
फतेहपुर।
बरसात के मौसम में फैलने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाव, रोगप्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के उद्देश्य से शनिवार, 5 सितंबर 2026 को हसवा बीआरसी में विशेष स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान चलाया गया। इंडियन रेडक्रास सोसाइटी, आरोग्य भारती एवं दि होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान तथा डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में आयोजित इस अभियान में शिक्षकों को बरसात में होने वाली बीमारियों से बचाव के उपायों के साथ सीपीआर का प्रशिक्षण भी दिया गया।
अभियान का आयोजन इंडियन रेडक्रास सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन एवं कार्यकारिणी सदस्य उत्तर प्रदेश तथा आरोग्य भारती के जिला सचिव डॉ. अनुराग श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान हसवा ब्लॉक में संचालित सभी 159 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के कुल 16,152 बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में सहायक होमियोपैथिक औषधि उपलब्ध कराई गई।
हसवा बीआरसी में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अध्यापकों को उक्त होमियोपैथिक औषधि प्रदान की गई। इस अवसर पर शिक्षकों को मौसम परिवर्तन के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर आवश्यक सावधानी बरतने के संबंध में जागरूक किया गया। अभियान का उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों तक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पहुंचाना और शिक्षकों को प्राथमिक स्तर पर आवश्यक सावधानियों की जानकारी देना रहा।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि बरसात का मौसम अपने साथ कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लेकर आता है। इस दौरान स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। विद्यालयों में बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ रहते हैं, इसलिए शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि शिक्षक स्वास्थ्य संबंधी सामान्य सावधानियों के प्रति जागरूक होंगे तो वे बच्चों को भी समय रहते आवश्यक जानकारी दे सकेंगे।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता केवल बीमारी होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बीमारी से बचाव के लिए पहले से आवश्यक सावधानियां अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से अभियान के तहत शिक्षकों को जागरूक करने के साथ उन्हें होमियोपैथिक औषधि भी उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सीपीआर प्रशिक्षण रहा। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने उपस्थित शिक्षकों को आपातकालीन स्थिति में सीपीआर के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अचानक हृदय संबंधी आपात स्थिति उत्पन्न होने पर समय पर प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने शिक्षकों को सीपीआर की प्रक्रिया के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी और बताया कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय प्रशिक्षित तरीके से सहायता पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।
डॉ. अनुराग ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि उनके अनुसार एक वर्ष तक के बच्चे में हृदय संबंधी आपात स्थिति होने पर सीपीआर में 15 बार दबाव और 2 बार सांस देने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जबकि एक वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति के लिए 30 बार दबाव और 2 बार सांस देने की प्रक्रिया बताई गई। उन्होंने शिक्षकों को आपात स्थिति में प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता बुलाने के साथ सीपीआर के महत्व को समझाया।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाना उपयोगी है, क्योंकि किसी भी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि आसपास मौजूद व्यक्ति को प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी हो तो चिकित्सा सहायता पहुंचने तक आवश्यक सहायता देने में मदद मिल सकती है। इसी सोच के साथ शिक्षकों को सीपीआर प्रशिक्षण अभियान से जोड़ा गया।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य समाज की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। बच्चे स्वस्थ रहेंगे तो वे नियमित रूप से विद्यालय जा सकेंगे और अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। स्वस्थ विद्यार्थी ही शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकता है।
उन्होंने कहा कि इंडियन रेडक्रास सोसाइटी, आरोग्य भारती, दि होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया एवं डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन की ओर से समय-समय पर स्वास्थ्य जागरूकता एवं सेवा गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं। हसवा में आयोजित यह अभियान भी इसी सेवा भावना का हिस्सा है। इसके माध्यम से शिक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के साथ बच्चों तक अप्रत्यक्ष रूप से जागरूकता पहुंचाने का प्रयास किया गया।
अभियान में शिक्षकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने सीपीआर की उपयोगिता को समझा और आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक सहायता के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। शिक्षकों ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के साथ कार्य करने वाले प्रत्येक शिक्षक के लिए इस प्रकार का प्रशिक्षण उपयोगी है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में प्राथमिक चिकित्सा एवं जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है। किसी दुर्घटना या अचानक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में चिकित्सा दल के पहुंचने तक यदि आसपास मौजूद व्यक्ति को प्राथमिक सहायता का ज्ञान हो तो वह स्थिति को संभालने में सहयोग कर सकता है। इसलिए सीपीआर जैसे प्रशिक्षण को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
हसवा ब्लॉक के 159 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 16,152 बच्चों को ध्यान में रखकर चलाया गया यह अभियान व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता का प्रयास रहा। शिक्षकों के माध्यम से बच्चों तक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का संदेश पहुंचाने की योजना को महत्वपूर्ण माना गया। बरसात के मौसम में विशेष रूप से साफ पानी पीने, आसपास सफाई रखने और स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों के प्रति सजग रहने पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षक संघ हसवा ब्लॉक के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह भदौरिया, शैलेंद्र अग्निहोत्री, इंडियन रेडक्रास सोसाइटी के कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रमुख सहयोगी दिलीप कुमार श्रीवास्तव तथा प्रबंध समिति सदस्य सुरेश कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे। उपस्थित पदाधिकारियों एवं सहयोगियों ने स्वास्थ्य जागरूकता और सीपीआर प्रशिक्षण अभियान की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को यह संदेश भी दिया गया कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का स्थान नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र है। बच्चों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा पर ध्यान देना भी आवश्यक है। शिक्षक बच्चों के साथ प्रतिदिन संपर्क में रहते हैं, इसलिए स्वास्थ्य जागरूकता के प्रसार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के स्वास्थ्य जागरूकता, प्राथमिक चिकित्सा और जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक से अधिक विद्यालयों एवं शिक्षकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरत के समय प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने में सक्षम लोगों की संख्या बढ़ाना है।
हसवा बीआरसी में आयोजित इस अभियान ने स्वास्थ्य सेवा, जनजागरूकता और शिक्षक प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ने का काम किया। एक ओर जहां 159 विद्यालयों के 16,152 बच्चों को ध्यान में रखते हुए बरसात के मौसम में स्वास्थ्य सुरक्षा एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता से संबंधित पहल की गई, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को सीपीआर जैसी महत्वपूर्ण जीवनरक्षक तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रकार यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के साथ-साथ शिक्षकों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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