत्ता और समय सीमा की जांच बेहद आवश्यक है और इसमें किसी भी प्रकार की चूक गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है।
इसके अलावा शासकीय आयुर्वेद औषधालय बांदकपुर में तैनात आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. रितु कुरेरिया बिना किसी सूचना या सक्षम अनुमति के अपने कर्तव्य स्थल से अनुपस्थित पाई गईं। इस पर भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कलेक्टर ने कहा कि सरकारी सेवा में अनुशासन और उपस्थिति अनिवार्य है और बिना अनुमति अनुपस्थित रहना गंभीर अनुशासनहीनता है।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जारी नोटिस में निर्देश दिया है कि वे तीन दिवस के भीतर अपना लिखित उत्तर कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उत्तर समय पर या संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीरता बरतें और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जनता की सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। विशेष रूप से आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य सेवाएं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
इस आकस्मिक निरीक्षण के बाद जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति देखी गई। कई अधिकारियों और कर्मचारियों में यह संदेश स्पष्ट गया कि अब लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी कलेक्टर के इस कदम की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के औचक निरीक्षण से ही जमीनी स्तर पर सुधार संभव है।
कलेक्टर ने अंत में कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता जनता को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना है और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। बांदकपुर क्षेत्र का यह निरीक्षण प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सरकारी सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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