Collector at the hospital : दमोह जिला अस्पताल में कलेक्टर ने आउटसोर्स श्रमिकों के शोषण पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

दमोह (मध्य प्रदेश)। जिला प्रशासन ने श्रमिक हितों की रक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए जिला अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की शिकायतों पर गंभीर रुख अपनाया है। जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सुरक्षा गार्डों, सफाई कर्मचारियों और अन्य आउटसोर्स कर्मियों द्वारा वेतन भुगतान में अनियमितताओं और कार्य स्थितियों को लेकर उठाई गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में श्रमिकों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित एजेंसी और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की कटौती या अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जिला अस्पताल में वर्तमान में कुल 138 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 34 सुरक्षा गार्ड, 102 सफाई कर्मी तथा 2 हेल्प डेस्क कर्मचारी शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों ने कलेक्टर के समक्ष खुलकर अपनी समस्याएं रखीं और बताया कि उन्हें निर्धारित वेतन के बजाय कम राशि का भुगतान किया जा रहा है।
सुरक्षा गार्डों ने बताया कि उन्हें एजेंसी द्वारा कभी 6 हजार, कभी 7 हजार और कभी 8 हजार रुपये तक का भुगतान किया जाता है, जबकि निर्धारित कलेक्टर दर के अनुसार उनका वेतन लगभग 12 हजार रुपये होना चाहिए। इस गंभीर अनियमितता को सुनते ही कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने तत्काल श्रम अधिकारी को बुलाकर स्थिति की जांच के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने श्रम विभाग को आदेशित किया कि सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएं और विस्तृत प्रकरण तैयार कर तत्काल कार्यवाही शुरू की जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जितने समय से कर्मचारियों को कम वेतन दिया गया है, उसकी संपूर्ण बकाया राशि ब्याज सहित दिलाई जाएगी। साथ ही संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि श्रमिकों से केवल आठ घंटे की ड्यूटी ली जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें भोजन अवकाश और सप्ताह में एक दिन का साप्ताहिक अवकाश देना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कर्मचारियों से उनकी कार्य स्थितियों, ड्यूटी समय और सुविधाओं की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण संस्था में कार्यरत श्रमिकों को सम्मानजनक वातावरण और उचित पारिश्रमिक मिलना आवश्यक है, ताकि वे पूरी निष्ठा और मनोयोग से कार्य कर सकें।
इस अवसर पर कलेक्टर ने अस्पताल परिसर में स्टाफ नर्सों द्वारा अपने अतिरिक्त समय में विकसित किए गए एक छोटे उद्यान का भी निरीक्षण किया और उसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल अस्पताल के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं, बल्कि मरीजों और कर्मचारियों दोनों के लिए मानसिक शांति का माध्यम भी बनते हैं।
उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में 300 बिस्तरों की क्षमता होने के बावजूद यहां औसतन 400 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं, जिससे कार्यभार अधिक हो जाता है। ऐसे में सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है ताकि मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।
कलेक्टर ने सभी चिकित्सकों से सिविल सर्जन को पूर्ण सहयोग देने की अपील की और कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद जिला अस्पताल की सेवाओं में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक एवं पूरा स्टाफ पूरी मेहनत और समर्पण के साथ कार्य कर रहा है, जो सराहनीय है।
निरीक्षण के दौरान श्रम विभाग और एसडीएम की मौजूदगी में आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने कर्मचारियों के बयान दर्ज किए और प्रकरण तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की।
कलेक्टर के इस सख्त रुख के बाद आउटसोर्स कर्मचारी काफी उत्साहित नजर आए। कर्मचारियों ने कहा कि पहली बार किसी अधिकारी ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना है और ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कई कर्मचारियों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि उनके बकाया वेतन का भुगतान होगा और भविष्य में उन्हें नियमित एवं बेहतर वेतन मिलेगा।
कुछ कर्मचारियों ने भावुक होकर कहा कि “अब तो अपनी दिवाली हो जाएगी”, क्योंकि वर्षों से लंबित बकाया राशि मिलने और वेतन में सुधार की संभावना से उन्हें बड़ी राहत की उम्मीद है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि आदेशों का सही तरीके से पालन होता है तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा।
कुल मिलाकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का यह निरीक्षण न केवल प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण रहा, बल्कि श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी संस्थानों में कार्यरत श्रमिकों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि सभी श्रमिकों को उनका अधिकार दिलाया जाएगा और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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