Arrangements in order : डायट परिसर में शिक्षकों के ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का सीडीओ ने किया औचक निरीक्षण, विद्यालयों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश ?

Arrangements in order : डायट परिसर में शिक्षकों के ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का सीडीओ ने किया औचक निरीक्षण, विद्यालयों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश ?

Arrangements in order : डायट परिसर में शिक्षकों के ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का सीडीओ ने किया औचक निरीक्षण, विद्यालयों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश ?

हापुड़,

 जनपद में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डायट परिसर, हापुड़ में शिक्षकों के लिए आयोजित ‘सक्षम’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य विकास अधिकारी सुश्री श्रुति शर्मा द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण में उपस्थित अध्यापकों से प्रशिक्षण की प्रगति और विषय-वस्तु की जानकारी ली तथा विद्यार्थियों के शैक्षिक, मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रभावी ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना भी है। विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान की क्षमता और जीवन की विभिन्न परिस्थितियों से निपटने का कौशल विकसित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं के सशक्तिकरण पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रशिक्षण में उपस्थित शिक्षकों को जीवन कौशल एवं क्षमता निर्माण से जुड़े विषयों को विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान, तनाव प्रबंधन तथा आत्मविश्वास बढ़ाने जैसे कौशल विकसित करने की दिशा में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां विद्यार्थी अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकें और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

सीडीओ ने शारीरिक शिक्षा एवं फिजिकल एजुकेशन को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों और खेलों से जोड़ा जाए। शारीरिक रूप से स्वस्थ विद्यार्थी पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसलिए विद्यालयों में खेलकूद एवं शारीरिक शिक्षा को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

मुख्य विकास अधिकारी ने शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यालय में समय से पहुंचकर नियमित रूप से पठन-पाठन कराएं और विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति पर विशेष ध्यान दें। प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता और आवश्यकता को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

इस दौरान बताया गया कि मुख्य विकास अधिकारी द्वारा इससे पूर्व 31 जुलाई 2026 को प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय डुहरी एवं तिसौली खेड़ा का निरीक्षण किया गया था। इसके अतिरिक्त 03 अगस्त 2026 को डायट परिसर में आयोजित अध्यापकों के ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का भी निरीक्षण किया गया था। इन निरीक्षणों के दौरान विद्यालयों की व्यवस्थाओं तथा प्रशिक्षण के विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे।

मुख्य विकास अधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान शासन स्तर से दिए गए निर्देशों के अनुरूप विद्यालयों में व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी शासकीय विद्यालयों का वातावरण स्वच्छ, सुरक्षित और विद्यार्थियों के अनुकूल होना चाहिए। विद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी शासकीय विद्यालयों का प्रांगण पूर्ण रूप से स्वच्छ रखा जाए। विद्यालय की छतों पर पानी जमा नहीं होना चाहिए और छतों पर अनावश्यक रूप से पौधे नहीं उगने चाहिए। कमरों में सीलन की समस्या होने पर उसका तत्काल समाधान कराया जाए। विद्यालय भवन की नियमित देखभाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।

विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सीडीओ ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना चाहिए। पेयजल व्यवस्था की नियमित जांच की जाए और यदि किसी विद्यालय में पानी की व्यवस्था से संबंधित समस्या है तो उसका प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाए।

Arrangements in order : डायट परिसर में शिक्षकों के ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का सीडीओ ने किया औचक निरीक्षण, विद्यालयों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश ?
Arrangements in order : डायट परिसर में शिक्षकों के ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का सीडीओ ने किया औचक निरीक्षण, विद्यालयों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश ?

उन्होंने विद्यालयों में शौचालयों की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। छात्र एवं छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय उपलब्ध होने चाहिए और सभी शौचालय पूरी तरह सक्रिय एवं उपयोग योग्य स्थिति में होने चाहिए। शौचालयों की नियमित सफाई कराई जाए और किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल उसे दूर किया जाए।

इसी प्रकार विद्यालयों में हैंडवॉश की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा विद्युत उपकरणों को चालू एवं सुरक्षित स्थिति में रखने के निर्देश दिए गए। विद्यार्थियों में स्वच्छता की आदत विकसित करने के लिए उन्हें नियमित रूप से हाथ धोने और व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जाना चाहिए।

मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालयों के जर्जर भवनों के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश दिए। ऐसे भवनों अथवा कमरों को चिन्हित किया जाए, जो विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। संबंधित स्थानों पर स्पष्ट रूप से ‘प्रवेश निषेध’ लिखा जाए, ताकि कोई विद्यार्थी या अन्य व्यक्ति अनजाने में वहां प्रवेश न करे। जर्जर भवनों की स्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन (MDM) की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। सीडीओ ने कहा कि विद्यार्थियों को निर्धारित मेनू के अनुसार गुणवत्तापरक भोजन उपलब्ध कराया जाए। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की नियमित निगरानी की जाए। साथ ही विद्यालयों में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यालय के विकास और व्यवस्थाओं में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी विद्यार्थियों को शासन की ओर से निर्धारित यूनिफॉर्म, बैग, जूते आदि उपलब्ध कराए जाएं। यदि किसी विद्यार्थी को निर्धारित सामग्री प्राप्त नहीं हुई है तो उसकी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना विद्यालय की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति को लेकर भी मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अध्यापक समय से विद्यालय पहुंचें और नियमित रूप से पठन-पाठन कराएं। शिक्षक विद्यार्थियों के साथ पर्याप्त समय दें और पाठ्यक्रम के साथ-साथ उनके व्यवहारिक ज्ञान, जीवन कौशल और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दें।

मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालय स्तर पर आवश्यक कार्यों की कार्ययोजना तैयार करने और उस पर तत्काल कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय में जो भी कमियां हैं, उन्हें केवल सूचीबद्ध करके न छोड़ा जाए, बल्कि उनके समाधान के लिए जिम्मेदारी और समयसीमा तय की जाए।

उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया। जिन कार्यों को स्थानीय स्रोतों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है, उन्हें तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए गए। इससे छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और विद्यालयों की व्यवस्थाओं में तेजी से सुधार किया जा सकेगा।

‘सक्षम’ प्रशिक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने शिक्षकों को यह संदेश दिया कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत होते हैं। इसलिए उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं को आत्मविश्वासी और सक्षम बनाने पर जोर देते हुए कहा कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण होना चाहिए जहां बालिकाएं बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें और अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकें। जीवन कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

सीडीओ ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल भवन, संसाधन या सुविधाओं तक सीमित नहीं है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुशासन, स्वच्छता, सुरक्षा, खेल, जीवन कौशल और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को समझना भी जरूरी है। सभी शिक्षक इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने प्रशिक्षण से संबंधित बिंदुओं की जानकारी लेते हुए शिक्षकों को शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और आवश्यक व्यवस्थाओं को समय से पूरा कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

इस प्रकार डायट परिसर में आयोजित ‘सक्षम’ प्रशिक्षण का निरीक्षण करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, बालिका सशक्तिकरण, जीवन कौशल, शारीरिक शिक्षा, स्वच्छता, सुरक्षा और विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों एवं शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से अनुपालन करते हुए जनपद के विद्यालयों को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं विद्यार्थियों के अनुकूल बनाया जाए।

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