
हापुड़।
परशुराम वंशीय सेवा समिति एवं राष्ट्रीय सैनिक संस्था के संयुक्त तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय कवि एवं महान गजलकार दुष्यंत कुमार त्यागी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सर्व समाज के गणमान्य लोगों ने एकत्र होकर महान साहित्यकार दुष्यंत कुमार त्यागी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उपस्थित लोगों ने उनके साहित्यिक योगदान, सामाजिक सरोकारों और रचनात्मक चेतना को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि दुष्यंत कुमार त्यागी हिंदी साहित्य के ऐसे महान रचनाकार थे, जिन्होंने अपनी कविताओं और गजलों के माध्यम से आम आदमी की आवाज को प्रभावशाली ढंग से समाज के सामने रखा। उनकी रचनाओं में समाज की वास्तविक परिस्थितियों, आम जन की पीड़ा, व्यवस्था के प्रति सवाल और बदलाव की आकांक्षा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न बनाकर सामाजिक चेतना और जनभावनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनाया।
कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य लोगों ने कहा कि दुष्यंत कुमार की रचनाएं आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं, जितनी उनके समय में थीं। उनकी लेखनी में आम आदमी की समस्याओं और संघर्षों की स्पष्ट झलक मिलती है। यही कारण है कि उनकी कविताएं और गजलें आज भी साहित्य प्रेमियों तथा युवाओं को प्रेरित करती हैं। वक्ताओं ने कहा कि दुष्यंत कुमार ने हिंदी साहित्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी रचनाओं ने समाज में जागरूकता पैदा करने का कार्य किया।
जयंती समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने दुष्यंत कुमार त्यागी के साहित्यिक जीवन पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं में सामाजिक व्यवस्था की विसंगतियों को बेबाकी के साथ उठाया। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और आम जनमानस से जुड़ी हुई थी। यही विशेषता उन्हें अन्य रचनाकारों से अलग पहचान देती है। उनकी गजलों में जहां संवेदनशीलता दिखाई देती है, वहीं व्यवस्था के प्रति सवाल उठाने का साहस भी नजर आता है।
समारोह की अध्यक्षता भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय त्यागी ने की। उन्होंने दुष्यंत कुमार के व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि समाज को ऐसे महान साहित्यकारों के विचारों और रचनाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार की जयंती मनाने का उद्देश्य केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनकी रचनाओं में निहित सामाजिक चेतना और जनहित के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
कार्यक्रम का संचालन प्रदीप त्यागी बब्लू ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों का स्वागत करते हुए दुष्यंत कुमार के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार त्यागी ने अपनी लेखनी से साहित्य जगत में अलग पहचान बनाई। उनकी रचनाओं ने समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित किया और लोगों को अपने आसपास की परिस्थितियों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने भी दुष्यंत कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार का साहित्य आज भी प्रासंगिक है और उनकी रचनाएं सामाजिक सरोकारों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि महान साहित्यकारों को याद करना हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।

प्रोफेसर सुनील दत्त त्यागी ने भी दुष्यंत कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि दुष्यंत कुमार ने हिंदी साहित्य को जनभावनाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी रचनाओं में समाज के विभिन्न पहलुओं की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के प्रदेश प्रवक्ता चौधरी ज्ञानेंद्र त्यागी ने कहा कि दुष्यंत कुमार की लेखनी में समाज और देश के प्रति संवेदनशीलता दिखाई देती है। उनकी रचनाओं को पढ़कर युवा पीढ़ी सामाजिक जिम्मेदारियों और अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो सकती है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का आईना होता है और दुष्यंत कुमार ने इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया।
त्यागी समाज हापुड़ की ओर से चौधरी निखिल त्यागी (अहाते वाले), सुरेश त्यागी, डॉ. सुधीर त्यागी, सुधीर त्यागी (दरोगा जी), विनय प्रकाश त्यागी, डॉ. केके त्यागी, शुभलक्ष्य त्यागी, सुभाष चंद्र त्यागी सहित अन्य लोगों ने भी दुष्यंत कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र त्यागी ने भी सहभागिता की। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार की रचनाओं में आम लोगों की भावनाओं और समस्याओं को प्रमुखता से स्थान मिला। उनकी साहित्यिक विरासत समाज के लिए हमेशा प्रेरणादायक बनी रहेगी।
इस दौरान रविंद्र कसाना, देवेंद्र खटीक (प्रधान), भुल्लन त्यागी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने दुष्यंत कुमार त्यागी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।
समारोह में सर्व समाज के लोगों की सहभागिता रही। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी महान साहित्यकार की वास्तविक स्मृति तभी जीवित रहती है, जब उसकी रचनाओं और विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए। दुष्यंत कुमार का साहित्य भी इसी प्रकार समाज को जागरूक करने और लोगों को अपनी बात मजबूती से रखने की प्रेरणा देता है।
आयोजकों ने कहा कि दुष्यंत कुमार त्यागी की जयंती पर आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ उनके साहित्यिक योगदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि समाज में साहित्य और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।
समारोह के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने महान कवि एवं गजलकार दुष्यंत कुमार त्यागी को श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके बताए साहित्यिक एवं सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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