Apprehension of an attack : बाराबंकी में जंगल के पास मिला बंदर का शव, तेंदुए की दहशत से सहमे गांव वाले पगमार्क से हमले की आंशका  ?

Apprehension of an attack : बाराबंकी में जंगल के पास मिला बंदर का शव, तेंदुए की दहशत से सहमे गांव वाले पगमार्क से हमले की आंशका  ?
Apprehension of an attack : बाराबंकी में जंगल के पास मिला बंदर का शव, तेंदुए की दहशत से सहमे गांव वाले पगमार्क से हमले की आंशका  ?

बाराबंकी।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के थाना सुबेहा क्षेत्र में एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्राम सभा शरीफाबाद के जंगल में गुरुवार सुबह एक बंदर मृत अवस्था में मिला। बंदर इंद्रसेन यादव के घर से महज करीब 30 मीटर की दूरी पर पड़ा मिला। सुबह के समय जब ग्रामीणों की नजर मृत बंदर पर पड़ी तो आसपास के इलाके में चर्चा शुरू हो गई। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि किसी जंगली जानवर के हमले में बंदर की मौत हुई हो सकती है।

शरीफाबाद गांव और उसके आसपास के जंगल क्षेत्र में पिछले करीब एक महीने से तेंदुए की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में जंगली जानवर की गतिविधियों को लेकर पहले से ही आशंका बनी हुई थी। अब आबादी के नजदीक बंदर के मृत मिलने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, बंदर की मौत तेंदुए के हमले से हुई है या किसी अन्य कारण से, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गुरुवार सुबह करीब पांच बजे इंद्रसेन यादव के घर से लगभग 30 मीटर की दूरी पर बंदर मृत मिला। इतनी कम दूरी पर बंदर का शव मिलने से ग्रामीणों में कई तरह की चर्चाएं होने लगीं। लोगों ने मौके पर पहुंचकर मृत बंदर को देखा और घटना की जानकारी आसपास के ग्रामीणों को दी। कुछ ग्रामीणों ने इसे जंगल में किसी जंगली जानवर की गतिविधि से जोड़कर देखा।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब एक महीने से शरीफाबाद के जंगल में तेंदुए की मौजूदगी की चर्चा चल रही है। लोगों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में जंगली जानवर के होने की आशंका के चलते ग्रामीण पहले से ही सतर्क रहने लगे हैं। खासकर जंगल के आसपास रहने वाले परिवारों में बच्चों और पालतू पशुओं को लेकर चिंता बनी रहती है।

ग्रामीणों की चिंता का एक कारण करीब 10 दिन पहले हुई एक अन्य घटना भी है। बताया गया कि लगभग 10 दिन पहले जंगल में एक बछड़ा मृत अवस्था में मिला था। ग्रामीणों का कहना है कि बछड़े की मौत जंगली जानवर के हमले के बाद हुई थी। उस घटना के बाद से ही क्षेत्र में तेंदुए को लेकर आशंका और बढ़ गई थी। अब बंदर के मृत मिलने के बाद ग्रामीण दोनों घटनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर देख रहे हैं।

हालांकि, इन घटनाओं के आधार पर तेंदुए की मौजूदगी या उसके हमले की पुष्टि नहीं की जा सकती। किसी जंगली जानवर की पहचान और उसके हमले की पुष्टि के लिए विशेषज्ञ जांच जरूरी होती है। बंदर की मौत का वास्तविक कारण भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल ग्रामीणों की ओर से केवल आशंका जताई जा रही है।

शरीफाबाद का जंगल क्षेत्र गांव की आबादी के नजदीक होने के कारण ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। जंगल के आसपास रहने वाले लोगों का रोजाना किसी न किसी काम से इधर-उधर आना-जाना होता है। ऐसे में यदि वास्तव में कोई जंगली जानवर इलाके में सक्रिय है तो लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

ग्रामीणों का कहना है कि सुबह और शाम के समय जंगल के आसपास जाने में उन्हें डर महसूस हो रहा है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जंगली जानवरों की गतिविधियों की सही जानकारी सामने आने तक सावधानी बरतना जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मामले की जांच करे और जंगल क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि तेंदुए की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

Apprehension of an attack : बाराबंकी में जंगल के पास मिला बंदर का शव, तेंदुए की दहशत से सहमे गांव वाले पगमार्क से हमले की आंशका  ?
Apprehension of an attack : बाराबंकी में जंगल के पास मिला बंदर का शव, तेंदुए की दहशत से सहमे गांव वाले पगमार्क से हमले की आंशका  ?

मृत बंदर मिलने की घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि जंगल में कोई बड़ा जंगली जानवर मौजूद है तो वह आबादी के इतने करीब कैसे पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बछड़े के मृत मिलने की घटना और अब बंदर का शव मिलने से लोगों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ी है।

ग्रामीणों के मुताबिक, जंगल में रहने वाले जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में कभी-कभी आबादी वाले क्षेत्रों के नजदीक आ सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को जंगल क्षेत्र में अकेले जाने से बचने और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की जरूरत है। हालांकि, किसी जानवर की मौजूदगी के बारे में बिना पुष्टि के अफवाह फैलाना भी उचित नहीं है।

इलाके के लोगों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी की चर्चा करीब एक महीने से चल रही है। यदि किसी स्थान पर वास्तव में तेंदुआ मौजूद है तो उसकी गतिविधियों की पुष्टि के लिए निगरानी और विशेषज्ञ जांच की आवश्यकता होगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि जंगल में कोई तेंदुआ है या कोई अन्य जंगली जानवर सक्रिय है।

बंदर के मृत मिलने की घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग की निगरानी को लेकर भी चर्चा है। लोगों की मांग है कि जंगल और आसपास के क्षेत्र में निगरानी की जाए। यदि कोई जंगली जानवर दिखाई देता है तो उसकी तस्वीर या अन्य प्रमाण जुटाकर संबंधित विभाग को सूचना दी जाए। इससे अफवाहों के बजाय वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीणों के बीच यह भी चिंता है कि यदि तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो सबसे पहले पालतू पशुओं की सुरक्षा का सवाल खड़ा होगा। जंगल के आसपास रहने वाले परिवार अक्सर अपने पशुओं को खुले स्थानों पर बांधते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को पशुओं की सुरक्षा के लिए भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बंदर की मौत के कारण और तेंदुए की मौजूदगी दोनों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने अपनी आशंका के आधार पर इसे जंगली जानवर के हमले से जोड़कर देखा है। करीब 10 दिन पहले बछड़े के मृत मिलने की घटना को भी ग्रामीण तेंदुए की गतिविधि से जोड़ रहे हैं। इन दोनों घटनाओं की वास्तविक वजह जांच के बाद ही सामने आ सकती है।

गांव में तेंदुए की चर्चा के कारण लोगों में भय का माहौल जरूर है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके की स्थिति का जायजा लें और जंगल क्षेत्र में आवश्यक निगरानी कराएं। यदि तेंदुए की मौजूदगी मिलती है तो लोगों को उसके संबंध में जागरूक किया जाए और सुरक्षा के जरूरी उपाय बताए जाएं।

फिलहाल शरीफाबाद के जंगल में बंदर के मृत मिलने की घटना ने करीब एक महीने से चली आ रही तेंदुए की मौजूदगी की चर्चा को फिर हवा दे दी है। घर से करीब 30 मीटर की दूरी पर बंदर का शव मिलने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ी है। करीब 10 दिन पहले बछड़े के मृत मिलने की घटना भी लोगों के जेहन में है।

ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि जंगल में तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर मौजूद है तो उसकी पहचान कर लोगों को सतर्क किया जाए। वहीं जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक ग्रामीणों को अफवाहों से बचते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। बंदर की मौत की वजह और क्षेत्र में जंगली जानवर की मौजूदगी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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