A Message for Everyone : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ, साधना, संयम, शिव आराधना और आत्मचिंतन का पावन संदेश जन-जन तक ?

A Message for Everyone : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ, साधना, संयम, शिव आराधना और आत्मचिंतन का पावन संदेश जन-जन तक

A Message for Everyone : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ, साधना, संयम, शिव आराधना और आत्मचिंतन का पावन संदेश जन-जन तक
A Message for Everyone : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ, साधना, संयम, शिव आराधना और आत्मचिंतन का पावन संदेश जन-जन तक

आगरा। देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर चातुर्मास का शुभारंभ श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुआ। भारतीय सनातन परंपरा में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इसी तिथि से भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और अगले चार महीनों तक चातुर्मास का पावन काल चलता है। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने श्रद्धालुओं को देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह समय केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन, संयम, सेवा और आध्यात्मिक उन्नति का अनुपम अवसर है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास हमें बाहरी आडंबर और शोर से दूर होकर अपने अंतर्मन की आवाज सुनने तथा जीवन को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा देता है।

राजेश खुराना ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चातुर्मास का विशेष स्थान है। यह केवल चार महीनों की धार्मिक अवधि नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में आत्मनिरीक्षण और आत्मविकास का महापर्व है। उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होने वाला यह काल व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर प्रदान करता है। यह समय हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में कितना संयम, सेवा और सद्भाव अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य बाहरी दिखावे से हटकर भीतर की शांति और आध्यात्मिक शक्ति को विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यह निद्रा आलस्य की नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन, विश्राम और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। इसी कारण इस अवधि को साधना और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ समय माना गया है। इस दौरान मनुष्य को अपने जीवन में अनुशासन, सात्त्विकता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करना चाहिए।

राजेश खुराना ने कहा कि चातुर्मास हमें यह संदेश देता है कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर के आत्मबल, धैर्य और सकारात्मक सोच में निहित होती है। यदि व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित कर ले, क्रोध, लोभ, अहंकार और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर ले, तो उसका जीवन स्वतः ही सुख, शांति और संतोष से भर जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस पावन काल में अपने व्यवहार में विनम्रता, करुणा और सेवा की भावना को स्थान दें।

उन्होंने कहा कि चातुर्मास के चार महीने—श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक—सनातन परंपरा में विशेष रूप से साधना, जप, तप, व्रत, पूजा-पाठ और भक्ति के लिए समर्पित माने गए हैं। इन महीनों में श्रद्धालु नियमित रूप से भगवान का स्मरण करते हैं, भजन-कीर्तन, सत्संग, धार्मिक अनुष्ठानों और सेवा कार्यों में भाग लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश और कई अन्य मांगलिक कार्य स्थगित रखे जाते हैं, ताकि व्यक्ति अपना अधिक समय आध्यात्मिक साधना और आत्मविकास में लगा सके।

राजेश खुराना ने कहा कि चातुर्मास हमें भोग से योग, दिखावे से आत्मचिंतन और शोर से शांति की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में मनुष्य बाहरी सफलता की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि वह स्वयं के भीतर झांकने का समय ही नहीं निकाल पाता। चातुर्मास हमें कुछ समय अपने भीतर झांकने, अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर देता है। यही इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि इस अवधि में भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना, जप, तप, ध्यान, भजन-कीर्तन तथा दान-पुण्य को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता करना, गरीबों को भोजन उपलब्ध कराना, गौसेवा, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और समाजहित के कार्य भी चातुर्मास की साधना का महत्वपूर्ण भाग हैं। सेवा के बिना कोई भी साधना पूर्ण नहीं मानी जा सकती।

A Message for Everyone : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ, साधना, संयम, शिव आराधना और आत्मचिंतन का पावन संदेश जन-जन तक
A Message for Everyone : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ, साधना, संयम, शिव आराधना और आत्मचिंतन का पावन संदेश जन-जन तक

राजेश खुराना ने भारतीय परंपराओं के वैज्ञानिक पक्ष पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण आयुर्वेद में हल्का, सात्त्विक और सुपाच्य भोजन करने की सलाह दी गई है। इसी कारण चातुर्मास के दौरान खान-पान में संयम रखने और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से परहेज की परंपरा विकसित हुई। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण का भी एक प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि इस अवधि में सात्त्विक भोजन, नियमित दिनचर्या, ध्यान, योग और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तो उसका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों बेहतर होते हैं। साथ ही, आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के भीतर धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन का विकास करता है।

राजेश खुराना ने कहा कि आज समाज में बढ़ती तनावपूर्ण जीवनशैली, प्रतिस्पर्धा और भौतिकता के बीच चातुर्मास का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति इन चार महीनों में अपने जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन भी लाता है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर दिखाई देगा। परिवारों में प्रेम बढ़ेगा, समाज में सद्भाव मजबूत होगा और लोगों के जीवन में मानसिक शांति का वातावरण बनेगा।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि चातुर्मास को केवल धार्मिक परंपरा न मानें, बल्कि इसे आत्मअनुशासन और समाज सेवा का अभियान बनाएं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में प्रतिदिन कुछ समय ईश्वर का स्मरण, ध्यान, सत्संग, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए अवश्य निकालें। ऐसा करने से व्यक्ति का जीवन अधिक संतुलित, सकारात्मक और सार्थक बन सकता है।

अपने संदेश के अंत में राजेश खुराना ने सभी श्रद्धालुओं को देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आइए, इस पावन काल में हम अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और नकारात्मकता का त्याग कर प्रेम, करुणा, सेवा, सहिष्णुता और सद्भाव को अपने जीवन का आधार बनाएं। बाहरी कोलाहल को कुछ समय के लिए विराम देकर अंतर्मन की आवाज सुनें, प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि यही देवशयनी एकादशी और चातुर्मास का वास्तविक संदेश है तथा यही भारतीय संस्कृति की महान आध्यात्मिक परंपरा का सार भी है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।

YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q

YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews

Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/

Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c

अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।

आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता

Check Also

Detailed Program : यूपी बोर्ड 2027 प्राइवेट परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, पांच अगस्त अंतिम तिथि, विस्तृत कार्यक्रम जारी हुआ

Detailed Program : यूपी बोर्ड 2027 प्राइवेट परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, पांच अगस्त अंतिम तिथि, विस्तृत कार्यक्रम जारी हुआ ?

Detailed Program : यूपी बोर्ड 2027 प्राइवेट परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, पांच अगस्त अंतिम तिथि, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *