Murder : लड़की से बात करने पर चिढ़े नाबालिग दोस्त, जिगरी यार को रील बनाने जंगल ले गए, किडनैपिंग की एक्टिंग के बहाने कर दिया मर्डर

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। मानपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सगमनिहा जंगल में हुई 15 वर्षीय नाबालिग किशोर की निर्मम हत्या का पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले ने न केवल कानून व्यवस्था को झकझोर दिया है, बल्कि किशोरों के बीच बढ़ती आक्रामकता, सोशल मीडिया के प्रभाव और मानसिक असंतुलन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस दर्दनाक घटना का शिकार हुआ किशोर मयंक चौधरी मूल रूप से कटनी जिले के विजयराघवगढ़ का रहने वाला था। वह करीब 10 दिन पहले अपने रिश्तेदार के घर मानपुर घूमने आया था। 14 मई 2026 को मयंक सामान्य रूप से बाजार से सामान लेने के लिए घर से निकला था, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। जब देर रात तक उसका कोई पता नहीं चला और उसका मोबाइल भी बंद मिला, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद परिजनों ने मानपुर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नए आपराधिक कानूनों के तहत जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और उसके दोस्तों के संपर्कों की गहराई से पड़ताल की गई। जांच के दौरान पुलिस को मयंक के एक नाबालिग दोस्त पर संदेह हुआ, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान जो सच सामने आया, वह बेहद भयावह और चौंकाने वाला था।
जांच में सामने आया कि मयंक की हत्या उसके ही दो नाबालिग दोस्तों ने मिलकर की थी। आरोपी नाबालिगों ने स्वीकार किया कि मयंक का एक लड़की से बातचीत करना उन्हें पसंद नहीं था। इसी बात को लेकर उनके बीच लंबे समय से मनमुटाव और रंजिश चल रही थी। यह मामूली सा दिखने वाला विवाद धीरे-धीरे गुस्से और बदले की भावना में बदल गया, जिसने एक मासूम की जान ले ली।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने मयंक को पहले से ही एक योजना के तहत फंसाने का फैसला किया था। योजना के अनुसार, उन्होंने उसे इंस्टाग्राम रील बनाने और किडनैपिंग का एक वीडियो शूट करने का झांसा दिया। सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की चाहत और मनोरंजन के नाम पर मयंक उनकी बातों में आ गया। इसी विश्वास का फायदा उठाकर दोनों आरोपी उसे सगमनिहा जंगल की ओर ले गए।
जंगल में पहुंचने के बाद आरोपियों ने पहले से तैयार योजना के अनुसार मयंक को एक नकली किडनैपिंग सीन में शामिल किया। उन्होंने टेप की मदद से उसके हाथ और मुंह बांध दिए, जिससे वह पूरी तरह असहाय हो गया। मयंक को यह एहसास भी नहीं था कि यह सब एक खतरनाक साजिश का हिस्सा है।

इसके बाद दोनों आरोपियों ने बेरहमी से उस पर हमला कर दिया। उन्होंने चाकू से उसके सीने और गले पर कई वार किए, जिससे मयंक की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए और पूरे मामले को छिपाने की कोशिश की।
कुछ दिनों बाद जब 17 मई को सिगुड़ी क्षेत्र के जंगल में मयंक का शव बरामद हुआ, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और जांच को और तेज कर दिया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि मामला सामान्य गुमशुदगी का नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या का है।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। अंततः एक नाबालिग आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का खुलासा हो गया। पूछताछ में दूसरे नाबालिग की भूमिका भी सामने आ गई, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को अपने संरक्षण में ले लिया।
इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण और स्थानीय लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि इतनी कम उम्र के बच्चे इस तरह की क्रूर और हिंसक घटना को अंजाम दे सकते हैं। यह मामला किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, सोशल मीडिया के प्रभाव और गलत संगत के खतरनाक परिणामों को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में सोशल मीडिया किशोरों के व्यवहार और सोच पर गहरा असर डाल रहा है। इंस्टाग्राम रील्स, वीडियो और ऑनलाइन लोकप्रियता की होड़ कई बार बच्चों को गलत दिशा में ले जाती है। यह घटना भी इसी का एक गंभीर उदाहरण मानी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस घटना में किसी और की भी भूमिका है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने पहले से कोई और आपराधिक योजना तो नहीं बनाई थी।
फिलहाल दोनों नाबालिग आरोपियों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस पूरे मामले ने समाज में एक गंभीर बहस छेड़ दी है कि आखिर बच्चों में बढ़ती हिंसा और असंवेदनशीलता को कैसे रोका जाए।
यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि यदि समय रहते किशोरों के मानसिक विकास, उनकी संगति और सोशल मीडिया उपयोग पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं। उमरिया की यह घटना पूरे समाज के लिए एक गहरी सीख छोड़ गई है कि विश्वास, गलत दिशा और गुस्सा मिलकर कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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