Farmers received : प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जैविक मेले में किसानों को मिली आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी

गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तथा नमामि गंगे योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 18 जून 2026 को उप नवीन मंडी परिसर गढ़मुक्तेश्वर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जैविक मेले का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की नवीन तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई तथा कृषि क्षेत्र में नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय विधायक गढ़मुक्तेश्वर श्री हरेन्द्र सिंह तेवतिया, पूर्व विधायक श्री मदन चौहान तथा पूर्व विधायक श्री कमल मलिक द्वारा फीता काटकर किसान मेला एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन कर किया गया। उद्घाटन के बाद सभी अतिथियों ने मेले का अवलोकन किया और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए किसानों को उपलब्ध कराई जा रही योजनाओं एवं तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
इसके उपरांत विधायक हापुड़ श्री विजयपाल आढ़ती, जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती रेखा नागर, भाजपा किसान मोर्चा हापुड़ के अध्यक्ष श्री अमित सिवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया। इस दौरान देश के विकास, कृषि उन्नति और किसानों की समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया गया।
कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, गन्ना तथा कृषि से जुड़े अन्य विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए किसानों को नवीन कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाने की इच्छा व्यक्त की।
मेले के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों एवं संस्थाओं द्वारा आकर्षक स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पाद, उन्नत बीज, कृषि यंत्र, पशुपालन तकनीक, मत्स्य पालन, बागवानी तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की गई। किसानों ने इन स्टॉलों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया और अपनी समस्याओं के समाधान भी प्राप्त किए।
कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक हापुड़ श्री योगेन्द्र कुमार ने उपस्थित सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं कृषक बंधुओं का स्वागत किया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है तथा प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

तकनीकी सत्र में बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मेरठ के वैज्ञानिक श्री प्रमोद तौमर ने किसानों को बासमती धान की उन्नत खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन तथा निर्यात की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर मूल्य हासिल कर सकते हैं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक एवं जैविक खेती केंद्र, गाजियाबाद की वैज्ञानिक डॉ. साईना ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक खेती मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होती है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, जीवामृत, घनजीवामृत तथा जैविक खादों के उपयोग के बारे में जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र बाबूगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. पी.के. मंडके और डॉ. अरविंद यादव ने भी किसानों को कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और जल संरक्षण के उपायों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि किसानों और आम जनमानस को केवल व्याख्यानों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पपेट शो के जरिए भी प्राकृतिक खेती की उपयोगिता समझाई गई। लोक कला और मनोरंजन के माध्यम से प्रस्तुत संदेशों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपस्थित लोगों ने इन कार्यक्रमों की सराहना की और उन्हें ज्ञानवर्धक बताया।
प्रगतिशील किसान श्री भारत भूषण गर्ग ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उससे प्राप्त होने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत में कमी आती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती को अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र के उपरांत जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले किसानों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की गई। इस सम्मान से किसानों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला और अन्य किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा मिली।
मेले में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर विभिन्न कृषि योजनाओं, तकनीकों और सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की। किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी समस्याओं के समाधान भी प्राप्त किए। कई किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने की इच्छा व्यक्त की और इसे भविष्य की खेती का महत्वपूर्ण विकल्प बताया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला कृषि अधिकारी हापुड़ श्री गौरव प्रकाश ने उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों तथा कृषक बंधुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ना है, ताकि कृषि को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण, सुरक्षित खाद्य उत्पादन और किसानों की आर्थिक समृद्धि का माध्यम है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे ऐसे कार्यक्रम किसानों को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
यह आयोजन किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने, वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। किसानों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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