Sakarauha village submerged : भंवरा तालाब के ओवरफ्लो से सकरौहा गांव जलमग्न, नाला निर्माण की मांग तेज हुई  ?

Sakarauha village submerged : भंवरा तालाब के ओवरफ्लो से सकरौहा गांव जलमग्न, नाला निर्माण की मांग तेज हुई

Sakarauha village submerged : भंवरा तालाब के ओवरफ्लो से सकरौहा गांव जलमग्न, नाला निर्माण की मांग तेज हुई 
Sakarauha village submerged : भंवरा तालाब के ओवरफ्लो से सकरौहा गांव जलमग्न, नाला निर्माण की मांग तेज हुई

चित्रकूट, 23 जून 2026। जनपद चित्रकूट के मानिकपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सकरौहा में स्थित भंवरा तालाब इस वर्ष भी बरसात के मौसम से पहले ही ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब का जलस्तर बढ़ते ही ओवरफ्लो की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण पानी सीधे गांव की आबादी की ओर बहने लगता है। हर साल की तरह इस बार भी ग्रामीण संभावित जलभराव को लेकर आशंकित हैं और स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है।

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। मानसून की शुरुआत होते ही भंवरा तालाब भर जाता है और उसका अतिरिक्त पानी निकासी के उचित प्रबंध न होने के कारण गांव की ओर मुड़ जाता है। परिणामस्वरूप गांव की गलियां जलमग्न हो जाती हैं और कई घरों में पानी घुस जाता है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में स्थिति लगभग समान रहती है। जैसे ही भारी वर्षा होती है, तालाब का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और फिर उसका दबाव गांव की ओर बढ़ने लगता है। इस स्थिति में न केवल आवागमन बाधित होता है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जलभराव की समस्या के कारण कई कच्चे और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचता है। पानी के लंबे समय तक जमा रहने से दीवारों में सीलन आ जाती है, जिससे मकानों की संरचना कमजोर हो जाती है। कुछ मामलों में घरों के गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की क्षति उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना है कि भंवरा तालाब के ओवरफ्लो पानी की निकासी के लिए अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। अस्थायी उपायों के सहारे समस्या को केवल टाला जाता रहा है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण हर वर्ष बरसात के समय गांव के लोग इस समस्या से जूझने को मजबूर होते हैं।

ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि तालाब के ओवरफ्लो पानी की निकासी के लिए तत्काल एक पक्का नाला निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि यदि वैज्ञानिक और स्थायी जल निकासी व्यवस्था तैयार कर दी जाए तो पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा सकता है और गांव में जलभराव की समस्या को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले की तुलना में अब वर्षा की तीव्रता भी बढ़ गई है, जिससे तालाब जल्दी भर जाता है। लेकिन इसके अनुरूप जल निकासी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया है। नतीजतन स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नाला निर्माण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और विकराल रूप ले सकती है।

Sakarauha village submerged : भंवरा तालाब के ओवरफ्लो से सकरौहा गांव जलमग्न, नाला निर्माण की मांग तेज हुई 
Sakarauha village submerged : भंवरा तालाब के ओवरफ्लो से सकरौहा गांव जलमग्न, नाला निर्माण की मांग तेज हुई

महिलाओं और बच्चों ने भी इस समस्या को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार स्कूल जाने वाले बच्चों को भी जलभराव के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है, क्योंकि पानी और कीचड़ के कारण फिसलने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

किसानों का कहना है कि जलभराव का असर कृषि कार्यों पर भी पड़ता है। खेतों तक पहुंचने के रास्ते बंद हो जाते हैं और फसलों की देखभाल प्रभावित होती है। कई बार पानी खेतों में भी पहुंच जाता है, जिससे फसलों को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि इस समस्या को केवल मौसमी संकट मानकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि इसे स्थायी समाधान की दृष्टि से देखा जाए। उनका कहना है कि बरसात से पहले यदि मौके का निरीक्षण कर उचित योजना बनाई जाए तो आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि नाला निर्माण कार्य समय पर कर दिया जाए तो न केवल जलभराव की समस्या समाप्त होगी, बल्कि गांव का विकास भी सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगा। इससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और हर वर्ष होने वाले नुकसान से भी बचाव संभव हो सकेगा।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर हर वर्ष गांव को जलभराव की समस्या से क्यों जूझना पड़ता है। क्या संबंधित विभाग केवल नुकसान होने के बाद ही कार्रवाई करता है, या फिर पहले से ही कोई ठोस कदम उठाकर समस्या का समाधान करने की दिशा में काम करेगा।

इस पूरे मामले में अब ग्रामीणों की उम्मीदें प्रशासनिक हस्तक्षेप पर टिकी हुई हैं। लोगों का मानना है कि यदि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग सक्रियता दिखाएं तो भंवरा तालाब से उत्पन्न यह समस्या स्थायी रूप से समाप्त की जा सकती है।

फिलहाल सकरौहा गांव के लोग हर वर्ष की तरह इस बार भी संभावित जलभराव को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि नाला निर्माण या अन्य स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया जाता है तो यह ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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