Big step : ‘विशेष राज्य का दर्जा’ की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी, नेशनल कॉन्फ्रेंस का बड़ा कदम

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति एक बार फिर विशेष राज्य के दर्जे और संवैधानिक अधिकारों की बहाली के मुद्दे पर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने घोषणा की है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा लोकतांत्रिक प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस प्रदर्शन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और पार्टी के अनुसार संवैधानिक अधिकारों की पुनर्स्थापना की मांग को प्रमुखता से उठाना है।
इस संबंध में श्रीनगर के गुपकार स्थित डॉ. फारूक अब्दुल्ला के आवास पर पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने आंदोलन की रूपरेखा, रणनीति और राजनीतिक समन्वय पर विस्तार से चर्चा की। विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया कि प्रदर्शन को व्यापक राजनीतिक समर्थन दिलाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि यह केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस का राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के अधिकारों से जुड़ा व्यापक जनहित का विषय है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों को इस आंदोलन में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। इसके साथ ही उन राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित किया जाएगा जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि विभिन्न विपक्षी दल एक मंच पर आते हैं तो जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला स्वयं कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को व्यक्तिगत पत्र लिखेंगे। इन पत्रों के माध्यम से वे उन्हें जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह करेंगे। पार्टी का उद्देश्य यह संदेश देना है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक लोकतांत्रिक सहमति बनाई जाए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करती रही है। पार्टी का कहना है कि राज्य के पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन हुए हैं, जिन पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होना आवश्यक है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनकी मांग संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दायरे में है तथा इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाया जाएगा।
हाल ही में डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने इस विषय पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस किसी भी राजनीतिक दल से आंदोलन में शामिल होने के लिए “भीख” नहीं मांगेगी। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल या नेता इस मुद्दे का समर्थन करना चाहते हैं, वे स्वेच्छा से आगे आ सकते हैं। उनके इस बयान को पार्टी के आत्मविश्वास और राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं से भी अनुशासन बनाए रखने और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी मांग रखने का आह्वान किया गया है। नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सभी नागरिकों और राजनीतिक दलों को प्राप्त है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का मानना है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रदर्शन करने से उनकी मांग राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से सामने आएगी। पार्टी चाहती है कि संसद में भी जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो और राज्य के भविष्य को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपने विचार रखें। इसी उद्देश्य से प्रदर्शन की तारीख संसद के सत्र से जोड़ी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह कदम जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकता है। यदि विपक्षी दल बड़ी संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल होते हैं, तो यह राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न राजनीतिक दल इस आमंत्रण पर क्या रुख अपनाते हैं और कितने दल इस आंदोलन का समर्थन करते हैं।
दूसरी ओर, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्तावित प्रदर्शन या विशेष राज्य के दर्जे की मांग पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भविष्य में संसद सत्र के दौरान इस विषय पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह संघर्ष किसी एक दल का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य और वहां के लोगों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह संविधान और कानून के दायरे में रहकर संचालित किया जाएगा।
फिलहाल पार्टी की ओर से विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इंडिया गठबंधन और अन्य विपक्षी दल इस प्रदर्शन में किस स्तर पर भागीदारी करते हैं। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। वहीं, विशेष राज्य के दर्जे और संवैधानिक अधिकारों की बहाली को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले समय में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।
YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q
YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews
Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/
Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c
अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।
आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता