
तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से फसल प्रभावित होने पर किसानों से तत्काल सूचना देने की अपील
हापुड़। जनपद हापुड़ में पिछले दो-तीन दिनों से तेज हवाओं के साथ हो रही वर्षा के मद्देनजर कृषि विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों से विशेष अपील की है। विभाग ने कहा है कि जिन किसानों ने अपनी अधिसूचित फसल का फसल बीमा कराया है और तेज हवा तथा बारिश के कारण उनकी फसल को नुकसान हुआ है, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर इसकी सूचना संबंधित माध्यमों से उपलब्ध कराएं, ताकि फसल क्षति का सर्वेक्षण एवं नियमानुसार क्लेम की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
जिला कृषि अधिकारी, हापुड़ ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल में नुकसान होने की स्थिति में 72 घंटे के भीतर सूचना देना आवश्यक है। किसानों को नुकसान की जानकारी देने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। किसान भारत सरकार के टोल फ्री नंबर 14447, कृषि विभाग के किसान कॉल सेंटर नंबर 0522-2317003, क्रॉप इंश्योरेंस एप, व्हाट्सऐप चैटबॉट नंबर 7065514447 अथवा नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल pmfby.gov.in के माध्यम से अपनी शिकायत अथवा नुकसान की सूचना दर्ज करा सकते हैं।
72 घंटे के भीतर सूचना देना जरूरी
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यदि अधिसूचित फसल को नुकसान पहुंचा है तो सूचना देने में देरी न करें। किसानों को नुकसान का पता चलने के बाद निर्धारित 72 घंटे की अवधि के भीतर संबंधित माध्यम पर अपनी सूचना दर्ज करानी होगी।
विभाग के अनुसार समय से सूचना मिलने पर क्षतिग्रस्त फसल का नियमानुसार आकलन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इसलिए किसान भाई अपनी फसल की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद यदि उन्हें बीमा योजना के अंतर्गत आने वाला नुकसान दिखाई देता है तो तत्काल इसकी सूचना संबंधित नंबर या माध्यम पर दें।
किसानों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपनी शिकायत घर बैठे भी दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें संबंधित टोल फ्री नंबर, किसान कॉल सेंटर, मोबाइल एप, व्हाट्सऐप चैटबॉट अथवा नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा।
पोर्टल पर शिकायत करते समय फोटो करें अपलोड
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई किसान क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल के माध्यम से अपनी फसल क्षति की शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे क्षतिग्रस्त फसल की फोटो लेकर पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इससे फसल को हुए नुकसान की जानकारी दर्ज कराने में सहायता मिलेगी।
किसानों को सलाह दी गई है कि नुकसान होने की स्थिति में खेत में जाकर क्षतिग्रस्त फसल की स्थिति को देखें और आवश्यकतानुसार उसकी तस्वीर सुरक्षित रखें। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते समय मांगी गई जानकारी को सही तरीके से भरें और उपलब्ध निर्देशों के अनुसार फोटो एवं अन्य आवश्यक विवरण अपलोड करें।
हापुड़ में खरीफ की अधिसूचित फसल धान
जनपद हापुड़ में वर्तमान खरीफ मौसम के लिए धान अधिसूचित फसल है। ऐसे में जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत धान की फसल का बीमा कराया है, उन्हें मौसम के कारण हुए नुकसान की स्थिति में योजना के प्रावधानों के अनुसार सूचना देने की सलाह दी गई है।
विशेष रूप से वर्तमान समय में धान की फसल की कटाई का कार्य भी कई क्षेत्रों में चल रहा है। विभाग ने खड़ी फसल के साथ-साथ कटाई के बाद खेत में रखी धान की फसल को लेकर भी किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
कटाई के बाद खेत में पड़ी धान की फसल का भी रखें ध्यान
कृषि विभाग के अनुसार यदि किसान ने धान की फसल की कटाई कर ली है और कटाई के बाद फसल खेत में ही पड़ी है तथा कटाई के बाद 14 दिन की अवधि के भीतर है, तो तेज हवा के साथ हुई बारिश के कारण नुकसान होने की स्थिति में किसान तत्काल इसकी सूचना संबंधित माध्यमों से दें।
विभाग ने बताया है कि कटाई के उपरांत खेत में रखी धान की फसल को चक्रवाती वर्षा, चक्रवात, बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से होने वाला नुकसान फसल बीमा योजना के अंतर्गत अधिसूचित जोखिमों में शामिल है। इसलिए ऐसी स्थिति में किसान समय सीमा का ध्यान रखते हुए नुकसान की सूचना अवश्य दें।
इस संबंध में किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि कटाई के बाद यदि उनकी धान की फसल खेत में पड़ी हुई है और बारिश या तेज हवाओं के कारण उसे नुकसान हुआ है तो वे इसे सामान्य नुकसान मानकर सूचना देने में देरी न करें। निर्धारित समय के भीतर सूचना देना आवश्यक है।
खड़ी धान की फसल को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी
कृषि विभाग ने किसानों से यह भी अपील की है कि यदि धान की खड़ी फसल में तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा से नुकसान हुआ है तो नुकसान की सूचना देते समय कारण का सही उल्लेख करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खड़ी धान की फसल के लिए ‘जलभराव’ को कारण के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है।
इसलिए किसान भाई खड़ी धान की फसल में तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा से नुकसान होने की स्थिति में सूचना देते समय वास्तविक परिस्थिति के अनुरूप कारण दर्ज कराएं। विभाग ने किसानों को विशेष रूप से आगाह किया है कि खड़ी फसल के नुकसान के लिए ‘जलभराव’ को कारण के रूप में दर्ज न करें, क्योंकि यह कारण इस स्थिति में अधिसूचित नहीं है।
किसानों के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि फसल बीमा योजना के अंतर्गत नुकसान की सूचना निर्धारित जोखिम एवं नियमों के अनुरूप दर्ज की जा सके।

तहसीलवार बीमा समन्वयकों से कर सकते हैं संपर्क
कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए जनपद हापुड़ में फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों एवं तहसीलवार बीमा समन्वयकों के संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए हैं। किसान इन अधिकारियों से संपर्क करके फसल नुकसान की सूचना और फसल बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
जनपद हापुड़ में नामित फसल बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के जनपद प्रतिनिधि श्री अमित से मोबाइल नंबर 8090980967 पर संपर्क किया जा सकता है।
इसी प्रकार तहसील हापुड़ क्षेत्र के किसान फसल बीमा कंपनी के बीमा समन्वयक श्री पुनीत कुमार शर्मा से मोबाइल नंबर 9125163422 पर संपर्क कर सकते हैं।
तहसील गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के किसानों के लिए फसल बीमा कंपनी के समन्वयक श्री धीरेन्द्र सोलंकी का मोबाइल नंबर 9756482038 उपलब्ध कराया गया है।
वहीं तहसील धौलाना क्षेत्र के किसान फसल बीमा कंपनी के समन्वयक श्री देशराज सिंह से मोबाइल नंबर 9873087500 पर संपर्क कर सकते हैं।
कृषि विभाग ने इन सभी क्षेत्रों के किसानों से अपील की है कि फसल नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित 72 घंटे की समय सीमा के अंदर सूचना अवश्य दें।
उपकृषि निदेशक कार्यालय परिसर में भी दे सकते हैं सूचना
किसानों की सुविधा के लिए फसल बीमा कंपनी का कार्यालय भी जनपद में उपलब्ध है। विभाग के अनुसार फसल बीमा कंपनी का कार्यालय नगर कोतवाली के बगल में स्थित उपकृषि निदेशक कार्यालय परिसर में है। किसान यहां पहुंचकर भी फसल नुकसान से संबंधित सूचना दे सकते हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि फसल बीमा योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा नुकसान की सूचना देने के लिए निर्धारित माध्यमों का इस्तेमाल करें और समय सीमा का विशेष ध्यान रखें।
किसानों से अपील—समय पर करें सूचना
जिला कृषि अधिकारी हापुड़ ने किसानों से अपील की है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए किसान अपनी धान की फसल का निरीक्षण करते रहें। यदि तेज हवाओं और वर्षा के कारण बीमित अधिसूचित फसल को नुकसान हुआ है तो किसान 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना संबंधित माध्यम से दर्ज कराएं।
कृषि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बीमित फसल के नुकसान की सूचना समय पर देने से आगे की प्रक्रिया नियमानुसार संचालित की जा सकेगी। किसानों को अपनी फसल की क्षति से संबंधित आवश्यक जानकारी और फोटो आदि सुरक्षित रखने की भी सलाह दी गई है।
इस समय जनपद में खरीफ की अधिसूचित फसल धान होने के कारण धान उत्पादक किसानों के लिए यह सूचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। खड़ी फसल और कटाई के बाद खेत में पड़ी फसल के लिए बीमा योजना के प्रावधान अलग-अलग परिस्थितियों में लागू होते हैं। कटाई के बाद 14 दिन के भीतर खेत में पड़ी धान की फसल को चक्रवाती वर्षा, चक्रवात, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से होने वाला नुकसान अधिसूचित जोखिमों में शामिल है।
वहीं खड़ी धान की फसल के मामले में किसानों को नुकसान का कारण दर्ज करते समय विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित बीमा कंपनी के प्रतिनिधि, तहसीलवार बीमा समन्वयक अथवा कृषि विभाग से संपर्क कर सही जानकारी प्राप्त करें।
जिला कृषि अधिकारी, हापुड़ ने कहा कि किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है। किसानों को चाहिए कि वे नुकसान की स्थिति में निर्धारित समय सीमा का पालन करते हुए तत्काल सूचना दें, ताकि उनके मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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