
रूरा, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश। उच्च प्राथमिक विद्यालय सिठमरा में विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस के अवसर पर बच्चों को ओजोन परत के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापक शनेन्द्र सिंह तोमर ने बच्चों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर कला प्रतियोगिता कराई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण और ओजोन परत संरक्षण से संबंधित चित्र बनाकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक शनेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती है। यह सूर्य से आने वाली खतरनाक पराबैंगनी किरणों को काफी हद तक अवशोषित करती है और उन्हें सीधे पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से रोकती है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण मनुष्यों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इससे त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों, मोतियाबिंद तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए। विद्यालय स्तर पर बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने से उनमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से पेड़-पौधों की रक्षा करने, अनावश्यक रूप से संसाधनों की बर्बादी रोकने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पर्यावरण मित्र एवं मास्टर ट्रेनर कला क्राफ्ट पपेट नवीन कुमार दीक्षित ने बच्चों को कला के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कला बच्चों के भीतर एकाग्रता, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चित्रकला के माध्यम से बच्चे किसी विषय को केवल पढ़ते ही नहीं, बल्कि उसे अपनी कल्पना और भावनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त भी करते हैं। इससे उनकी सीखने की क्षमता और विषय को समझने की रुचि बढ़ती है।
नवीन कुमार दीक्षित ने कहा कि पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को कला से जोड़कर बच्चों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। ओजोन परत संरक्षण पर बनाए गए चित्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि पृथ्वी और उसके पर्यावरण की सुरक्षा सभी के लिए आवश्यक है। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों को देखा और उनकी रचनात्मकता की सराहना की।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पेड़-पौधों और विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों पर भी पड़ सकता है। अत्यधिक विकिरण से पौधों की वृद्धि और कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके साथ ही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए ओजोन परत की सुरक्षा पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के बारे में भी सामान्य जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कुछ रासायनिक पदार्थ, विशेष रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन यानी सीएफसी, ओजोन परत के क्षरण में योगदान करते हैं। ऐसे पदार्थों के उपयोग और उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए विश्व स्तर पर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं।
बच्चों को यह भी बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार दोनों आवश्यक हैं। दैनिक जीवन में बिजली और पानी की बचत करना, पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाना, कचरे को इधर-उधर न फेंकना तथा पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच रखना छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं। विद्यार्थियों से कहा गया कि वे इन बातों को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं।

कला प्रतियोगिता में बच्चों ने ओजोन परत, पृथ्वी, पेड़-पौधों, स्वच्छ वातावरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चित्र बनाए। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को सामने लाना नहीं था, बल्कि उन्हें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना भी था। बच्चों ने उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी कल्पना को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रधानाध्यापक शनेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है। पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बचपन से विकसित की जाए तो भविष्य में वे प्रकृति संरक्षण को लेकर अधिक जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
कार्यक्रम में बच्चों को ओजोन परत के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया। शिक्षकों और उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों को प्रकृति के महत्व के बारे में बताया तथा अपने आसपास हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया।
विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कला प्रतियोगिता ने बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के विषय को समझने और उसे रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों के प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर अनुदेशक प्रियंका यादव, रसोइया तथा विद्यालय के बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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