Arrangements included : सुरक्षित सफर की कसौटी पर खरे उतरने के लिए सड़कों के साथ व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है ?

Arrangements included : सुरक्षित सफर की कसौटी पर खरे उतरने के लिए सड़कों के साथ व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है ?
Arrangements included : सुरक्षित सफर की कसौटी पर खरे उतरने के लिए सड़कों के साथ व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है ?

सड़क सुरक्षा पर संपादकीय

इसमें दोराय नहीं कि किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी होता है। सड़कें इस बुनियादी ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सड़कें केवल एक स्थान को दूसरे स्थान से जोड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाली जीवनरेखा भी हैं। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सड़क निर्माण की गति निश्चित रूप से तेज हुई है। नए एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और चौड़ी सड़कों का विस्तार हुआ है। यात्रा का समय कम हुआ है और कई क्षेत्रों में आवागमन पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। लेकिन विकास की इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही गंभीर है।

चमकदार और आधुनिक सड़कें तभी विकास का वास्तविक प्रतीक मानी जा सकती हैं, जब उन पर सफर सुरक्षित भी हो। दुर्भाग्य से देश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों का सिलसिला लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। सड़क निर्माण के साथ सुरक्षित यातायात व्यवस्था, प्रभावी निगरानी और दुर्घटना रोकने के उपायों को समान प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि बेहतर सड़कों के बावजूद हादसों की संख्या को लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई देश की कुल सड़क लंबाई की तुलना में बहुत कम है, लेकिन इन पर होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों का अनुपात चिंताजनक है। इसका सीधा अर्थ है कि केवल सड़क की लंबाई बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। सड़क निर्माण की गुणवत्ता, डिजाइन, यातायात प्रबंधन और कानूनों के पालन को भी उतना ही मजबूत करना होगा। सड़क को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी केवल निर्माण एजेंसी की नहीं, बल्कि यातायात पुलिस, स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग और संबंधित अन्य विभागों की भी है।

सरकार की ओर से समय-समय पर सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं और अभियानों की घोषणा की जाती है। यातायात नियमों के पालन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। तेज गति, शराब पीकर वाहन चलाने, हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया जाता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति अपेक्षित रूप से बदलती दिखाई नहीं देती। इसका कारण यह है कि नियमों का प्रभावी और लगातार पालन सुनिश्चित करने के लिए जिस स्तर की निगरानी की आवश्यकता है, वह हर जगह दिखाई नहीं देती।

सड़क दुर्घटनाओं के कई कारण ऐसे हैं, जिन्हें उचित व्यवस्था के माध्यम से आसानी से टाला जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से खड़े वाहन इसका एक बड़ा उदाहरण हैं। कई बार भारी वाहन, ट्रक और अन्य वाहन सड़क के किनारे निर्धारित पार्किंग स्थान के बजाय मुख्य मार्ग या उसके आसपास खड़े कर दिए जाते हैं। रात के समय ऐसे वाहन और भी अधिक खतरनाक साबित होते हैं। पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने पर पीछे से आने वाले वाहन चालकों को सड़क पर खड़े वाहन का समय रहते पता नहीं चल पाता और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे तेजी से बढ़ते भोजनालय और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे हैं। कई स्थानों पर वाहन चालक सड़क किनारे ही वाहन खड़ा करके भोजन या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए चले जाते हैं। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो जाती है और तेज गति से आने वाले वाहनों के लिए अचानक अवरोध पैदा हो जाता है। संबंधित विभागों को ऐसे प्रतिष्ठानों को अनुमति देने से पहले पार्किंग, प्रवेश और निकास की व्यवस्था का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

सिर्फ अनुमति देना ही पर्याप्त नहीं है। अनुमति दिए जाने के बाद भी नियमित निरीक्षण होना चाहिए। यदि किसी प्रतिष्ठान द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है या उसके कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है, तो संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग को लेकर भी इसी प्रकार की सख्ती जरूरी है।

राजमार्गों पर यातायात पुलिस की नियमित गश्त सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस की मौजूदगी से न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है, बल्कि सड़क पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान भी संभव होता है। लेकिन कई स्थानों पर नियमित गश्त और निगरानी का अभाव दिखाई देता है। यदि महत्वपूर्ण राजमार्गों पर लगातार निगरानी रखी जाए तो अवैध पार्किंग, ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और अन्य खतरनाक गतिविधियों पर समय रहते रोक लगाई जा सकती है।

वाहनों की तेज गति भी सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण है। एक्सप्रेस-वे और आधुनिक राजमार्गों पर सड़क की बेहतर स्थिति के कारण वाहन चालक कई बार निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से वाहन चलाते हैं। बेहतर सड़क का अर्थ यह नहीं कि वाहन को किसी भी गति से चलाया जा सकता है। निर्धारित गति सीमा का पालन करना चालक की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए प्रभावी स्पीड मॉनिटरिंग और कार्रवाई की व्यवस्था भी जरूरी है।

Arrangements included : सुरक्षित सफर की कसौटी पर खरे उतरने के लिए सड़कों के साथ व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है ?
Arrangements included : सुरक्षित सफर की कसौटी पर खरे उतरने के लिए सड़कों के साथ व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है ?

आज तकनीक ने यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं पैदा की हैं।

कैमरों, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली, स्पीड डिटेक्शन उपकरणों और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान की जा सकती है। लेकिन इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है, जब उनकी नियमित निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो।

सड़कों के निर्माण में तकनीकी खामियां भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। कहीं अचानक सड़क की ऊंचाई बदल जाती है, कहीं मोड़ पर पर्याप्त दृश्यता नहीं होती, तो कहीं सड़क के किनारे सुरक्षा अवरोधक पर्याप्त नहीं होते। कई स्थानों पर संकेतक या तो मौजूद नहीं होते या इतने अस्पष्ट होते हैं कि चालक को समय रहते जानकारी नहीं मिल पाती। रात के समय इन समस्याओं का खतरा और बढ़ जाता है।

सड़क निर्माण से पहले और निर्माण के बाद सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य रूप से गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। किसी सड़क को आम जनता के लिए खोलने से पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि उसमें ऐसे कोई तकनीकी दोष नहीं हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। सड़क की डिजाइन, मोड़, ढलान, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, डिवाइडर और पैदल यात्रियों की सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं की जांच आवश्यक है।

सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों की जिम्मेदारी बताकर समाप्त नहीं की जा सकती। निश्चित रूप से वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए और तेज गति से बचना चाहिए। लेकिन व्यवस्था की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी सड़क पर बार-बार एक ही स्थान पर दुर्घटनाएं हो रही हैं तो केवल चालकों को दोषी ठहराने के बजाय यह भी देखा जाना चाहिए कि उस स्थान पर सड़क डिजाइन या यातायात प्रबंधन में कोई कमी तो नहीं है।

ब्लैक स्पॉट की पहचान और उनका सुधार भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। जिन स्थानों पर लगातार दुर्घटनाएं होती हैं, वहां कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए और उसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। केवल चेतावनी बोर्ड लगा देना पर्याप्त नहीं है। जरूरत के अनुसार सड़क की डिजाइन में बदलाव, प्रकाश व्यवस्था, स्पीड नियंत्रण और सुरक्षा अवरोधक जैसे उपाय किए जाने चाहिए।

सड़क दुर्घटना के बाद राहत और उपचार की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ समय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो गंभीर परिणामों को कम किया जा सकता है। इसलिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत किया जाना चाहिए।

यह भी जरूरी है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों का नियमित विश्लेषण किया जाए। किस स्थान पर कितनी दुर्घटनाएं हुईं, दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण क्या रहे और किस प्रकार के वाहन सबसे अधिक प्रभावित हुए—इन सभी आंकड़ों का वैज्ञानिक अध्ययन करके नीति बनाई जानी चाहिए। आंकड़ों के आधार पर लिए गए निर्णय अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

सड़क निर्माण पर खर्च होने वाला पैसा तभी सार्थक माना जाएगा, जब उससे लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिले। विकास की रफ्तार के साथ सुरक्षा की रफ्तार भी बढ़नी चाहिए। नई सड़कें बनाना जरूरी है, लेकिन पुरानी सड़कों की मरम्मत, संकेतकों का रखरखाव और यातायात व्यवस्था को मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है।

सरकार, प्रशासन, पुलिस, निर्माण एजेंसियों और आम नागरिकों को मिलकर सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी होगी। नियमों का पालन केवल चालान के डर से नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क पर दिखाई देने वाले खतरों को नजरअंदाज न किया जाए।

आखिरकार सवाल केवल यह नहीं है कि देश में कितने किलोमीटर नई सड़कें बनीं, कितने एक्सप्रेस-वे तैयार हुए या यात्रा का समय कितना कम हुआ। असली सवाल यह है कि इन सड़कों पर सफर करने वाला नागरिक कितना सुरक्षित है। यदि आधुनिक सड़कें भी लोगों की जान बचाने में सफल नहीं हो पा रही हैं, तो विकास की उस तस्वीर पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

सुरक्षित सड़क किसी भी विकसित समाज की पहचान होती है। इसलिए सड़क निर्माण के साथ सड़क सुरक्षा को भी विकास की मूल कसौटी बनाया जाना चाहिए। जब तकनीक, बेहतर डिजाइन, प्रभावी निगरानी, जिम्मेदार यातायात व्यवस्था और नागरिकों की जागरूकता एक साथ काम करेंगे, तभी देश की सड़कें वास्तव में सुरक्षित सफर की कसौटी पर खरी उतर सकेंगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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