Serious Questions Raised : पटेरा में झोलाछाप इलाज से किशोरी की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल ?

Serious Questions Raised : पटेरा में झोलाछाप इलाज से किशोरी की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

Serious Questions Raised : पटेरा में झोलाछाप इलाज से किशोरी की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
Serious Questions Raised : पटेरा में झोलाछाप इलाज से किशोरी की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पटेरा क्षेत्र में सामने आई 17 वर्षीय रिंकी बर्मन की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था तथा झोलाछाप डॉक्टरों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला रनेह थाना क्षेत्र के ग्राम महेवा का बताया जा रहा है, जहां कथित तौर पर गलत इलाज के बाद नाबालिग की जान चली गई। इस घटना के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया।

जानकारी के अनुसार मृतका रिंकी बर्मन को उसके पिता गंगा बर्मन इलाज के लिए पटेरा स्थित कथित चिकित्सक लीलाधर अहिरवार के पास लेकर गए थे। आरोप है कि वहां इलाज के नाम पर एक ही बोतल में कई तरह के 7 से 8 इंजेक्शन मिलाकर बच्ची को चढ़ा दिए गए। परिजनों का कहना है कि यह इलाज बेहद असावधानीपूर्ण और बिना किसी मानक प्रक्रिया के किया गया, जिसके कारण बच्ची की हालत बिगड़ने लगी।

परिजनों के अनुसार, जब बच्ची ने इलाज के दौरान प्यास लगने की बात कही तो कथित डॉक्टर ने उसे एक और इंजेक्शन लगा दिया और कहा कि “अब पानी नहीं मांगेगी।” इसके बाद बच्ची को घर भेज दिया गया। घर पहुंचते ही उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उसका शरीर ठंडा पड़ गया। यह देखकर परिजन घबरा गए और तुरंत उसे पटेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

मौत की पुष्टि होते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन सदमे में आ गए और अस्पताल परिसर में ही रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की जानकारी फैलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने झोलाछाप डॉक्टरों की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।

घटना के बाद रात में शव को सुरक्षित रखा गया और अगले दिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की बात कही गई। लेकिन परिजनों का आरोप है कि सुबह तक कोई ठोस कार्रवाई या आश्वासन नहीं मिलने पर प्रशासन की लापरवाही से नाराज होकर उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद करीब 11:30 बजे पटेरा-हटा मार्ग पर मुक्तिधाम के पास चक्का जाम कर दिया गया।

चक्का जाम की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को समझाइश दी और कार्रवाई का आश्वासन दिया। काफी देर की बातचीत के बाद जाम को हटवाया गया। इसके बाद लगभग 12:30 बजे शव का पोस्टमार्टम शुरू किया गया।

Serious Questions Raised : पटेरा में झोलाछाप इलाज से किशोरी की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
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इस पूरे मामले ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज उपलब्ध कराया गया होता तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने झोलाछाप डॉक्टर पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित कथित क्लिनिक के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं और कई बार छापेमारी की बात भी सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद यह अवैध क्लिनिक फिर से सक्रिय हो गया। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किसकी मिलीभगत से ऐसे अवैध इलाज केंद्र चल रहे हैं।

इस घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर सख्त निरीक्षण और कार्रवाई की जाए तो ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी के कारण ये लोग खुलेआम मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

गांव में इस घटना के बाद गुस्से और दुख का माहौल है। कई लोगों ने कहा कि गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मजबूरी में ऐसे कथित डॉक्टरों के पास जाते हैं, जहां सही इलाज के बजाय जोखिम अधिक होता है। जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है।

परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अवैध क्लिनिकों को स्थायी रूप से बंद किया जाए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर एक बड़ा सवाल है। क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त हैं? क्या निगरानी व्यवस्था प्रभावी है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों पर समय रहते रोक लगाई जा रही है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों को रोका नहीं जा सकता। यह मामला अब केवल एक मौत का नहीं बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी और जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन इस घटना ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

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