
फतेहपुर।
जिला मिशन हॉस्पिटल फतेहपुर में भर्ती 70 वर्षीय मरीज लक्ष्मी अग्निहोत्री के लिए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर की पहल पर तत्काल रक्त उपलब्ध कराया गया। मरीज का हीमोग्लोबिन बेहद कम होकर 3.2 ग्राम रह गया था। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल एक यूनिट रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी। मरीज के परिजनों के पास उस समय कोई रक्तदाता उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति में मरीज के परिवार ने इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया।
मामले की जानकारी मिलते ही डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने रक्त केंद्र एवं पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन को मरीज की स्थिति से अवगत कराया। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए रक्त केंद्र की ओर से तत्काल आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर एबी पॉजिटिव रक्त उपलब्ध कराया गया। समय पर रक्त उपलब्ध होने से मरीज को आवश्यक उपचार देने में मदद मिली।
बेहद कम हीमोग्लोबिन के कारण रक्त की आवश्यकता
जानकारी के अनुसार लक्ष्मी अग्निहोत्री, उम्र 70 वर्ष, पत्नी यज्ञदत्त अग्निहोत्री, निवासी फतेहपुर, जिला मिशन हॉस्पिटल में उपचार के लिए भर्ती थीं। चिकित्सकीय जांच के दौरान उनका हीमोग्लोबिन स्तर महज 3.2 ग्राम पाया गया। सामान्य परिस्थितियों की तुलना में यह बेहद कम स्तर है और ऐसी स्थिति में चिकित्सक मरीज की हालत को देखते हुए आवश्यक उपचार की सलाह देते हैं।
मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाने की सलाह दी। लेकिन परिवार के पास तत्काल रक्तदान करने के लिए कोई रक्तदाता उपलब्ध नहीं था। ऐसी परिस्थिति में समय पर रक्त की व्यवस्था करना मरीज के उपचार के लिए महत्वपूर्ण था।
मरीज के परिवार ने रक्त की आवश्यकता को देखते हुए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने की पहल
मरीज के परिवार की ओर से संपर्क किए जाने के बाद डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बिना देरी किए रक्त केंद्र एवं पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन को मरीज की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने मरीज के बेहद कम हीमोग्लोबिन स्तर और चिकित्सकों द्वारा दी गई रक्त चढ़ाने की सलाह के बारे में बताया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रक्त केंद्र की टीम ने तत्काल कार्रवाई की। मरीज के लिए आवश्यक रक्त समूह की उपलब्धता सुनिश्चित की गई और एबी पॉजिटिव रक्त उपलब्ध कराया गया। समय पर रक्त उपलब्ध होने से मरीज के उपचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
परिजनों ने रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि संकट की घड़ी में समय पर रक्त मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत की बात रही।
रक्त केंद्र की टीम रही मौजूद
रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान रक्त केंद्र से रक्त संचरण समिति के संयोजक अशोक शुक्ल, दिव्या वर्मा, कमला प्रसाद, नरेंद्र सिंह सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा। टीम ने आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग किया और मरीज के लिए रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को पूरा कराया।
रक्त केंद्र की टीम की तत्परता के चलते जरूरत के समय मरीज को रक्त उपलब्ध हो सका। स्वास्थ्य सेवाओं में रक्त की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि कई बार मरीजों को उपचार के दौरान तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, ऑपरेशन, प्रसव संबंधी जटिलताओं और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में रक्त की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे समय में रक्त की उपलब्धता मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रक्तदान से बचाई जा सकती है जिंदगी
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से लोगों से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की जाती है। रक्तदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मदद की जा सकती है।
किसी मरीज के लिए रक्त की आवश्यकता अचानक भी सामने आ सकती है। ऐसे में यदि रक्त केंद्र में पर्याप्त रक्त उपलब्ध हो तो मरीज को समय पर उपचार मिल सकता है। यही वजह है कि स्वस्थ लोगों द्वारा किया गया स्वैच्छिक रक्तदान समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
रक्त की उपलब्धता केवल किसी एक व्यक्ति के लिए उपयोगी नहीं होती, बल्कि जरूरत पड़ने पर यह कई मरीजों के उपचार में काम आ सकती है। इसलिए लोगों को रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करने और अधिक से अधिक योग्य लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।
स्वस्थ व्यक्ति कर सकता है रक्तदान
स्वास्थ्य संबंधी निर्धारित मानकों को पूरा करने वाला स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है, हालांकि रक्तदान से पहले चिकित्सकीय जांच और संबंधित स्वास्थ्य मानकों का पालन आवश्यक होता है।
रक्तदान करने से पहले रक्तदाता की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और रक्तदान के लिए उसकी उपयुक्तता की जांच की जाती है। योग्य पाए जाने के बाद ही रक्तदान कराया जाता है। इससे रक्तदान की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में मदद मिलती है।
लोगों को रक्तदान से जुड़ी सही जानकारी प्राप्त कर अपने नजदीकी अधिकृत रक्त केंद्र या स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करना चाहिए। नियमित स्वैच्छिक रक्तदान रक्त की जरूरत वाले मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सहायता साबित हो सकता है।
समय पर रक्त मिलना बेहद महत्वपूर्ण
फतेहपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि गंभीर स्थिति में मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराना कितना महत्वपूर्ण है। लक्ष्मी अग्निहोत्री के मामले में हीमोग्लोबिन बेहद कम होने के कारण चिकित्सकों ने रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी। परिवार के पास रक्तदाता नहीं होने के बावजूद रेडक्रॉस सोसाइटी और रक्त केंद्र के सहयोग से आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया गया।
ऐसे मामलों में मरीज के परिजन अक्सर मानसिक तनाव में रहते हैं। अस्पताल में उपचार के दौरान यदि चिकित्सक रक्त की आवश्यकता बताते हैं तो परिवार के सामने तत्काल रक्त की व्यवस्था करने की चुनौती आ जाती है। ऐसे समय में रक्त केंद्र और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी और रक्त केंद्र से जुड़े लोगों ने आमजन से अपील की है कि स्वस्थ और पात्र लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं। रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने से रक्त की उपलब्धता को बेहतर बनाया जा सकता है। विशेष रूप से नियमित स्वैच्छिक रक्तदाता रक्त केंद्रों के लिए महत्वपूर्ण आधार होते हैं। जरूरत के समय इन्हीं रक्त भंडारों के माध्यम से मरीजों को रक्त उपलब्ध कराया जाता है।
रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान किसी दुर्घटना पीड़ित, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज या उपचार की आवश्यकता वाले व्यक्ति के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
फतेहपुर में लक्ष्मी अग्निहोत्री के मामले में समय पर एबी पॉजिटिव रक्त उपलब्ध कराने की पहल ने मरीज के उपचार में सहायता की। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन और रक्त संचरण समिति से जुड़े कर्मचारियों के सहयोग से आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया गया। इस घटना के माध्यम से एक बार फिर स्वैच्छिक रक्तदान और रक्त की पर्याप्त उपलब्धता के महत्व को रेखांकित किया गया है। जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए अधिक से अधिक स्वस्थ और पात्र लोगों को रक्तदान के लिए आगे आने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी व्यक्ति को समय पर रक्त के अभाव में उपचार संबंधी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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