Development and Good Governance : हापुड़ में पंचायत डेवलपमेंट प्लान पर प्रशिक्षण कार्यशाला, मॉडल ग्राम निर्माण और सुशासन पर विशेष जोर

हापुड़। ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और ग्राम पंचायतों को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर तथा योजनाबद्ध विकास की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से जनपद हापुड़ के विकास भवन सभागार में पंचायत डेवलपमेंट प्लान (पीडीपी) विषय पर जनपद स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन उपनिदेशक (पंचायत), मेरठ के कुशल निर्देशन में किया गया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों, विकास अधिकारियों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को पंचायत विकास योजना की विभिन्न प्रक्रियाओं और उद्देश्यों से अवगत कराया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी श्रुति शर्मा, जिला विकास अधिकारी तथा जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामीण विकास और पंचायतों को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुई। अधिकारियों ने कहा कि पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध विकास ही आत्मनिर्भर और समृद्ध गांवों की आधारशिला है।
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी ने पंचायत डेवलपमेंट प्लान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर गुणवत्तापूर्ण विकास योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव गांव के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। यदि पंचायतें दूरदर्शिता के साथ विकास योजनाएं तैयार करेंगी तो उन्हें मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों से आह्वान किया कि वे ग्राम पंचायतों की वास्तविक जरूरतों का आकलन करते हुए ऐसी योजनाएं तैयार करें, जिनसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, रोजगार, आधारभूत सुविधाओं और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में स्थायी सुधार सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि पंचायत विकास योजना ग्रामीण विकास की मजबूत नींव है।
प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने पंचायत डेवलपमेंट प्लान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि पीडीपी का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करने के लिए सक्षम बनाना है, ताकि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रशिक्षकों ने पंचायत विकास योजना के उद्देश्यों और कानूनी ढांचे की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान के 73वें संशोधन के बाद पंचायतों को स्थानीय विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां प्रदान की गई हैं। इन जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन तभी संभव है, जब पंचायतें व्यवस्थित और सहभागी विकास योजनाएं तैयार करें।
कार्यशाला में जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि पंचायत विकास योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी स्तरों पर समन्वय और उत्तरदायित्व अत्यंत आवश्यक है। यदि सभी विभाग मिलकर कार्य करेंगे तो योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से ग्रामीणों तक पहुंच सकेगा।
प्रशिक्षण के दौरान सहभागितापूर्ण नियोजन (Participatory Planning) पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने कहा कि विकास योजनाओं के निर्माण में केवल अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं, सुझावों और प्राथमिकताओं को योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि विकास कार्य वास्तव में जनहितकारी बन सकें।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण (Convergence) की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि यदि पंचायतें विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं का समन्वित उपयोग करेंगी, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर विकास कार्य किए जा सकते हैं। इससे योजनाओं की गुणवत्ता और प्रभाव दोनों में वृद्धि होगी।

प्रशिक्षकों ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के उपयोग की तकनीकी जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय प्रबंधन, परिसंपत्तियों के रिकॉर्ड और विकास कार्यों की निगरानी के लिए अत्यंत उपयोगी है। अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के तरीके समझाए गए।
कार्यशाला में स्थायी विकास लक्ष्यों (SDGs) के अंतर्गत निर्धारित नौ प्रमुख विषयों (9 Themes) की भी विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि पंचायतों की विकास योजनाओं को इन विषयों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए, जिससे समग्र और संतुलित ग्रामीण विकास सुनिश्चित हो सके। इन विषयों में गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।
इसके अलावा प्रतिभागियों को स्वच्छ भारत मिशन (SBM) तथा जल जीवन मिशन की योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, शुद्ध पेयजल उपलब्धता और जल संरक्षण को अपनी विकास योजनाओं में प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यशाला के दौरान गांवों में स्वयं के आय स्रोत विकसित करने और पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि पंचायतें स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर राजस्व बढ़ा सकती हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध परिसंपत्तियों का प्रबंधन, कर संग्रहण और अन्य वैध आय स्रोतों का विकास आवश्यक है।
प्रशिक्षक अंकित भड़ाना ने प्रतिभागियों को 16वें वित्त आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों और पंचायतों को प्राप्त होने वाले वित्तीय संसाधनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपलब्ध धनराशि का पारदर्शी और योजनाबद्ध उपयोग ग्रामीण विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं जनपद परियोजना प्रबंधक मुनीब ने प्रतिभागियों को तकनीकी विषयों पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने पंचायत योजनाओं के डिजिटल प्रबंधन, डेटा संकलन और तकनीकी प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया, जिससे अधिकारी और कर्मचारी भविष्य में इन प्रणालियों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक सिंह, वरिष्ठ फैकल्टी, डीपीआरसी हापुड़ द्वारा किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न सत्रों का समन्वय करते हुए प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा पंचायत विकास योजना को व्यवहारिक रूप से लागू करने के सुझाव दिए।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जनपद के सभी खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी तथा जीपीडीपी (ग्राम पंचायत विकास योजना) क्रियान्वयन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें पंचायत विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने और लागू करने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने कहा कि पंचायतों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि ग्राम पंचायतें योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य करेंगी और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगी, तो गांवों का समग्र विकास तेजी से संभव होगा। इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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