FIR registered : जेवी जैन कॉलेज के प्राचार्य पर महिला प्रोफेसर ने लगाया उत्पीड़न और हत्या की धमकी का आरोप, एफआईआर दर्ज ?

FIR registered : जेवी जैन कॉलेज के प्राचार्य पर महिला प्रोफेसर ने लगाया उत्पीड़न और हत्या की धमकी का आरोप, एफआईआर दर्ज ?
FIR registered : जेवी जैन कॉलेज के प्राचार्य पर महिला प्रोफेसर ने लगाया उत्पीड़न और हत्या की धमकी का आरोप, एफआईआर दर्ज ?

सहारनपुर।

जेवी जैन कॉलेज के चित्रकला विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीलम गौड की शिकायत पर पुलिस ने कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर वकुल बंसल तथा तीन अज्ञात नकाबपोश व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। महिला प्रोफेसर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को दी गई तहरीर में प्राचार्य पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा की गई POSH एक्ट-2013 के तहत शिकायत को वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया गया।

पुलिस ने महिला प्रोफेसर की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। महिला प्रोफेसर ने अपनी शिकायत में पिछले काफी समय से कथित रूप से उत्पीड़न किए जाने की बात कही है। उनका आरोप है कि उन्हें बार-बार ऐसे नोटिस दिए जाते रहे, जिन्हें वह निराधार मानती हैं और जिनका उद्देश्य उन्हें मानसिक रूप से परेशान करना तथा अन्य अध्यापकों के बीच उनकी छवि खराब करना था।

डॉ. नीलम गौड के मुताबिक, कॉलेज में उनके साथ लंबे समय से प्रताड़ना का व्यवहार किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रशासनिक कार्रवाइयों और नोटिस के माध्यम से उन्हें लगातार दबाव में रखने का प्रयास किया गया। महिला प्रोफेसर का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में अपनी शिकायत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखी और POSH एक्ट-2013 के तहत शिकायत दर्ज कराई। POSH कानून कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए बनाया गया है।

महिला प्रोफेसर का आरोप है कि POSH शिकायत किए जाने के बाद परिस्थितियां और अधिक गंभीर हो गईं। उन्होंने दावा किया कि शिकायत वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने दो बार कथित हमले का भी आरोप लगाया है। शिकायत में तीन अज्ञात नकाबपोश व्यक्तियों का भी उल्लेख किया गया है। महिला प्रोफेसर ने आशंका जताई कि इन घटनाओं का संबंध उनके द्वारा की गई शिकायत और उसके बाद उत्पन्न विवाद से हो सकता है। हालांकि, इस संबंध की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

डॉ. नीलम ने अपनी तहरीर में अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी गई और उनकी जान को खतरा बताया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि महिला प्रोफेसर द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या है और कथित हमलों में कौन लोग शामिल थे।

मामले में तीन अज्ञात नकाबपोश व्यक्तियों का जिक्र होने के कारण पुलिस के सामने उनकी पहचान करना भी महत्वपूर्ण चुनौती है। जांच के दौरान पुलिस घटनाओं से जुड़े संभावित स्थानों, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल कर सकती है। यदि घटनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो उनकी फुटेज भी जांच का हिस्सा बन सकती है। इसके अलावा शिकायत में बताए गए समय और घटनाक्रम के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है।

महिला प्रोफेसर ने प्राचार्य पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पुलिस शिकायत में दर्ज प्रत्येक बिंदु की जांच करेगी। किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले उसके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच आवश्यक होगी। पुलिस इसी प्रक्रिया के तहत मामले को आगे बढ़ा रही है।

FIR registered : जेवी जैन कॉलेज के प्राचार्य पर महिला प्रोफेसर ने लगाया उत्पीड़न और हत्या की धमकी का आरोप, एफआईआर दर्ज ?
FIR registered : जेवी जैन कॉलेज के प्राचार्य पर महिला प्रोफेसर ने लगाया उत्पीड़न और हत्या की धमकी का आरोप, एफआईआर दर्ज ?

शिकायत का एक महत्वपूर्ण पहलू कॉलेज में POSH एक्ट के तहत पहले से की गई कार्रवाई से जुड़ा है। डॉ. नीलम के अनुसार, उन्होंने कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न को लेकर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद शिकायत वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। अब पुलिस यह भी जांच करेगी कि शिकायत वापस लेने के लिए वास्तव में किसी प्रकार का दबाव या धमकी दी गई थी या नहीं।

महिला प्रोफेसर ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कॉलेज के अन्य शिक्षकों के बीच नीचा दिखाने के उद्देश्य से बार-बार नोटिस जारी किए गए। उनका कहना है कि इन नोटिसों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस शिकायत में उल्लिखित प्रशासनिक कार्रवाइयों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर सकती है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि नोटिस नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थे या शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से जारी किए गए थे।

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब मामले में पुलिस जांच का चरण शुरू हो गया है। जांच एजेंसी शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी ले सकती है। आरोपों से संबंधित दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध सामग्री भी जांच का हिस्सा बन सकती है। यदि कथित हमलों के संबंध में कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने आता है तो उसकी भी जांच की जाएगी।

कॉलेज प्रशासन से जुड़े विवादों में किसी भी पक्ष पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक ओर महिला प्रोफेसर ने गंभीर आरोप लगाकर पुलिस से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा। पुलिस का काम उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाना है।

मामले में प्राचार्य प्रोफेसर वकुल बंसल के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष सामने आना और पुलिस जांच में उनका बयान दर्ज होना महत्वपूर्ण होगा। इसी प्रकार तीन अज्ञात नकाबपोश व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित हमलों के पीछे कौन लोग थे और उनका महिला प्रोफेसर से क्या संबंध था।

डॉ. नीलम गौड की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। खासतौर पर POSH शिकायत से जुड़े आरोपों के कारण मामला कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था से भी जुड़ गया है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की सुरक्षा, शिकायत की गोपनीयता और निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल सहारनपुर पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राचार्य प्रोफेसर वकुल बंसल और तीन अज्ञात नकाबपोश व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला प्रोफेसर ने मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न, POSH शिकायत वापस लेने के लिए दबाव तथा दो बार हमले और धमकी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस इन सभी आरोपों की जांच कर रही है।

जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला प्रोफेसर द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, कथित हमलों के पीछे कौन लोग थे और POSH शिकायत वापस लेने के लिए वास्तव में किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था या नहीं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।.

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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