Made an appeal : हापुड़ में करोड़ों की जमीन पर कब्जे की कोशिश, गार्डों से मारपीट, पीड़ितों ने एसपी से लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद में करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन पर कथित अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। इस घटना ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और भूमि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि दर्जनों हथियारबंद लोग जमीन पर जबरन कब्जा करने के इरादे से पहुंचे और विरोध करने पर वहां तैनात सुरक्षा गार्डों एवं चौकीदारों के साथ मारपीट की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना हापुड़ देहात क्षेत्र का बताया जा रहा है। आरोप है कि हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से लैस होकर जमीन पर धावा बोला। उनका उद्देश्य कथित रूप से बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा करना था। जब सुरक्षा में तैनात गार्डों और चौकीदारों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। इस दौरान गार्डों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने की भी बात सामने आई है, जिससे कई लोग घायल हो गए।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह जमीन करोड़ों रुपये की है और लंबे समय से इसे लेकर विवाद चल रहा है। उनका आरोप है कि पहले भी इस जमीन पर कब्जे के प्रयास किए गए हैं, लेकिन इस बार हमला अधिक संगठित और हिंसक था।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई थी। थाना हापुड़ देहात के प्रभारी निरीक्षक पारस मलिक की टीम को जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस या सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। इस कथित निष्क्रियता के कारण पीड़ित पक्ष में असंतोष और चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था। उनका आरोप है कि पुलिस की धीमी प्रतिक्रिया के कारण आरोपियों के हौसले और अधिक बढ़ गए हैं। इस घटना ने कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

न्याय न मिलने से निराश पीड़ित पक्ष अब जिला स्तर पर उच्च अधिकारियों के पास पहुंचा है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह को एक शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में फिर से ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने का खतरा बना रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जमीन विवाद की स्थिति को स्पष्ट किया जाए और अवैध कब्जे के प्रयासों को सख्ती से रोका जाए।
इस घटना ने एक बार फिर भूमि विवादों और अवैध कब्जों से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित पुलिस कार्रवाई, स्पष्ट दस्तावेजी जांच और प्रभावी कानूनी हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक होता है, ताकि विवाद बढ़ने से पहले ही स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
फिलहाल यह मामला पुलिस जांच के दायरे में बताया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। लेकिन पीड़ित पक्ष की शिकायत और गंभीर आरोपों को देखते हुए अब सबकी नजरें पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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