Safety pin : जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 13 वर्षीय किशोरी के पेट से निकाली चार सेंटीमीटर की सेफ्टी पिन

कानपुर। चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञता, अनुभव और आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी दक्षता का परिचय दिया है। अस्पताल के गैस्ट्रो विभाग के डॉक्टरों ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामले में 13 वर्षीय किशोरी के आमाशय में धंसी चार सेंटीमीटर लंबी नुकीली सेफ्टी पिन को बिना ऑपरेशन और बिना चीरा लगाए सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। इस जटिल प्रक्रिया को चिकित्सकों ने महज पांच मिनट में पूरा कर किशोरी को बड़ी परेशानी से बचा लिया।
यह मामला चिकित्सा जगत में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आमाशय में नुकीली वस्तु का फंस जाना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। यदि समय रहते उसका उपचार न किया जाए तो पेट के अंदर चोट, रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे मामलों में कई बार बड़ी सर्जरी तक की आवश्यकता पड़ जाती है, लेकिन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक तकनीक के माध्यम से बिना सर्जरी के इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया।
जानकारी के अनुसार, 13 वर्षीय किशोरी के आमाशय में गलती से नुकीली सेफ्टी पिन पहुंच गई थी। जांच के बाद चिकित्सकों को पता चला कि पिन पेट के अंदर फंसी हुई है और उसकी नुकीली सतह से खतरा बना हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गैस्ट्रो विभाग के चिकित्सकों ने तत्काल उपचार की योजना बनाई और एंडोस्कोपी के माध्यम से पिन निकालने का निर्णय लिया।
गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार और उनकी टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। चिकित्सकों ने एंडोस्कोपी के दौरान विशेष ‘ओवर ट्यूब’ तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से नुकीली वस्तु को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया, जिससे आमाशय और भोजन नली को किसी प्रकार की अतिरिक्त चोट से बचाया जा सका।
चिकित्सकों के अनुसार, नुकीली वस्तुओं को निकालना एंडोस्कोपी के दौरान काफी जोखिम भरा होता है। थोड़ी सी असावधानी से अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सकों को बेहद सावधानी, अनुभव और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। जीएसवीएम की टीम ने पूरी योजना और सावधानी के साथ इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर यह उपचार नहीं किया जाता तो किशोरी को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था। आमतौर पर ऐसी स्थिति में पेट के अंदर चोट लगने या संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। कई बार मरीजों को ऑपरेशन के लिए भी जाना पड़ता है, लेकिन इस मामले में आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक के कारण बड़ी सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।
इस सफल उपचार के बाद किशोरी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। चिकित्सकों ने उसकी निगरानी की और आवश्यक स्वास्थ्य जांच भी की। परिजनों ने डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त किया और कहा कि विशेषज्ञों की तत्परता और कुशलता के कारण उनकी बेटी को बड़ी परेशानी से बचाया जा सका।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की इस उपलब्धि की चिकित्सा जगत में सराहना की जा रही है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों में भी आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और बेहतर उपचार सुविधाओं के माध्यम से गंभीर मामलों का सफल इलाज संभव है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में कई बार अनजाने में छोटी वस्तुएं निगलने के मामले सामने आते हैं। इनमें सिक्के, खिलौनों के छोटे हिस्से, पिन या अन्य वस्तुएं शामिल हो सकती हैं। अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान रखना चाहिए और ऐसी किसी भी घटना की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति, विशेषकर बच्चे द्वारा कोई नुकीली या खतरनाक वस्तु निगल ली जाए तो घरेलू उपायों के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि कानपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है। संस्थान के चिकित्सकों ने इससे पहले भी कई जटिल मामलों में अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया है और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया है।
इस मामले में डॉक्टरों की टीम ने न केवल तकनीकी दक्षता दिखाई, बल्कि धैर्य और सावधानी का भी परिचय दिया। एक छोटी सी गलती भी किशोरी के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी, लेकिन चिकित्सकों ने पूरी तैयारी के साथ प्रक्रिया को सफल बनाया।
चिकित्सा क्षेत्र में लगातार हो रहे तकनीकी विकास ने अब ऐसे मामलों के इलाज को आसान बनाया है, जिनमें पहले बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती थी। एंडोस्कोपी जैसी आधुनिक विधियां मरीजों के लिए कम जोखिम वाली और अधिक प्रभावी साबित हो रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा किया गया यह सफल उपचार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
अस्पताल प्रशासन ने भी गैस्ट्रो विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। अधिकारियों ने कहा कि मरीजों को बेहतर और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिकता है। डॉक्टरों की मेहनत और समर्पण के कारण ही ऐसे जटिल उपचार सफल हो पाते हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि चिकित्सा सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मरीजों के जीवन को बचाने के लिए अनुभव, तकनीक और समर्पण का महत्वपूर्ण योगदान होता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अपनी कुशलता से एक किशोरी को सुरक्षित जीवन दिया और चिकित्सा क्षेत्र में कानपुर का नाम गौरवान्वित किया।
यह सफलता उन सभी चिकित्सकों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों के जीवन की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की टीम ने दिखाया कि सही निर्णय, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के मेल से असंभव दिखने वाले उपचार भी संभव बनाए जा सकते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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