Fine in rupees : 13 साल पुराने लूटकांड में दो दोषियों को आठ आठ साल की सजा, 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया ?

Fine in rupees : 13 साल पुराने लूटकांड में दो दोषियों को आठ आठ साल की सजा, 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया ?
Fine in rupees : 13 साल पुराने लूटकांड में दो दोषियों को आठ आठ साल की सजा, 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया ?

सहारनपुर।

वर्ष 2013 में थाना सदर बाजार क्षेत्र में हुई चर्चित लूट की वारदात के मामले में करीब 13 साल बाद न्यायालय का फैसला सामने आया है। सशक्त अभियोजन पैरवी के परिणामस्वरूप अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-10, सहारनपुर की अदालत ने मामले में दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस एवं अभियोजन पक्ष ने इसे प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है। मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मॉनिटरिंग सेल द्वारा लगातार मामले की निगरानी की गई और न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की गई।

अभियोजन के अनुसार, घटना 5 जून 2013 की है। थाना सदर बाजार क्षेत्र निवासी जयसिंह लांबा ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वह अपने साथी मोहम्मद फारुख के साथ जा रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और असलहे के बल पर उनकी मोटरसाइकिल लूट ली।

बताया गया कि वारदात के दौरान बदमाशों ने जयसिंह लांबा की पल्सर मोटरसाइकिल, जिसका पंजीकरण नंबर यूपी-11 एएच 5259 था, अपने कब्जे में ले लिया। इसके साथ ही उनके साथी मोहम्मद फारुख की मोटरसाइकिल, जिसका पंजीकरण नंबर यूपी-11 डब्ल्यू 1271 था, भी लूट ली गई।

घटना के बाद पीड़ितों ने थाना सदर बाजार पहुंचकर पुलिस को पूरी जानकारी दी। उनकी तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले में धारा 392 भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की।

लूट की घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचना की। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में शुरू हुई।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की भूमिका को साबित करने के लिए प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। लंबे समय तक चले न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब न्यायालय ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराया है।

न्यायालय ने महताब उर्फ काना उर्फ जीवा निवासी ग्राम बलवा, थाना कैराना, जनपद शामली तथा सादर उर्फ खां साहब निवासी मोहल्ला शेखजादगान, कस्बा एवं थाना तीतरों, जनपद सहारनपुर को दोषी करार दिया।

अदालत ने दोनों अभियुक्तों को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त प्रत्येक दोषी पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। न्यायालय का फैसला आने के बाद पुलिस एवं अभियोजन पक्ष ने इसे कानून व्यवस्था के मामलों में प्रभावी पैरवी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

इस मामले में तीसरा अभियुक्त मुकीम उर्फ काला भी आरोपी था, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी है। इसलिए उसके संबंध में न्यायिक प्रक्रिया उसी रूप में आगे नहीं बढ़ सकी। मामले में जीवित दो अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में सुनवाई जारी रही और अंततः अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

Fine in rupees : 13 साल पुराने लूटकांड में दो दोषियों को आठ आठ साल की सजा, 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया ?
Fine in rupees : 13 साल पुराने लूटकांड में दो दोषियों को आठ आठ साल की सजा, 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया ?

पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुराने मामलों में प्रभावी पैरवी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को न्यायालय से कानून के अनुसार सजा दिलाई जा सके और पीड़ितों को न्याय प्राप्त हो।

इसी क्रम में इस मामले की मॉनिटरिंग सेल द्वारा लगातार निगरानी की गई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन से जुड़े अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने आवश्यक दस्तावेज एवं साक्ष्य प्रस्तुत कराने में सहयोग किया। मामले की प्रभावी पैरवी के कारण अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।

अभियोजन की ओर से एडीजीसी शिव सिंह ने न्यायालय में मामले की प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अभियोजन पक्ष की ओर से उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखा। अभियोजन पक्ष की ओर से की गई पैरवी के बाद न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।

इस मामले के विवेचक तत्कालीन उपनिरीक्षक मुकेश कुमार रहे थे। विवेचना के दौरान घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को एकत्र किया गया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई। वहीं मामले के पैरोकार हेड कांस्टेबल मोहित कुमार रहे, जिन्होंने न्यायालय में केस से संबंधित प्रक्रियाओं में सहयोग किया।

करीब 13 साल पुराने इस मामले में फैसला आने से पुलिस की प्रभावी अभियोजन पैरवी की नीति को बल मिला है। पुराने आपराधिक मामलों में लंबे समय बाद आने वाले फैसले यह भी दर्शाते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी का महत्वपूर्ण स्थान है।

पुलिस विभाग की ओर से ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत ऐसे मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है, जिनमें अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमे विचाराधीन हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं कि मामलों में आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए जाएं और अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए।

सदर बाजार थाना क्षेत्र की वर्ष 2013 की यह लूट की घटना उस समय गंभीर अपराध के रूप में सामने आई थी। पीड़ितों की मोटरसाइकिलों को असलहे के बल पर लूटे जाने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। अब न्यायालय के फैसले के बाद मामले में दो दोषियों को सजा मिल गई है।

न्यायालय द्वारा सुनाई गई आठ-आठ वर्ष की कठोर कारावास की सजा और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड को अपराध के प्रति कानून की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस एवं अभियोजन पक्ष का कहना है कि अपराधियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी लगातार जारी रहेगी।

पुलिस विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में अभियोजन की कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका उद्देश्य न्यायालय में मामलों की मजबूत पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाना और कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास बनाए रखना है।

इस मामले में पुलिस की ओर से की गई विवेचना, अभियोजन पक्ष की पैरवी और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर करीब 13 वर्ष बाद फैसला आया। दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिए जाने के साथ ही उन्हें आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

फैसले के बाद पुलिस अधिकारियों ने अभियोजन पक्ष से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रभावी पैरवी की सराहना की। मामले में एडीजीसी शिव सिंह की पैरवी, तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक मुकेश कुमार की विवेचना तथा पैरोकार हेड कांस्टेबल मोहित कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

कुल मिलाकर, वर्ष 2013 के सदर बाजार क्षेत्र के लूटकांड में करीब 13 वर्ष बाद न्यायालय का फैसला आया है। अदालत ने महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर उर्फ खां साहब को दोषी मानते हुए दोनों को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास तथा 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले के तीसरे आरोपी मुकीम उर्फ काला की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई प्रभावी पैरवी इस फैसले में महत्वपूर्ण रही।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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