Another hike : रसोई गैस के दामों में फिर बढ़ोतरी, 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हुआ 29 रुपये महंगा; तीन महीनों में 89 रुपये बढ़ीं कीमतें ?

Another hike : रसोई गैस के दामों में फिर बढ़ोतरी, 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हुआ 29 रुपये महंगा; तीन महीनों में 89 रुपये बढ़ीं कीमतें

Another hike : रसोई गैस के दामों में फिर बढ़ोतरी, 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हुआ 29 रुपये महंगा; तीन महीनों में 89 रुपये बढ़ीं कीमतें
Another hike : रसोई गैस के दामों में फिर बढ़ोतरी, 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हुआ 29 रुपये महंगा; तीन महीनों में 89 रुपये बढ़ीं कीमतें

नई दिल्ली। आम उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर वृद्धि कर दी गई है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी नई कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। यह वृद्धि ऐसे समय पर हुई है जब आम आदमी पहले से ही खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है।

ताजा बढ़ोतरी के साथ ही पिछले तीन महीनों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कुल 89 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे मध्यम वर्ग, निम्न आय वर्ग और गृहिणियों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। गैस सिलेंडर आज लगभग हर घर की जरूरत बन चुका है और इसकी कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों परिवारों पर पड़ता है।

लगातार बढ़ रही हैं रसोई गैस की कीमतें

पिछले कुछ वर्षों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हालांकि कुछ समय के लिए कीमतों में राहत दी गई थी, लेकिन हाल के महीनों में फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है। तीन महीने पहले हुए संशोधन के बाद अब एक बार फिर कीमतों में इजाफा कर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, परिवहन लागत तथा विनिमय दरों में बदलाव का असर घरेलू गैस की कीमतों पर पड़ता है। यही कारण है कि समय-समय पर तेल विपणन कंपनियां कीमतों में संशोधन करती रहती हैं।

घरेलू बजट पर बढ़ेगा दबाव

रसोई गैस की कीमत बढ़ने का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ता है जो सीमित आय में अपना मासिक खर्च चलाते हैं। एक सामान्य परिवार महीने में एक सिलेंडर का उपयोग करता है। ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतें घरेलू बजट को प्रभावित करती हैं।

गृहिणियों का कहना है कि पहले ही सब्जियों, खाद्य तेल, दूध और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं। अब गैस सिलेंडर महंगा होने से रसोई का खर्च और बढ़ जाएगा। कई परिवारों को अपने अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।

उज्ज्वला लाभार्थियों पर भी असर

हालांकि सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत पात्र परिवारों को सब्सिडी का लाभ दिया जाता है, लेकिन गैस की मूल कीमत बढ़ने का असर इन उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के कारण रिफिल कराने में कठिनाई महसूस करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कीमतों में लगातार वृद्धि होती रही तो कुछ परिवार फिर से पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी, उपले या कोयले का उपयोग करने के लिए मजबूर हो सकते हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

महंगाई पर फिर शुरू हुई चर्चा

रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद महंगाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार से राहत देने की मांग की है।

वहीं सरकार का पक्ष है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के प्रभाव को देखते हुए समय-समय पर आवश्यक मूल्य संशोधन किए जाते हैं। सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद वर्गों को राहत देने का प्रयास भी कर रही है।

Another hike : रसोई गैस के दामों में फिर बढ़ोतरी, 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हुआ 29 रुपये महंगा; तीन महीनों में 89 रुपये बढ़ीं कीमतें
Another hike : रसोई गैस के दामों में फिर बढ़ोतरी, 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हुआ 29 रुपये महंगा; तीन महीनों में 89 रुपये बढ़ीं कीमतें

अन्य शहरों में भी बढ़ी कीमतें

दिल्ली के अलावा देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में समान अनुपात में वृद्धि हुई है। विभिन्न राज्यों में करों और परिवहन लागत के आधार पर कीमतों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन बढ़ोतरी का असर लगभग पूरे देश में देखने को मिलेगा।

तेल कंपनियों के अनुसार नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। उपभोक्ताओं को अब गैस बुकिंग और डिलीवरी के समय संशोधित मूल्य का भुगतान करना होगा।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक अस्थिरता और बढ़ती लागतों का असर घरेलू बाजार पर दिखाई दे रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में नरमी आती है तो भविष्य में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल बढ़ती कीमतों का दौर जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

नई कीमतों की घोषणा के बाद उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है। आम लोगों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि आय के स्रोत उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे। ऐसे में घरेलू गैस जैसी आवश्यक वस्तु का महंगा होना परिवारों की आर्थिक स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

रसोई गैस की कीमतों में 29 रुपये की ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पहुंच गई है। पिछले तीन महीनों में कुल 89 रुपये की वृद्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रसोई का बजट संभालना अब पहले से अधिक कठिन होता जा रहा है। आम जनता की निगाहें अब सरकार और तेल कंपनियों पर टिकी हैं कि आने वाले समय में कीमतों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और उपभोक्ताओं को कोई राहत मिलती है या नहीं।

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