
हापुड़। राज्य सरकार के माध्यम से संचालित मत्स्य संरक्षण एवं संवर्धन कार्यक्रम के तहत गुरुवार को जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्थित ब्रजघाट में गंगा नदी में रिवर रैचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। मत्स्य विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में गंगा की मत्स्य सम्पदा को बढ़ावा देने और जलीय जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से एक लाख मत्स्य अंगुलिकाएं गंगा नदी में प्रवाहित की गईं। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं मत्स्य विभाग के अधिकारियों, निषाद समाज के प्रतिनिधियों तथा क्षेत्र के मत्स्य कृषकों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में मत्स्य सम्पदा का संरक्षण एवं संवर्धन करना तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना रहा। रिवर रैचिंग के माध्यम से गंगा नदी में मत्स्य प्रजातियों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया गया, जिससे नदी की जैव विविधता को संरक्षण मिलने के साथ मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका को भी मजबूती मिल सके।
ब्रजघाट में हुआ रिवर रैचिंग कार्यक्रम
मत्स्य विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम 8 अक्टूबर 2026 को गंगा नदी, ब्रजघाट, गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़ में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और मत्स्य कृषक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गढ़मुक्तेश्वर विधायक श्री हरेन्द्र सिंह तेवतिया रहे। उनकी मौजूदगी में गंगा नदी में मत्स्य अंगुलिकाओं को प्रवाहित किया गया। इस दौरान अधिकारियों और उपस्थित लोगों ने नदी के जलीय जीवन को संरक्षित करने तथा गंगा की स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प भी व्यक्त किया।
रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत गंगा नदी में एक लाख मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित की गईं। मत्स्य विभाग का यह प्रयास नदी में मत्स्य सम्पदा के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मत्स्य सम्पदा के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों ने गंगा नदी की स्वच्छता और निर्मलता बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि गंगा केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी है। नदी में अनेक प्रकार के जलीय जीव और मत्स्य प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनका संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन के लिए जरूरी है।
गंगा की स्वच्छता और जलीय जैव विविधता का सीधा संबंध नदी के स्वास्थ्य से है। यदि नदी में प्रदूषण बढ़ता है या जलीय जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां कम होती हैं तो इसका प्रभाव मत्स्य सम्पदा पर भी पड़ता है। ऐसे में रिवर रैचिंग जैसे कार्यक्रमों के जरिए मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखना केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों और नदी से जुड़े समुदायों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
जलीय जैव विविधता के संरक्षण में रिवर रैचिंग अहम
कार्यक्रम में रिवर रैचिंग के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि नदी में मत्स्य अंगुलिकाओं का प्रवाह मत्स्य सम्पदा के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नदी में मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाते हैं।
जलीय जैव विविधता के संरक्षण का उद्देश्य केवल मछलियों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि नदी के पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखना भी है। नदी में विभिन्न प्रकार के जलीय जीव एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इसलिए किसी एक प्रजाति में कमी आने का प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि गंगा की स्वच्छता बनाए रखने के साथ नदी में रहने वाले जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी जरूरी है।
मत्स्य कृषकों को योजनाओं का लाभ लेने की अपील
कार्यक्रम में क्षेत्र के मत्स्य कृषक भी मौजूद रहे। इस अवसर पर मत्स्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए मत्स्य कृषकों को इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। यदि मत्स्य कृषक आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेकर मत्स्य पालन करें तो वे अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
मत्स्य विभाग की योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। कार्यक्रम में किसानों से कहा गया कि वे विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाएं।

गंगा संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण
गढ़मुक्तेश्वर और ब्रजघाट क्षेत्र गंगा नदी से सीधे जुड़े हुए हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए गंगा पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में गंगा की स्वच्छता और जलीय जीवन का संरक्षण स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अपील की गई कि गंगा नदी में किसी भी प्रकार का कूड़ा-कचरा न डालें और नदी को प्रदूषित होने से बचाने में सहयोग करें। गंगा की निर्मलता बनाए रखने से न केवल जलीय जीवों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, बल्कि नदी से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
गंगा में मत्स्य सम्पदा के संरक्षण के लिए स्थानीय मत्स्य कृषकों और मछुआरा समुदाय की भागीदारी भी अहम मानी गई। कार्यक्रम में मौजूद निषाद समुदाय के प्रतिनिधियों और मत्स्य कृषकों को भी नदी संरक्षण के प्रयासों में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
रिवर रैचिंग कार्यक्रम में सहायक पुलिस अधीक्षक श्री महेश कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य, गाजियाबाद श्रीमती ऋचा चौधरी, श्री डी.पी. निषाद, अध्यक्ष निषाद पार्टी, जनपद हापुड़ तथा प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण, हापुड़ सहित क्षेत्र के मत्स्य कृषक मौजूद रहे।
सभी ने गंगा नदी में मत्स्य अंगुलिकाओं के प्रवाह कार्यक्रम में भाग लिया और गंगा की स्वच्छता तथा जलीय जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार की ओर से गंगा नदी सहित जलीय संसाधनों के संरक्षण और मत्स्य सम्पदा के संवर्धन के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। रिवर रैचिंग भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
आर्थिक स्वावलंबन से जुड़ा प्रयास
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष मत्स्य कृषकों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रेरित करना भी रहा। अधिकारियों ने कहा कि मत्स्य पालन को व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय का एक बेहतर स्रोत विकसित कर सकते हैं।
मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से पात्र मत्स्य कृषकों को विभिन्न प्रकार की सुविधाओं और सहायता से जोड़े जाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग ने किसानों से कहा कि वे योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए उनका लाभ उठाएं।
गंगा की निर्मलता के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गंगा नदी की स्वच्छता और निर्मलता बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। नदी में प्रदूषण कम करने के साथ-साथ जलीय जीवों के संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा।
गंगा में एक लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का प्रवाह इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे नदी में मत्स्य सम्पदा को बढ़ावा देने के साथ जलीय जैव विविधता के संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है।
8 अक्टूबर को ब्रजघाट में आयोजित रिवर रैचिंग कार्यक्रम के माध्यम से मत्स्य विभाग ने गंगा की मत्स्य सम्पदा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। एक लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का गंगा में प्रवाह, गंगा की स्वच्छता के प्रति जागरूकता और मत्स्य कृषकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास—इन तीनों पहलुओं को कार्यक्रम में प्रमुखता दी गई। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रयासों और स्थानीय लोगों की भागीदारी से गंगा की जलीय जैव विविधता को मजबूत करने के साथ मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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