
नई दिल्ली। साल 2026 के अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख बदलाव 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी, सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन, भारतीय स्टेट बैंक के सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम पर मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा में कमी और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से जुड़े हैं। वहीं UPI के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर से लागू होगा। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक की 5 से 7 अक्टूबर तक होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर भी लोगों की नजर है, क्योंकि रेपो रेट में बदलाव का असर भविष्य में कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर पड़ सकता है।
सबसे पहले रसोई गैस की बात करें तो 1 अक्टूबर से 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में इसकी कीमत 2,747.50 रुपये से बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है, यानी 62.50 रुपये की वृद्धि हुई है। कोलकाता में नया भाव 2,954 रुपये, मुंबई में 2,764.50 रुपये और चेन्नई में 2,983 रुपये है। लखनऊ में कॉमर्शियल सिलेंडर 2,932.50 रुपये और पटना में 3,100.50 रुपये हो गया है। शहर के हिसाब से बढ़ोतरी अलग-अलग है और कई प्रमुख शहरों में यह करीब 62 से 72 रुपये के बीच रही है।
इस बदलाव का सीधा असर घरेलू रसोई पर नहीं पड़ा है, क्योंकि 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस बार बदलाव नहीं किया गया। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये पर ही है। इसलिए कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़ने का तत्काल असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैंटीन, मिठाई की दुकानों और कैटरिंग कारोबार पर अधिक पड़ सकता है। त्योहारी मौसम में इन कारोबारों में गैस की खपत बढ़ती है, इसलिए बढ़ी हुई लागत का असर उनके कुल संचालन खर्च पर पड़ सकता है।
एलपीजी से जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव सब्सिडी वाले घरेलू रिफिल की बुकिंग को लेकर है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी के साथ निर्धारित खुदरा बिक्री मूल्य पर घरेलू LPG रिफिल बुक करने के लिए Biometric Aadhaar Authentication यानी BAA पूरा होना जरूरी है। सरकार के अनुसार 27.43 करोड़ यानी करीब 89.9 प्रतिशत उपभोक्ता पहले ही यह प्रमाणीकरण पूरा कर चुके हैं। जिन लोगों का सत्यापन हो चुका है, उन्हें दोबारा प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं है।
जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं कराया है, वे डिलीवरी के समय, गैस वितरक के शोरूम पर या संबंधित तेल कंपनी के मोबाइल ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इंडेन उपभोक्ता IndianOil ONE, भारत गैस ग्राहक HelloBPCL और HP Gas ग्राहक HP PAY ऐप के माध्यम से भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक उपभोक्ताओं को केवल BAA पूरा न करने के कारण LPG से वंचित करने का उद्देश्य नहीं है। जो ग्राहक BAA नहीं कराना चाहते या किसी कारण से नहीं करा सकते, उनके लिए OMC के डिजिटल चैनलों के माध्यम से अपनी पसंद दर्ज करने का विकल्प भी बताया गया है।
बैंकिंग क्षेत्र में भी 1 अक्टूबर से SBI के कुछ खाताधारकों के लिए बदलाव हुआ है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपने Salary Package Account धारकों के लिए दूसरे बैंकों के ATM और ADWM पर मुफ्त ट्रांजैक्शन की मासिक संख्या 10 से घटाकर 5 कर दी है। यह बदलाव सभी SBI Salary Package Account variants पर लागू है और इसमें वित्तीय तथा गैर-वित्तीय दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं। SBI ने अपनी सेवा शुल्क संबंधी जानकारी में इस बदलाव को 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी बताया है।
इसका मतलब है कि यदि कोई सैलरी पैकेज खाताधारक महीने में दूसरे बैंक के ATM से बार-बार नकद निकासी करता है या बैलेंस इंक्वायरी जैसी गैर-वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल करता है, तो पांच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा के बाद शुल्क लागू हो सकता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार दूसरे बैंक के ATM पर वित्तीय ट्रांजैक्शन के लिए 23 रुपये और गैर-वित्तीय ट्रांजैक्शन के लिए 11 रुपये के शुल्क के साथ GST लागू होने की जानकारी दी गई है। हालांकि SBI के अपने ATM पर इस विशेष बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि सभी ATM सेवाओं पर नई सीमा लगा दी गई है।

SBI के Basic Savings Bank Deposit यानी BSBD खातों को लेकर भी अलग नियम है। ऐसे खातों में महीने में चार कैश निकासी मुफ्त रहने की व्यवस्था है और इसके बाद अतिरिक्त कैश निकासी पर 15 रुपये प्लस GST का शुल्क लागू होता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होते और UPI, IMPS, NEFT तथा RTGS जैसी डिजिटल सेवाओं के संबंध में अलग व्यवस्था जारी है।
डिजिटल पेमेंट के मोर्चे पर भी अक्टूबर में बड़ा बदलाव आने वाला है, लेकिन यह 1 अक्टूबर से नहीं बल्कि 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। UPI के Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा भुगतान पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होने जा रहा है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने वाला सामान्य UPI चार्ज नहीं है, बल्कि मर्चेंट की ओर से भुगतान नेटवर्क/बैंकिंग व्यवस्था में लागू होने वाला शुल्क है।
इस बदलाव में छोटे कारोबारियों को कुछ राहत दी गई है। उपलब्ध नियमों के अनुसार छोटे व्यापारियों और कुछ पात्र श्रेणियों के लेन-देन पर MDR लागू नहीं होगा। वहीं Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त बने रहेंगे। इसलिए सामान्य रूप से परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेजने या व्यक्तिगत भुगतान करने वाले ग्राहकों पर इस MDR व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
त्योहारी सीजन में खरीदारी करने वाले लोगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार से भी महत्वपूर्ण खबर है। एयर कंडीशनर, LED टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे कंज्यूमर अप्लायंसेज की कीमतों में अक्टूबर से बढ़ोतरी की तैयारी की गई है। उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार AC की कीमतों में करीब 5 से 8 प्रतिशत तक और कुछ टीवी, रेफ्रिजरेटर तथा वॉशिंग मशीनों में करीब 3 से 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह 2026 में उद्योग की कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी बताई जा रही है।
कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कॉपर, एल्युमीनियम और स्टील जैसी धातुओं की लागत, क्रूड ऑयल से जुड़े इनपुट, माल ढुलाई खर्च और मुद्रा विनिमय में उतार-चढ़ाव को प्रमुख कारण बताया है। हालांकि बाजार में पहले से मौजूद पुराने स्टॉक के कारण कुछ दुकानदारों के पास पुराने दाम वाले उत्पाद सीमित समय तक उपलब्ध हो सकते हैं। इसलिए किसी भी ग्राहक को वास्तविक कीमत और ऑफर की जानकारी खरीदारी से पहले संबंधित विक्रेता से जांच लेनी चाहिए।
अब नजर RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है। MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच निर्धारित है और नीति संबंधी निर्णय 7 अक्टूबर को घोषित किया जाना है। अगस्त की बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया था और अगली बैठक अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई थी
अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट को लेकर बाजार में अलग-अलग अनुमान जरूर हैं, लेकिन अभी इसे अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता। कुछ विश्लेषकों ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई है, जबकि अन्य आकलन अलग दिशा में हैं। अंतिम फैसला RBI की MPC बैठक में उपलब्ध महंगाई, आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा कीमतों और अन्य आर्थिक आंकड़ों के आकलन के बाद होगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि रेपो रेट निश्चित रूप से बढ़ेगा।
यदि RBI रेपो रेट में बदलाव करता है तो उसका असर बैंकों की फंडिंग लागत और कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है, हालांकि हर बैंक का असर एक जैसा या तुरंत होना जरूरी नहीं है। होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग-रेट कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए इसलिए 7 अक्टूबर के मौद्रिक नीति फैसले पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
इस तरह अक्टूबर 2026 की शुरुआत में आम लोगों के लिए कई अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव हुए हैं। कॉमर्शियल LPG महंगा हुआ है, जबकि घरेलू LPG की मूल कीमत में बदलाव नहीं हुआ। सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था लागू हुई है। SBI Salary Package खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के ATM पर मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा घटाई गई है। 15 अक्टूबर से बड़े मर्चेंट UPI भुगतान पर नया MDR ढांचा लागू होगा, जबकि AC, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी का असर त्योहारी खरीदारी पर पड़ सकता है। वहीं RBI की अक्टूबर बैठक में रेपो रेट पर फैसला आने वाला है, जिसके बाद ही EMI और कर्ज की ब्याज दरों पर संभावित प्रभाव की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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