
सागर। सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में प्रशासन की कार्रवाई के बीच जबलपुर हाईकोर्ट से आरोपियों सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और राजकुमारी कुशवाहा को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है। प्रशासन की ओर से आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मकान तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। अब मामले में आज फिर सुनवाई होगी।
आरोपियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रशासन द्वारा की जा रही संपत्ति संबंधी कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप होना चाहिए। इसी आधार पर घरों पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को रोकने की मांग की गई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए मामले को अगली सुनवाई के लिए तय कर दिया।
इस अंतरिम आदेश के बाद प्रशासन को आरोपियों के घरों पर तत्काल बुलडोजर कार्रवाई रोकनी होगी। हालांकि, यह राहत फिलहाल अंतरिम है और मामले की आगे की सुनवाई के बाद अदालत का रुख स्पष्ट होगा।
जहरीली शराब कांड के बाद लगातार कार्रवाई
सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस पूरे मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध शराब कहां तैयार हुई, इसकी सप्लाई किन लोगों के माध्यम से हुई और इसे किन क्षेत्रों में पहुंचाया गया। घटना के बाद प्रशासन ने शराब कारोबार से जुड़े लाइसेंस, संपत्तियों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की भी जांच शुरू की है।
सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और राजकुमारी कुशवाहा पर अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं। इन आरोपों को लेकर पुलिस की जांच और कानूनी कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर जारी है। आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
दो शराब दुकानों के लाइसेंस किए गए निरस्त
जहरीली शराब मामले के बाद प्रशासन ने शराब कारोबार से जुड़े लाइसेंस पर भी सख्ती दिखाई है। विनायका और बंडा थाना क्षेत्रों में आपराधिक मामलों में संलिप्तता पाए जाने के बाद दो शराब दुकानों के कंपोजिट लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।
प्रशासन के अनुसार, मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के तहत यह कार्रवाई की गई है। इनमें मगरधा समूह के लाइसेंसधारी सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और बरेठी शराब दुकान के लाइसेंसधारी यशवंत सिंह ठाकुर शामिल हैं।

लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित शराब दुकानों के संचालन पर भी असर पड़ा है। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य शराब कारोबार से जुड़े नियमों के उल्लंघन और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के मामलों में कार्रवाई करना बताया गया है।
पत्थर क्रशर की खनिज लीज भी निरस्त
प्रशासन ने सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा से जुड़ी ग्राम मसवासी स्थित पत्थर क्रशर की खनिज लीज भी निरस्त कर दी है। प्रशासन की ओर से बताया गया कि नियमों के लगातार उल्लंघन और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करने के कारण यह कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई से यह साफ है कि जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन ने केवल शराब दुकानों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि आरोपियों से जुड़ी अन्य गतिविधियों की भी जांच शुरू की है।
क्रशर की खनिज लीज निरस्त किए जाने की कार्रवाई शराब कांड से जुड़ी पुलिस जांच से अलग प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। संबंधित विभाग ने नियमों और निर्धारित शर्तों के उल्लंघन को इसका आधार बताया है।
घरों पर कार्रवाई से पहले पहुंचा मामला हाईकोर्ट
आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी के बीच मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गया। आरोपियों ने अदालत में अपनी संपत्ति पर प्रस्तावित कार्रवाई को चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए राहत की मांग की।
गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने तत्काल मकान तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल थम गई है।
अदालत का यह आदेश अंतिम फैसला नहीं है। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जांच के साथ बढ़ता गया कार्रवाई का दायरा
जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सागर जिले में प्रशासनिक कार्रवाई लगातार बढ़ती गई है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ अवैध शराब की सप्लाई और उससे जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाने का काम शुरू किया। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने शराब दुकानों के लाइसेंस और अन्य संपत्तियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की।
इस पूरे घटनाक्रम में अब न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ प्रशासन अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आरोपियों ने संपत्ति संबंधी कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है।
आज की सुनवाई पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजर आज होने वाली सुनवाई पर है। अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अंतरिम राहत जारी रखने की मांग की जा सकती है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई और उसके आधार से संबंधित पक्ष रख सकता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और राजकुमारी कुशवाहा के घरों पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई रुक गई है। वहीं जहरीली शराब मामले की पुलिस जांच और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई अपनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है।
सागर जहरीली शराब कांड में अब जांच, गिरफ्तारी, प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक सुनवाई—चारों स्तर पर घटनाक्रम आगे बढ़ रहा है। आज की सुनवाई में अदालत से मिलने वाले अगले निर्देश से यह तय होगा कि आरोपियों के मकानों पर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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