
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में एक दंपती मोहम्मद साहिल और उनकी पत्नी समीरा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के संपर्क में रहने और उनके लिए कथित तौर पर काम करने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी दंपती ने आर्थिक लाभ के बदले पाकिस्तान से जुड़े लोगों को भारतीय मोबाइल सिम कार्ड उपलब्ध कराने में मदद की। पुलिस का दावा है कि करीब 30 हजार रुपये के बदले आठ भारतीय सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे गए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़े लोगों द्वारा संचार के लिए किया जाना था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्डों का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इनके जरिए किन लोगों से संपर्क स्थापित किया गया।
पुलिस की जांच में दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन फोन में संदिग्ध चैट और बातचीत से संबंधित डिजिटल सामग्री मिली है। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और उनके बीच किस प्रकार की बातचीत हुई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अब कथित जासूसी मॉड्यूल के नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि दंपती के अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के संपर्कों की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने के लिए किसने कहा था और इसके बदले उन्हें भुगतान किस माध्यम से किया गया।
जांच में दुबई कनेक्शन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, आठ भारतीय सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सिम कार्ड किस व्यक्ति को सौंपे गए और उन्हें पाकिस्तान तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया किस नेटवर्क के माध्यम से हुई।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय मोबाइल सिम कार्ड का इस्तेमाल विदेश में बैठे लोगों द्वारा किया जा सकता है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कथित रूप से भेजे गए सिम कार्ड किन नंबरों पर सक्रिय हुए और उनका उपयोग किन गतिविधियों के लिए किया गया।
पुलिस द्वारा बरामद दोनों मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच भी की जा सकती है। इनमें मौजूद चैट, संपर्क नंबर, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, बरामद डिजिटल सामग्री की वास्तविक प्रकृति और उसका मामले से संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
आरोपी दंपती पर संवेदनशील जानकारी जुटाने में मदद करने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर किस प्रकार की जानकारी एकत्र की गई और उसे किन लोगों तक पहुंचाया गया।
इस मामले में पुलिस आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर सकती है। 30 हजार रुपये के कथित भुगतान का स्रोत, भुगतान का माध्यम और उससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाना जांच का अहम हिस्सा होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दंपती का कथित नेटवर्क से किस स्तर तक संपर्क था।
जांच एजेंसियां आरोपियों के पिछले संपर्कों और गतिविधियों को भी खंगाल रही हैं। पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि क्या दोनों पहले से किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में थे या कथित गतिविधियां हाल में शुरू हुईं।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि आठ सिम कार्ड हासिल करने के लिए किन दस्तावेजों और माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। यदि किसी अन्य व्यक्ति ने सिम कार्ड उपलब्ध कराने में सहायता की होगी तो जांच के दौरान उसकी भूमिका भी सामने आ सकती है।

पुलिस कथित मॉड्यूल से जुड़े डिजिटल संपर्कों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। बरामद मोबाइल फोन में मौजूद जानकारी से अन्य संदिग्ध नंबरों और खातों की जानकारी मिलने की संभावना है। इसके आधार पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पुलिस बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच के साथ-साथ आरोपियों से पूछताछ भी कर रही है। दोनों से कथित संपर्कों, भुगतान और सिम कार्ड भेजने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि कथित पाकिस्तानी एजेंटों ने दंपती से किस माध्यम से संपर्क किया। यदि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क हुआ था तो उसके रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस के सामने अब इस कथित मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क को समझने की चुनौती है। केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के आधार पर पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। इसलिए उनके संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की जांच के जरिए अन्य संभावित लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
मामले में आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। किसी भी आरोपी की भूमिका अदालत में साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होगी।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से कथित मॉड्यूल के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि क्या दंपती ने इससे पहले भी किसी प्रकार की संवेदनशील जानकारी या अन्य सामग्री उपलब्ध कराई थी।
सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर सकती हैं कि पाकिस्तान से जुड़े लोगों ने भारतीय सिम कार्ड हासिल करने के लिए इस नेटवर्क का इस्तेमाल क्यों किया। इसके पीछे संचार व्यवस्था को छिपाने या अलग पहचान के इस्तेमाल की कोई कोशिश थी या नहीं, यह जांच का विषय है।
दंपती से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों और विदेश यात्रा या संपर्कों से संबंधित जानकारी भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उनके संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
बरामद मोबाइल फोन में संदिग्ध चैट मिलने की बात सामने आई है। इन चैट की सत्यता, समय और संदर्भ की जांच की जाएगी। केवल चैट की मौजूदगी से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पुलिस उसे अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखेगी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगी कि कथित संवेदनशील जानकारी किस प्रकार जुटाई गई और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। यदि किसी सरकारी या रणनीतिक जानकारी तक पहुंच के प्रयास के साक्ष्य सामने आते हैं, तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां संभावित अन्य संपर्कों को लेकर भी सतर्क हो गई हैं। कथित मॉड्यूल से जुड़े लोगों की पहचान होने पर उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि आरोपी दंपती की भूमिका कितनी व्यापक थी और कथित नेटवर्क में उनका स्थान क्या था। फिलहाल पुलिस उपलब्ध डिजिटल और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
कुल मिलाकर, दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े होने के आरोप वाले एक कथित जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार मोहम्मद साहिल और उनकी पत्नी समीरा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों पर करीब 30 हजार रुपये के बदले आठ भारतीय सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजने और संवेदनशील जानकारी जुटाने में मदद करने का आरोप है। पुलिस ने दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनमें संदिग्ध चैट मिलने की बात कही गई है। फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, आर्थिक लेनदेन और आरोपियों के संपर्कों की जांच कर रही है। साथ ही कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। मामले में सामने आने वाले तथ्यों और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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