Grand Poetry Symposium : अम्बेडकर जयंती पर साहित्यिक संस्था द्वारा भव्य कवि सम्मेलन में विचारों का हुआ प्रसार

भारत के सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के महान प्रतीक भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य आभासी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल साहित्यिक जगत को एक मंच प्रदान किया, बल्कि बाबा साहब के विचारों और उनके संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया।
यह कार्यक्रम श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्याधाम की शाखा जनपद उन्नाव के तत्वाधान में आयोजित किया गया। आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कवियों और कवयित्रियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिससे यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप ग्रहण कर सका।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजीनियर एन.सी. खंडेलवाल द्वारा की गई, जिन्होंने अपने उद्बोधन में बाबा साहब के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी समाज को प्रेरित करता है।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ भगवान भगवान श्री गणेश की वंदना के साथ हुआ, जिसे डॉ. छाया शर्मा ने अपने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया। इसके पश्चात माता सरस्वती की वंदना पटल के संरक्षक अवधेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा की गई। इन वंदनाओं ने पूरे कार्यक्रम को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण प्रदान किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक, वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक गोयल चक्रवर्ती उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “वंचितों की पीड़ा को जिसने अपना दर्द बनाया, वही भारत रत्न भीमराव अंबेडकर कहलाया।” उनके इस कथन ने बाबा साहब के जीवन के मूल उद्देश्य को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया।
मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय प्रभारी बीना गोयल ने भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने विचारों में कहा कि डॉ. अंबेडकर का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को आवाज देने का कार्य किया।
इस कवि सम्मेलन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग दो दर्जन कवि और कवयित्रियों ने भाग लिया। सभी ने अपने-अपने अंदाज में काव्य पाठ प्रस्तुत कर बाबा साहब के विचारों, सामाजिक न्याय और समानता के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

आमंत्रित कवियों में दिनेश कुमार दुबे (छत्तीसगढ़), कृष्ण कुमार गुप्ता (पुणे), डॉ. छाया शर्मा (अजमेर), डॉ. शशि जायसवाल (प्रयागराज), शिव कुमार गुप्त (मध्य प्रदेश), जनकवि सुखराम शर्मा सागर, मंजू दलाल ‘मंजरी’ (नई दिल्ली), विनीता सिंह (बीकानेर), सम्पत्ति चौरे ‘स्वाति’ (छत्तीसगढ़), डॉ. बसंत श्रीवास (नारायणपुर), मनोज मंजुल ओज (कासगंज), नीलम रानी सक्सेना (रामपुर), डॉ. राम लखन वर्मा (रायबरेली), ईश्वर चंद्र विद्यावाचस्पति और सुरेश कुमार बंछोर जैसे कई प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे।
इन सभी कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता, भेदभाव और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और बाबा साहब के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और परिवर्तन की प्रेरणा स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कार्यक्रम का सफल संचालन शाखा के जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार “अनोखे” द्वारा किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को कुशलता से संचालित करते हुए सभी प्रतिभागियों को एक मंच पर जोड़े रखा।
यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप भी लिए हुए था। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साहित्य समाज को बदलने की शक्ति रखता है और जब साहित्यकार किसी महान व्यक्तित्व के विचारों को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं, तो उसका प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है।
भीमराव अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने अपने जीवन में जो संघर्ष किया, वह आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अम्बेडकर जयंती के अवसर पर इस प्रकार के आयोजनों का विशेष महत्व होता है। ये न केवल लोगों को बाबा साहब के विचारों से परिचित कराते हैं, बल्कि उन्हें समाज में समानता और न्याय स्थापित करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
इस कार्यक्रम ने यह भी साबित किया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए भी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आयोजित किया जा सकता है। आभासी मंच ने देश के विभिन्न हिस्सों के कवियों को एक साथ जोड़ने का कार्य किया, जो पारंपरिक आयोजनों में संभव नहीं हो पाता।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि यह कवि सम्मेलन एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन रहा, जिसने बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि जब तक समाज में समानता और न्याय की स्थापना नहीं होती, तब तक विकास अधूरा रहेगा। और इस दिशा में बाबा साहब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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