Allegation regarding the investigation : कौवापुर बाजार में अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन पर उठे सवाल, बिना रेडियोलॉजिस्ट जांच का आरोप ?

Allegation regarding the investigation : कौवापुर बाजार में अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन पर उठे सवाल, बिना रेडियोलॉजिस्ट जांच का आरोप
Allegation regarding the investigation : कौवापुर बाजार में अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन पर उठे सवाल, बिना रेडियोलॉजिस्ट जांच का आरोप

बलरामपुर। कौवापुर बाजार में संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को लेकर स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुपालन और जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सेंटर पर निर्धारित योग्यता वाले रेडियोलॉजिस्ट की मौजूदगी के बिना अल्ट्रासाउंड जांच कराई जा रही है। शिकायत सामने आने के बाद सेंटर के संचालन की वैधता, पंजीकरण की स्थिति और जांच प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जांच रिपोर्ट या स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बताया जा रहा है कि जिले में अवैध और नियमविरुद्ध तरीके से संचालित किए जा रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर निगरानी और कार्रवाई को लेकर प्रशासन की ओर से अभियान चलाया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों द्वारा ऐसे केंद्रों की जांच किए जाने की बात भी सामने आई थी। इस अभियान का उद्देश्य अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना और अनियमितताओं की स्थिति में कार्रवाई करना बताया गया था। इसके बावजूद कौवापुर बाजार में एक सेंटर के संचालन को लेकर शिकायत सामने आने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

शिकायत के अनुसार, कौवापुर बाजार में संचालित उक्त सेंटर पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। आरोप है कि जांच के दौरान निर्धारित योग्यता रखने वाले रेडियोलॉजिस्ट की मौजूदगी नहीं रहती। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो सेंटर के संचालन और वहां कराई जा रही जांच की प्रक्रिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्तर से आवश्यक कार्रवाई का सवाल सामने आता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सेंटर पर जांच किस व्यवस्था के तहत कराई जा रही है और वर्तमान समय में उसके पंजीकरण की स्थिति क्या है।

मामले को लेकर सेंटर संचालक इमरान से बातचीत की गई। संचालक ने बताया, “मेरे यहां अल्ट्रासाउंड कई जगह चल रहा है और अभी रजिस्ट्रेशन का रिन्यूवल नहीं हुआ है।” संचालक के इस कथन के बाद सेंटर के संचालन को लेकर उठ रहे सवाल और गंभीर हो गए हैं। खासतौर पर पंजीकरण के नवीनीकरण की स्थिति और अल्ट्रासाउंड जांच किए जाने की व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग से स्पष्ट जानकारी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

अल्ट्रासाउंड जैसी चिकित्सीय जांच सेवाओं के संचालन में निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। सेंटर की पंजीकरण स्थिति, जांच करने वाले विशेषज्ञ की योग्यता और संबंधित रिकॉर्ड की उपलब्धता जैसे बिंदुओं की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जा सकती है। ऐसे में शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि मौके पर जाकर सेंटर की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करें और दस्तावेजों की जांच करें। यदि किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायत में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जब जिले में नियमविरुद्ध अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा था, तब कौवापुर बाजार स्थित सेंटर की वर्तमान स्थिति की निगरानी किस स्तर पर की गई। यदि सेंटर का पंजीकरण नवीनीकरण के लिए लंबित है, तो उसके दौरान जांच सेवाओं के संचालन की अनुमति है या नहीं, यह भी स्वास्थ्य विभाग की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। इसी तरह यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि सेंटर पर जांच करने वाले चिकित्सक या रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति और उपलब्धता से संबंधित क्या व्यवस्था है।

अल्ट्रासाउंड जांच का उपयोग चिकित्सकीय जरूरतों के लिए किया जाता है और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय की जा सकती है। ऐसे में जांच की गुणवत्ता और अधिकृत व्यवस्था का पालन मरीजों के हित से जुड़ा विषय है। किसी भी केंद्र पर यदि निर्धारित नियमों के विपरीत जांच होने की शिकायत मिलती है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

Allegation regarding the investigation : कौवापुर बाजार में अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन पर उठे सवाल, बिना रेडियोलॉजिस्ट जांच का आरोप
Allegation regarding the investigation : कौवापुर बाजार में अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन पर उठे सवाल, बिना रेडियोलॉजिस्ट जांच का आरोप

मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सेंटर संचालक द्वारा स्वयं पंजीकरण के रिन्यूवल की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की बात कही गई है। हालांकि, केवल इस बयान के आधार पर सेंटर को नियमविरुद्ध घोषित नहीं किया जा सकता। पंजीकरण की वास्तविक स्थिति, नवीनीकरण के लिए आवेदन की तारीख, संबंधित विभाग में लंबित प्रक्रिया और सेंटर को जांच संचालन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी। इसी आधार पर विभाग यह तय कर सकेगा कि सेंटर का संचालन नियमों के अनुरूप हो रहा था या नहीं।

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग की जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग मामले का संज्ञान लेकर सेंटर की जांच कराए। जांच के दौरान पंजीकरण प्रमाणपत्र, नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेज, सेंटर में कार्यरत चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों की जानकारी तथा अल्ट्रासाउंड जांच से संबंधित आवश्यक अभिलेखों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा सेंटर पर उपलब्ध व्यवस्थाओं और संचालन की वास्तविक स्थिति का भी सत्यापन किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।

प्रशासन की ओर से समय-समय पर अवैध और नियमविरुद्ध चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। ऐसे में किसी सेंटर को लेकर शिकायत मिलने पर विभागीय स्तर पर सत्यापन से न केवल शिकायत की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि क्षेत्र में संचालित अन्य सेंटरों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि सेंटर के दस्तावेज और संचालन प्रक्रिया नियमानुसार पाए जाते हैं तो शिकायत को लेकर स्थिति भी साफ हो जाएगी।

फिलहाल कौवापुर बाजार स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सेंटर के संचालन को अवैध या नियमविरुद्ध बताना विभागीय जांच के निष्कर्ष आने से पहले उचित नहीं होगा। मामले में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण है। विभागीय अधिकारी यदि सेंटर का निरीक्षण कर दस्तावेजों और संचालन व्यवस्था की जांच करते हैं तो पंजीकरण, रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता और अल्ट्रासाउंड जांच की प्रक्रिया से जुड़े सभी सवालों का जवाब सामने आ सकता है।

अब मुख्य सवाल यही है कि कौवापुर बाजार स्थित सेंटर का पंजीकरण वर्तमान में किस स्थिति में है, क्या उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है और वहां अल्ट्रासाउंड जांच निर्धारित चिकित्सकीय व्यवस्था के तहत कराई जा रही है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर चलाए गए अभियान के दौरान इस सेंटर का निरीक्षण हुआ था या नहीं। यदि निरीक्षण हुआ था तो उस समय क्या स्थिति सामने आई और उसके बाद सेंटर के संचालन को लेकर क्या कदम उठाए गए, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होगा।

मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत और सेंटर संचालक के बयान के आधार पर उठे सवालों के बीच स्थानीय स्तर पर विभागीय कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर लोगों की नजर बनी हुई है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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